तुलसी के फायदे (tulsi ke fayde), उपयोग व नुकसान | Tulsi Benefits and Side Effects in Hindi

तुलसी का पौधा (tulsi plant), औषधिय गुणों से भरपूर एक अद्भुत और दिव्य पौधा है। (tulsi ke fayde) इसका उल्लेख आर्युवेद और हमारे भारत देश के धार्मिक ग्रंथों में इससे जुड़ी कई कहानियों में इसके दिव्य गुणों व तुलसी के फायदे से अवगत कराया गया है। हमारे ऋषियों को वैदिक युग से ही तुलसी के फायदे व गुणों का ज्ञान था।

पुराने जमाने में हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगाया जाता था और तुलसी माता हर घर में वास करती थी। आजकल नए जमाने की भागदौड़ में लोग इसके महत्व को भूलते जा रहे है और नित नई-नई बिमारियों से ग्रसित होते जा रहें है। तुलसी के पौधे में कई प्रकार के विटामिन और खनिज पदार्थ पाये जाते है। कई रोगों के इलाज में और शारीरिक शक्ति को बढ़ाने में तुलसी का पौधा एक रामबाण इलाज है।

आज हम आपको तुलसीे पौधे के बारें में अद्भुत व रोचक जानकारी के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानकर आपको अपने प्राचीन व धार्मिक मान्यताओं पर गर्व महसूस होगा। हम सभी को इसके पीछे के विज्ञान के बारे में जानना अति आवश्यक है। आखिर क्यों कहां जाता था कि इस पौधे को घर-आंगन में लगाने से हम रोगमुक्त रह सकते है।

विषय–सूची

तुलसी का पौधा (tulsi plant), औषधिय गुणों से भरपुर एक अद्भुत और दिव्य पौधा

इस पृथ्वी पर अलग-अलग क्षेत्रो में जलवायु के आधार पर अलग-अलग प्रकार की तुलसी पाई जाती है। आज हम चार प्रकार की तुलसी के बारें में बताएंगे।

(1) रामा तुलसी (2) श्यामा तुलसी (3) कपूर तुलसी (4) वन तुलसी

आयुर्वेद में रामा तुलसी व श्यामा दो मुख्य प्रजाति है जिन्हें हम आमतौर पर घरों में लगा सकते है ये दोनो प्रकार की तुलसी बहुत गुणकारी होती है।

1. रामा तुलसी– राम तुलसी हल्के हरे रंग की होती है। पूरी पत्तियां और छोटी छोटी मंजरी भी हरे रंग की होती हैं।

2. श्याम तुलसी- तुलसी के इस पौधे में पत्तियां और उसके साथ फूल भी होते हैं जोकि लाल बैगनी रंग के होते हैं। श्याम तुलसी में पत्तियां थोड़ी सुखी हुई होती हैं।

3. कपूर तुलसी– कपूर तुलसी अकसर दवाइयों में काम आती हैं। जड़ी बूटियों की जो दवाइयां बनाई जाती है उसमे कपूर तुलसी का प्रयोग किया जाता है।

4. वन तुलसी – वन तुलसी के इस पौधे का रंग हरा होता है और ये जंगलों में पाई जाती हैं। इसकी पत्तियां बड़ी होती है और इस तुलसी के पौधे काफी बड़े होते हैं 4 से 5 फीट तक के हो जाते हैं। इसकी सुगंध काफी अधिक होती है और इसके फूल नीले रंग के होते है।

तुलसी में पाये जाने वाले गुणकारी तत्व

तुलसी का वैज्ञानिक नाम (Ocimum tenuiflorum) है। तुलसी में अनेकों प्रकार के विटामिन व खनिज पदार्थ पाये जाते है जिनमें कैल्शियम, प्रोटिन, फास्फोरस, सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, क्लोरोफिल जैसे तत्व पाये जाते है।

तुलसी एक एंटी-डीसीज, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-फ्लू पौधा है इसके आसपास जिवांणु, बैक्टिरया, वायरस व जानलेवा मलेरिया, डेंगू के मच्छर नही आते हैं। इस पौधे में एक खासबात यह है कि यह पौधा रात में भी आक्सीजन देता रहता है, जिससे इसके आसपास का वातावरण शुद्ध बना रहता है।

तुलसी के औषधिय गुण व इसका उपयोग कैसे करना चाहिये?

यदि आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते हो तो नित दो तुलसी के पत्तों का सेवन करना चाहिये। इनके पत्तों को चबाना नहीं चाहिये। तुलसी में पारा पाया जाता है इसलिये इसको निगल लेना चाहिये या इसके अर्क को चुसना चाहिये दातों के बीच में कभी नही चबाना चाहिये। दरअसल इसमें कुछ मात्रा में पारा पाया जाता है जो हमारे दांतों को सड़ा सकता है।

तुलसी के दो पत्तों को शहद और अदरक रस के साथ लेना चाहिये। इसको गर्म पानी, बिना दूध की चाय व काढ़े व तुलसी अर्क के रूप में भी ले सकते है।

तुलसी के फायदे (Benefits of Tulsi in Hindi)

तुलसी के फायदे इतने ज्यादा हैं कि एक लेख में शायद पूरे फायदे गिनाए नही जा सकते। आयुर्वेद में तुलसी के पौधे को औषधिय गुणों का खजाना भी माना गया है। तुलसी के पौधे का उपयोग कई दशकों से घरेलू उपचार के लिए किया जाता है। लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि तुलसी के पौधे में कुछ तत्व बहुत अधिक मात्रा में पाये जाते है इसलिये इसका सेवन एक निश्चित मात्रा में ही करना चाहिये? हमारे शरीर में किसी भी तत्व की अधिक मात्रा हमें नुकसान पहुंचा सकती है।

तुलसी के फायदे, प्राचीन व आयुर्वेदिक (tulsi ke fayde)

1. इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है।

रोज सुबह खालीपेट तुलसी की पत्तियों का सेवन करना चाहिये। तुलसी की दो पत्ती को गुनगुने पानी से ले सकते है या फिर तुलसी के सुखे पाउडर व तुलसी के अर्क की दो बूंदे गुनगुने पानी के साथ ले सकते है।

तुलसी के पत्तो में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो हमारे शरीर को किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने में सहायता प्रदान करता है और यह हमारे शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनता है।

सर्दी-खासी, वायरल में तुलसी, अदरक, काली मिर्च का काढ़ा पीना चाहिये। यह सर्दियों कीें अधिक कारगर औषधि है।

2. कमजोर पाचनतंत्र का मजबूत बनाने में तुलसी लाभदायक है।

आपका पाचन तंत्र कमजोर है या आपके पाचनतंत्र में कोई समस्या है तो आप तुलसी की मंजरी को पीसकर काले नमक के साथ दिन में तीन बार लें।

दस्त व पेचीस में भी तुलसी के पत्ते लाभदायक है इसके लिये आपको तुलसी के पत्तों को जीरे के दानों को अच्छी तरह से पीस ले। अब इस पेस्ट को 4 से 5 बार दिन में समय-समय पर चाटते रहे इस प्रकार इससे यह आपकों दस्तों में राहत पहुचाता है।

3. सरदर्द व तनाव को कम करनें में लाभदायक है।

तुलसी में तनाव को कम करने वाले तत्व पाये जाते है। आजकल की जीवनशैली में मानसिक तनाव न हो ऐसा हो नही सकता है। इसके लिये तुलसी की चाय, तुलसी का काढ़ा बना सकते है जिससे आपको सरदर्द में काफी आराम मिलेगा।

सरदर्द के दूसरे प्रभावी प्राकृतिक उपचारों में आप तुलसी के तेल की दो बूंदे नाक में डालने से भी सरदर्द में आराम मिल जाता है और इसके साथ-साथ तुलसी के तेल से सर की मालिस करनी चाहिये इससे मानसिक तनाव व सरदर्द में आराम मिलता है।

4. गले में खराश व गला बैठ जाने पर

गले की खराश गला व बैठ जाने पर तुलसी की दो-तीन पत्तियों के साथ मिश्री व काली मिर्च के दानों के साथ चूसने पर गले की तक्लीफ में आराम मिलता है।

5. बालो के जूं और लीख की समस्या से छुटकारा।

अगर आपके बालों में जूं या लीख है तो आप तुलसी का तेल अपने बालों में लगाए। तुलसी के पौधे से तुलसी की पत्तियां का तेल को अपने बालों में लगाए इससे बालों में जूं और लीखे खत्म हो जाती है और आपको इससे छुटकारा भी मिल जाएगा।

तुलसी के चूर्ण में नारियल का तेल मिला लें और इसकी मालिश करें इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत हो जाएंगी और बाल लंबे और घने हो जाएंगे।

6. मुह की दुर्गन्ध व पायरिया में लाभदायक

तुलसी की पत्तियों से मुह की दुर्गन्ध व पायरिया में लाभदायक होती है। तुलसी की पत्तियों को धूप में सूखा ले और इनका पाउडर बनाकर इसमें नमक, सरसो का तेल मिलाकर उंगली से दांतों पर हल्कि मालिश करें और तुलसी के पाउडर और नमक के गुनगुने पानी से कुल्ला करें। इससे आप मुह की दुर्गन्ध से निजात पा सकते हैं।

7. दर्द और सूजन में लाभदायक

अगर आपके कान में दर्द है या आपके शरीर में कहीं सूजन है तो तुलसी की पत्तियां उसके लिए असरदार हैं। कान में है तो तुलसी की पत्ती का स्वरस बनाकर 2 से 3 बूंद अपने कान में डालिए। इससे आप के दर्द में काफी आराम मिलेगा। अगर आपके किसी भी अंग में सूजन है तो तुलसी के पत्ते को पीसकर उसमें नमक मिलाकर उसे थोड़ा गुनगुना करके लेप लगाएं। आपको दर्द में भी आराम मिलेगा।

8. कैंसर में लाभदायक

तुलसी के पत्ते कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावनाओं को कम करने में भी लाभदायक है। क्योंकि तुलसी के पत्तो में अंटिकार्साेजनिक और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं ये घटक धमनियो में रक्त प्रवाह को सीमित करके ओरल और इतमेंज कैंसर जैसी बीमारी को रोकने में भी मदद करते हैं।

9. टायफायड (Typhoid) बीमारी में उपयोगी

अगर आपको टायफायड हो गया हैं तो आप तुलसी का सेवन शुरू कर दें, 15 मिली की मात्र दिन में दो बार ले सकते हैं। तुलसी अर्क के फायदे से टायफायड का बुखार जल्दी ठीक होता है। इसके अलावा आप तुलसी का काढ़ा बनाकर इसका भी सेवन कर सकते है यह बुखार में लाभकारी होता है।

10. पथरी व किडनी स्टोन में लाभकारी

तुलसी के उपयोग से हम अपने शरीर में यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया को कम कर सकते है। किडनी में यूरिक एसिड की अधिक्ता ही स्टोन की बनाने में मदद करती है। तुलसी के प्रयोग से शरीर के खून में यूरिक एसिड नहीं बन पाता है।तुलसी की पत्तियों का रस निकालकर उसको शहद के साथ लेना चाहिये।

11. फेफड़ों के संक्रमण को बढ़ने से रोकता है

तुलसी के पत्तो में विटामिन सी पाया जाता है जिससे आपके फेफड़ों में किसी भी तरह कि बीमारी के संक्रमण को बढ़ने से रोकता है और फेफड़े कि बीमारी के लिए तुलसी एक औषधि का कार्य भी करती है।

12. त्वचा रोगों में लाभकारी औषधि

तुलसी त्वचा रोगों में एक कारगर औषधि है। तुलसी के पत्ते का लेप (पेस्ट) बनाए और उसमें नींबू के रस मिला ले। और इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। आप देखेंगे इसके इस्तेमाल सेे चेहरे के कील-मुहासे या दांग धब्बे हल्के पड़ जाएंगे और इस लेप का नियमित इस्तेमाल करने से आपका चेहरा बेदाग हो जाएगा।

तुलसी के पत्तों को दांग धब्बों पर रगड़ने से भी ये हल्के पड़ जाते है। इसके साथ-साथ तुलसी की पत्तियों को खाली पेट खानी चाहिये।

तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेट्स तत्व होते है जोकि शरीर में मौजूद विषॉक्त तत्वों को बाहर निकालकर शरीर के रक्त को शुद्ध करता है। इसका इस्तेमाल करने से चेहरा चमकने लगता है

तुलसी के नुकसान ( Tulsi ke Side effects)

  • तुलसी हमारे रक्त का पतला करने में मददगार सिद्ध होती है इसलिए इसका प्रयोग दवाईयों के साथ नहीं करना चाहिये। यदि आपका इलाज चल रहा है और आप खून पतला करने की दवाई ले रहे है तो तुलसी का इस्तेमाल न करें।
  • तुलसी रक्त में शर्करा (शुगर) के लेवल को भी कम करता है इसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते है। इसलिये इसका प्रयोग मधुमेह की बिमारी वाले व्यक्ति को इसका इस्तेमाल से बचना चाहिये (दवाई के साथ इसको न लें)
  • तुलसी में युजीनॉल नामक तत्व पाया जाता है जिसका स्तर शरीर में बढ़ना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। यह तत्व सिरगेट जैसे पदार्थ में पाया जाता है। तुलसी के नियमित या फिर अधिक मात्रा में उपयोग करने से यह तत्व शरीर में बढ़ सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं को तुलसी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। इससे मासिक धर्म शुरू होने का खतरा हो सकता है जो गर्भवती महिलाओं के लिये नुकसानदेह होता है।
  • तुलसी में आयरन व पारा पाया जाता है इसलिये इसको चबाकर नहीं खाना चाहिये। यह आपके दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिये इसे चबाने की बजाए इसका अर्क चूसना चाहिये या इसे सीधे-सीधे गोली बनाकर पानी के साथ इसका सेवन करें।

निष्कर्षः

आज के इस लेख में हमने तुलसी के फायदे (tulsi ke fayde) व इसके उपयोग में बरती जाने वाली सावधानियों से संबंधित सभी जानकारियों को आपके साथ साझा किया है हम उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा अगर पसंद आया हो तो इसे अपने मित्रों के साथ अपने परिजनों के साथ अवश्य शेयर करे। ताकि उनको भी तुलसी के फायदे के बारे में जानकारी मिल सके।

Note : यदि आप किसी भी प्रकार के शारीरिक रोग से ग्रसित है और आपका इलाज चल रहा है तो कृपया करके उचित चिकित्सय विशेषज्ञ से परामर्श ले। इन घरेलू नुस्खों से, अपना और किसी अन्य का ईलाज न करें। इस लेख में बताई गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी है यह किसी प्रकार का चिकित्सय परामर्श नहीं है। hindikhoji.net इन जानकारी का किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेता है। 

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