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राष्ट्रीय स्तर पर भारत में हर साल 24 जनवरी के दिन राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के लिए समर्पित एक राष्ट्रीय कार्य दिवस है।
वास्तव में राष्ट्रीय बालिका दिवस देश की बालिकाओं तथा महिलाओं को जागरूक, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाने के लिए एक पहल है जिसके माध्यम से महिलाओं को समान अवसर के साथ साथ की नई दिशा और गति भी मिलेगी।
बालिका दिवस केवल हमारे देश में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में मनाया जाता है हालांकि विश्व बालिका दिवस और राष्ट्रीय बालिका दिवस की तिथियां अलग अलग है। एक तरफ जहां 11 अक्टूबर को पूरा विश्व महिलाओं के सर्वांग विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाता है, वहीं इसकी दोहरी पहल करते हुए हमारा देश 24 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाता है।
इस दिन देश में महिलाओं और बालिकाओं के लिए व्यापक रूप से जागरूकता अभियान चलाने के लिए भारत सरकार द्वारा विशेष कदम उठाए जाते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करके महिलाओं को आत्म सुरक्षा की नीतियां सिखाई जाती हैं तथा उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जाता है, ताकि महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो सकें और पूरी स्वतंत्रता तथा समान अवसर के साथ देश के विकास में अपनी अग्रिम भूमिका निभाएं।
तो चलिए आज आप को Essay on National Girl Child Day in Hindi के जरिए बालिका दिवस से जुड़ी सारी जानकारियां देते हैं।

विषय–सूची
कब और क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस?
भारत में 24 जनवरी के दिन हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। जबकि विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर के दिन मनाया जाता है।
सामाजिक स्तर पर बालिकाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हमारे देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस की पहल की गई। भले ही आज हमारे देश में पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को लेकर काफी उन्नत कर चुका है लेकिन फिर भी आज देश के विभिन्न हिस्सों में आए दिनों महिलाओं के शोषण और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
समाज की महिलाएं और लड़कियां जब तक अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक ना उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलेगी और ना ही पुरुषों के समान अवसर। इन्हीं चीजों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत की।
भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस को मनाने की शुरुआत साल 2008 में हुई। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के नेतृत्व में 24 जनवरी 2008 को पहली बार हमारे देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया। समाज में महिलाओं के अधिकार संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए सबसे पहले लड़कियों और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए।
भारत सरकार ने भी महिलाओं को सुरक्षा और समानता को सुनिश्चित करने के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं जिनमें घरेलू हिंसा एक्ट 2009, बाल विवाह रोकथाम एक्ट 2009, और दहेज़ रोकथाम एक्ट 2006 विशेष रूप से शामिल हैं। इन कानूनों को लागू करने के बाद भारत के ग्रामीण इलाकों में घरेलू हिंसा, बाल विवाह और दहेज प्रथा संबंधी उत्पीड़न काफी हद तक कम हो गया।
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बालिका दिवस मनाने की जरुरत क्यों?
बालिका दिवस को लेकर सबसे अहम सवाल यही है कि आख़िर बालिका दिवस मनाने की जरुरत क्यों पड़ी?
किसी भी राष्ट्र के विकास और उत्थान में पुरुषों और महिलाओं के सम्मान भूमिका होती है। आज भारत की बेटियां पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं और महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों का मुंहतोड़ जवाब भी दे रही हैं।
लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज भी भारत के कुछ हिस्सों में ऐसे सामाजिक जानवर रहते हैं जो सृष्टि के सृजन की आधार महिलाओं का शोषण और उत्पीड़न करते हैं। दहेज के नाम पर अपनी बहू बेटियों के साथ घरेलू हिंसा को अंजाम देते हैं और उनकी स्वतंत्रता छीन कर घर की चारदीवारी में कैद कर देते हैं। फिर भी आज भारत में महिलाओं स्थिति पहले से काफी बेहतर है और इसका पूरा श्रेय महिलाओं के हित में भारत सरकार द्वारा लागू किए गए कानूनों को जाता है।
एक वक्त था जब भारत में लड़कियों की भ्रूण हत्या, महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, बलात्कार और दहेज उत्पीड़न जैसी अपराधिक गतिविधियां काफी उफान पर थी उस दौरान बेटी होना एक अभिशाप लगता था। लेकिन जैसे-जैसे भारत की महिलाएं और लड़कियां हो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती गई वैसे-वैसे बदलाव आते गए।
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य और महत्व –
राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य भारत की लड़कियों बालिकाओं और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उनके सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
यह राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा व्यापक अभियान है जिसका उद्देश्य न केवल बेटियों को जन्मसिद्ध अधिकार दिलाना बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा करना भी है।
आज राष्ट्रीय बालिका दिवस को अभियान बनाकर महिलाओं को पुरुषों के समान उन्नति के अवसर देने के विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। आज भारत की महिलाएं सीमा सुरक्षा से लेकर देश के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी अहम भूमिका निभा रहीं हैं।
केवल डॉक्टर इंजीनियर और राजनेता ही नहीं बल्कि आज महिलाएं राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी का भी एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं। इस दिन का अपने आप में एक विशेष महत्व है। बालिका दिवस के दिन विभिन्न प्रकार के सरकारी और गैर सरकारी संगठनों NGO आदि समेत महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए अभियान चलाते हैं।
राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 (National Girl Child Day 2026)
हर साल की तरह 2026 के इस नए साल में भी 24 जनवरी के दिन राष्ट्रीय बालिका दिवस को नई सोच और थीम के साथ मनाया जाएगा।
एक भाई और पिता होने के नाते हम सबको अपनी बहन बेटियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। बेटियों के साथ पहला भेदभाव उनके जन्म से ही शुरू होता है जब बेटी होने के नाते भ्रूण में ही उनकी हत्या कर दी जाती है। लेकिन पैदा होने के बाद भी लड़कियों के साथ घरेलू हिंसा दहेज उत्पीड़न शारीरिक शोषण जैसे मामले होने की संभावना रहती है।
जब तक महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होगी तब तक वह सामाजिक शोषण और उत्पीड़न का शिकार होती रहेगी।
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