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बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास व रहस्य से जुड़ी रोचक बातें | Facts about brihadeshwara temple in hindi

अद्भुत वास्तुकला व कारीगरी का नमूना, बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास, बृहदेश्वर मंदिर कहां स्थित है?(mysterious facts about brihadeshwara temple in hindi)

भारत भूमि सनातन संस्कृति की धार्मिक स्थलों की धरोहर है। यहां पर एक से बढ़कर एक धार्मिक स्थल मंदिर इत्यादि उपस्थित हैं। भारत में उपस्थित इन विभिन्न धार्मिक स्थलों की वास्तुकला बहुत ही विशेष है और साथ ही साथ इनसे बहुत से रोचक रहस्य भी जुड़े हुए हैं। भारत में एक ऐसा ही मंदिर है जिसका नाम है बृहदेश्वर मंदिर जो अपने अंदर कई सारे रहस्यों को समेट कर बैठा हुआ है। इस मंदिर का इतिहास और रहस्य अत्यंत ही रोचक है। 1000 साल पुराना ग्रेनाइट पत्थर से बना अनूठा बृहदेश्वर मंदिर, जिसके निर्माण से जुड़े अद्भुत रहस्य जानकार आप दंग रह जायेंगे।

बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह तमिलनाडु के तंजावुर या तंजौर में स्थित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस में स्थापित की गई मूर्ति नृत्य की मुद्रा में है। नृत्य की मुद्रा धारण किए हुए यह मूर्ति नटराज के नाम से जानी जाती है।

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इस मंदिर का निर्माण चोल राज वंश के राजा राजराज द्वारा लगभग 1009 ईसवी में कराया गया था। इस मंदिर को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है जिनमें राजेश्वर मंदिर, राजराजेश्वर मंदिर और पेरिया कोविल का नाम अत्यंत ही प्रसिद्ध है। यह मंदिर बहुत ही रहस्यमय है और लगभग 1000 साल से भी ज्यादा पुराना है। अपनी रहस्यमई खूबियों और विशेषताओं के चलते इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व के धरोहरों में शामिल किया है।

बृहदेश्वर मंदिर की वास्तुकला बहुत ही शानदार और अद्भुत है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। इस मंदिर की संरचना और वास्तुकला दक्षिण शासकों की स्थापत्य कला और आत्मीयता को दर्शाता है।

आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि इस मंदिर को बनाने के लिए लगभग 130000 टन ग्रेनाइट का उपयोग किया गया है तब जाकर इस मंदिर की अद्भुत वास्तुकला को अंजाम दिया गया है।

तो आइए इस रहस्यमई मंदिर की इतिहास कथा और इससे जुड़े हुए रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं।

बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास व रहस्य (facts about brihadeshwara temple in hindi)

बृहदेश्वर मंदिर कहां स्थित है? (History of Bruhadeshwar Mandir in hindi)

आपको बता दें कि यह बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण सन 1004 से 1009 के बीच राजा चोल द्वारा करवाया गया था।

राजराज प्रथम को इस मंदिर का निर्माणकर्ता माना जाता है कहा जाता है कि इसीलिए इस मंदिर को राजराजेश्वर मंदिर कहकर भी संबोधित किया जाता है।

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मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अद्भुत और आकर्षक है। इस वास्तुकला को द्रविड़ वास्तुकला कहा जाता है।

इस मंदिर का पूरा वजन 130000 टन है। इस मंदिर को इसके भार के बराबर ग्रेनाइट के इस्तेमाल द्वारा बनाया गया है। इस मंदिर के गुंबद का वजन लगभग 80 टन है। जबकि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति का वजन 25 टन है।

इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 216 फुट है यानी कि 66 मीटर की ऊंचाई है। आपको बता दें कि यह मंदिर 240 से लेकर ढाई सौ मीटर तक लंबा है जबकि इसकी चौड़ाई 122 मीटर से 125 मीटर के करीब है।

बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास –

कहा जाता है कि बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण  चोल राजा द्वारा शुरू करवाया गया था। मंदिर के निर्माण की शुरुआत लगभग 1004 में हुई थी तथा 1009 में मंदिर बनकर तैयार हुआ था यानी कि कुल 5 वर्ष लगे थे इस मंदिर को तैयार करने में। इस मंदिर का निर्माण राजराज द्वारा करवाया गया था जो कि शिवप्रेमी और शिव भक्त थे।

कहा जाता है कि उन्होंने इस मंदिर के अलावा कई अन्य शिव मंदिरों का निर्माण भी करवाया था चोल वंश के राजा राजराज द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराए जाने के कारण इस मंदिर को राजराजेश्वर मंदिर कह कर भी संबोधित किया जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा ने अपने वंश को भगवान शिव का आशीर्वाद दिलवाने के लिए करवाया था। यह मंदिर विश्व के विशालकाय संरचना वाले मंदिरों में से एक है।

बृहदेश्वर मंदिर की अद्भुत वास्तुकला –

यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जानी जाती है जो अत्यंत ही अद्भुत है और इसे रहस्यमई बनाती है। यह मंदिर ग्रेनाइट मंदिरों में से एक है जिसका निर्माण 130000 टन ग्रेनाइट की सहायता से किया गया है। इन ग्रेनाइट चट्टानों को शीला खंडों के रूप में लगाया गया है लेकिन इनकी एक खास बात यह है कि यह शिलाखंड इस क्षेत्र के आसपास नहीं मिलते इसका तात्पर्य है कि से कहीं दूर से लाया गया था।

इस मंदिर की दीवार पर भारतवर्ष के प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम के विभिन्न आसन के चित्र बनाए गए हैं जो मन को आकर्षित कर लेते हैं। इस मन्दिर की सबसे खास बात यह है की इसकी परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। इसे बेहद चतुराई के साथ बनाया गया है। इसकी वास्तुकला ही दुनिया भर के पर्यटक के लिए आकर्षण का एक केंद्र है।

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बृहदेश्वर मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts about Brihadeeswarar Temple in Hindi)

  • बृहदेश्वर मंदिर पूरी तरह से ग्रेनाइट से निर्मित किया गया है।
  • इसकी वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है जो चोल वंश के वास्तुकला का एक विशेष नमूना है।
  • अपनी अद्भुत और रहस्यमई वास्तुकला के कारण इस मंदिर को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थलों में शामिल किया है।
  • मंदिर की सबसे ज्यादा खास बात यह है कि सूर्य के चरम सीमा पर होने के पश्चात भी मंदिर की छाया आकृति जमीन पर नहीं बनती।
  • बृहदेश्वर मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर में से एक है इसे दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है।

बृहदेश्वर मंदिर के अद्भुत रहस्य-

बृहदेश्वर मंदिर के साथ बहुत सारे रहस्य जुड़े हुए हैं जिन्हें जानने और समझने के लिए देश दुनिया भर के पर्यटक यहां पर घूमने टहलने आते हैं आज भी वैज्ञानिक इस मंदिर से जुड़े हुए रहस्यों पर से पर्दा उठाने में जुटे हुए हैं।

पृथ्वी पर नहीं पड़ती मंदिर के गुंबद की छाया –

बृहदेश्वर मंदिर बहुत ही चतुराई के साथ बनाया गया है। इस मंदिर का गुंबद इतने भी से तरीके से बनाया गया है कि उसकी छाया पृथ्वी पर नहीं पड़ती भले ही सूर्य का प्रकाश चारों दिशाओं से इस पर पड़े।

दोपहर के समय इस मंदिर के निचले हिस्से की परछाइयां जमीन पर दिखती है लेकिन गुंबद की परछाइयां कभी भी दिखाई नहीं देती अर्थात बनती ही नहीं है। यह अद्भुत घटना आज भी इस मंदिर से जुड़ा हुआ रहस्य बना हुआ है इसका कोई भी कारण ज्ञात नहीं है। मंदिर के गुंबद को लगभग 80 टन ग्रेनाइट के पत्थरों से बनाया गया है जिसके ऊपर एक स्वर्ण कलश को स्थापित किया गया है।

मन्दिर का पजल्स सिस्टम –

इस मंदिर को ग्रेनाइट के शिलाखंड  द्वारा बनाया गया है लेकिन सबसे खास बात यह है कि इन सिला खंडों को आपस में किसी भी ग्लू अथवा चूना या सीमेंट से चिपकाया नहीं गया है बल्कि इन पत्थरों को एक दूसरे के साथ फिक्स किया गया है। यानी कि इस मंदिर को पूरी तरह से पजल्स सिस्टम द्वारा जोड़ा गया है।

इसके अलावा आश्चर्य की दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि मंदिर के ऊपर 80 टन का गुंबद रखा गया है जिसके बारे में यह पता नहीं है कि इस पत्थर को आखिर ऊपरी हिस्से तक कैसे पहुंचाया गया क्योंकि उस समय क्रेन जैसी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। यह घटना भी अपने आप में एक रहस्य बनी हुई है।

तीसरी सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है की इस मन्दिर के 100 किलो मीटर तक आस पास कही भी ग्रेनाइट पत्थरों का स्रोत नहीं है ऐसे में यह बात सबसे बड़ा आश्चर्य है कि 130000 टन ग्रेनाइट आखिर आया कहां से। जरूर इस ग्रेनाइट को कहीं किसी दूसरी जगह से लाया गया होगा ऐसे में यह बात भी अभी भी रहस्य बनी हुई है।

बिना नींव के टीका हुआ है यह मन्दिर –

बृहदेश्वर मंदिर के आश्चर्यजनक तथ्य में से सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर की कोई नहीं बनाई है यह मंदिर बिना नींव के ही अपने भारी-भरकम वजन को लेकर खड़ा है।

अब सबसे बड़ी बात यह है की आख़िर बिना नीव के ऐसे 1,30,000 टन का मन्दिर कैसे टिका है।

ऐसा कहा जाता है की भगवन शिव की कृपा से यह मन्दिर बिना नींव के खड़ा है।

2004 की सुनामी के बावजूद भी मन्दिर को कोई क्षति नही पहुंची।

मन्दिर का विशालकाय शिखर –

बृहदेश्वर मंदिर के उपर दो गोपूरम बनाए गए है। इन दोनो गोपुरम के बाद एक विशाल काय नंदी मन्दिर को दृष्टि से अवरुद्ध करता है।

मन्दिर का यह भाग नंदी मंडप कह कर संबोधित किया जाता है। मन्दिर का शिखर केवल एक ही अत्यंत विशालकाय पत्थर से बना है जो की लगभग 80 टन वजन का है। इस शिखर के उपर एक वृत्ताकार कलश स्थपित किया गया है।

यह कलश सोने का है जबकि मन्दिर पूरा ग्रेनाइट का बना हुआ है। मन्दिर का भारी भरकम शिखर देख कर ऐसा लगता है की जैसे मन्दिर कहीं इसके भार से डग मगा न जाए।

मंदिर का प्राकृतिक रंग और अद्भुत चित्रकारी –

बृहदेश्वर महादेव मंदिर को देखने के पश्चात ऐसा लगता है कि इसका शिखर सिंदूरी रंग के रंग से पोता गया है लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है यह इस पत्थर का वास्तविक कलर है इस पर किसी भी प्रकार के रंग का लेप नहीं किया गया है फिर भी यह देखने में अत्यंत आकर्षक है और लेप की तरह प्रतीत होता है।

मंदिर की दीवाल पर विभिन्न प्रकार के देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई गई हैं इसके अलावा भारतनाट्यम के विभिन्न आसनों की मूर्तियां भी चित्रित हैं। कहा जाता है कि मंदिर की जो प्राचीन शिल्प कारी थी वह चोल वंश की थी लेकिन नायक वंशजों ने इस पर नई शिल्पकारी को अध्यारोपित कर दिया था।

यह मंदिर अपने आप में बेहद अनूठा है इसकी शिल्पकार और वास्तुकला को देखकर आदमी का दिमाग आश्चर्य से भर जाता है इसी आश्चर्यजनक शिल्पकारी को देखने के लिए विदेश से पर्यटक यहां आते हैं। (Source)

अगर आपको भी कभी मौका मिलता है तो ऐसी अद्भुत और शानदार जगह पर घूमने के लिए जरूर जाएं। उम्मीद करते हैं कि आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा।

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