Advertisements

हिंदी दिवस पर भाषण, कविताएं, स्लोगन | Hindi Diwas Essay in hindi

हिंदी दिवस पर कविताएं, स्लोगन, भाषण कैसे दें? (Speech, Slogan, poem, Quotes Essay on Hindi Diwas)

Speech on Hindi Diwas – भाषा ही एक ऐसा साधन है जिसके जरिए हम अपनी भावनाओं और विचारों को एक दूसरे के साथ साझा करते हैं। लेकिन भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है बल्कि यह लोगों को एक दूसरे के साथ जोड़ती भी है। भाषा की भूमिका एक सूत्र की तरह होती है जो लोगों को एक दूसरे से बांध कर रखती है।

Advertisements

वैसे तो हमारे देश में बहुत सारी भाषाएं बोली जाती हैं लेकिन हिंदी हमारे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी भारत ही नहीं बल्कि विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में भी मुख्य रूप से शामिल है।

हमारे देश में हर साल 14 सितंबर का दिन हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन शिक्षण संस्थाओं, सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों और अन्य कई स्थानों पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनके जरिए लोगों को हिंदी भाषा का महत्व बताया जाता है और जागरूक किया जाता है।

आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हिंदी दिवस पर भाषण (Hindi Diwas Essay in hindi)के बारे में बताने वाले हैं जिसका इस्तेमाल आप हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में कर सकते हैं।

हिंदी दिवस पर भाषण(Speech on Hindi Diwas) के साथ-साथ किस आर्टिकल के जरिए आपको हिंदी दिवस पर कविता (Poem on Hindi Diwas) और हिंदी दिवस पर सुविचार (Quotes on Hindi Diwas) भी पढ़ने को मिलेंगे जिनका इस्तेमाल करके आप एक प्रभावशाली भाषण के जरिए लोगों को प्रेरणा दे सकते हैं।

आइये इन्हें भी जानेंहिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है? इसका महत्व एवं इतिहास

Hindi Diwas Essay (Speech) in hindi

हिंदी दिवस पर भाषण (Speech On Hindi Day)

अभिवादन,

दोस्तों हम सब जानते हैं कि 14 सितंबर का दिन हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी दिवस को मनाने की परंपरा 14 सितंबर साल 1953 से चली आ रही है।

जैसा कि आप सब जानते हैं कि हिंदी हमारी राज्य भाषा है। साल 1949 में हिंदी को देश की राजभाषा के रुप में घोषित किया गया था। लेकिन इन सबसे बढ़कर हिंदी हमारी मातृभाषा है जो हमारे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा भी है। हिंदी को कई बार हमारे देश की राष्ट्रभाषा बनाने का भी प्रयास किया गया लेकिन विवादों के कारण यह संभव नहीं हो सका।

दोस्तों भाषा ही एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए हम अपनी भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करते हैं। भाषा केवल विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए ही नहीं बल्कि लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के लिए भी बहुत जरुरी है।

हिन्दी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक समूचे भारत को एक सूत्र में बांधती है। हिंदी भाषा के विकास में ही हमारा विकास निहित है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज हमारी युवा पीढ़ी तेजी से अंग्रेजी भाषा की ओर भाग रही है। इस समय हमारे देश के लोगों और युवाओं को ऐसा लगता है कि हिंदी भाषा का उनके जीवन में कोई महत्व ही नहीं है। आजकल देश के ज्यादातर शिक्षण संस्थाओं में अंग्रेजी पढ़ाने पर जोर दिया जाता है। लोग सोचते हैं कि अगर उन्हें कामयाब होना है तो उन्हें हिंदी आए ना आए अंग्रेजी जरूर आनी चाहिए।

लेकिन दोस्तों इतिहास गवाह है आज तक जिस देश ने अपनी मूल भाषा को सर्वोच्च मान्यता दी है, जो अपनी मूल भाषा का सम्मान करते हैं उन्होंने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। फिर चाहे वह जर्मनी, जापान हो या फिर चाइना यह ऐसे देश हैं जो अपनी मूल भाषा का हमेशा सम्मान करते हैं और अपनी मूल भाषा को ही सर्वोच्च मान्यता देते हैं। इन विकसित देशों के लिए विदेशी भाषाओं का कोई विशेष महत्व नहीं है। जर्मनी जापान और चाइना समेत कई अन्य विकसित देशों के लोग आज भी अपनी मूल भाषा को ही अपना कर आगे बढ़ रहे हैं।

जहां हम अंग्रेजी के पीछे भागे जा रहे हैं वहां यह देश अंग्रेजी बोलने से कतराते हैं। यहां के लोग अंग्रेजी और विदेशी भाषाओं को बिल्कुल पसंद नहीं करते। नतीजा साफ है आज जहां ये देश बुलंदी के शिखर पर खड़े हैं वही हम अंग्रेजी के तलवे चाट रहे हैं।

हमारे और हमारे देश के विकास के लिए हिंदी का विकास बेहद जरूरी है जब तक हम हिंदी भाषा को प्राथमिक मान्यता और सम्मान नहीं देंगे तब तक हम पिछड़े रहेंगे।

आधुनिक हिंदी के जनक माने जाने वाले कवि भारतेंदु हरिश्चंद्र अपनी भाषा के महत्व को लेकर बहुत गहरी एवं बड़ी बात कही थी। उन्होने कहा था कि

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

अर्थात अपनी मूल भाषा की उन्नति ही सभी उन्नति का आधार होती है बिना अपने निजी भाषा के ज्ञान के हृदय के कष्टों को नहीं मिटाया जा सकता।

हिंदी दिवस की शुरुआत भी इसी उद्देश्य के साथ हुई थी ताकि हिंदी को पूरे देश विदेश में प्रचारित प्रसारित किया जा सके और लोगों को हिंदी भाषा में बोलने के लिए प्रेरित किया जा सके। हिंदी के विकास और विस्तार के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होकर अपने आप से शुरुआत करनी होगी और लोगों को हिंदी के प्रति जागरूक करना होगा।

हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को उस मुकाम तक पहुंचाना होगा ताकि फिर कभी हिंदी के उत्थान के लिए हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता ना पड़े। उम्मीद करता हूं कि आप लोग भी अपने आप से इसकी शुरूआत करके इस अभियान में शामिल होंगे।

हिंदी दिवस पर कविता (Poem on Hindi Diwas)

भारत की पहचान है हिंदी!
भारत की पहचान है हिंदी। भारतीयों की शान है हिंदी।। अभिव्यक्ति का साधन भी है, गंगाजल सी पावन भी है। गौरव और अभिमान है हिंदी, भारतीयों की शान है हिंदी।। सृजन कला को पैदा करती, ज्ञान निधि से जीवन भरती। विदूषा की पहचान है हिंदी, भारतीयों की शान है हिंदी।। रूढ़वादियां तोड़ के रखती, भारतीयों को जोड़ के रखती। अखंडता का गान है हिंदी, भारतीयों की शान है हिंदी।। उन्नति का आधार है यही है, सफलताओं का सार यही है। देवनागरी वीणा है तो, इस वीणा की तान है हिंदी।। भारतीयों की शान है हिंदी। भारत की पहचान है हिंदी।। -सौरभ शुक्ला
हिंद की गरिमा हिंदी है।
अंग्रेजी की लत गंदी है। इस हिंद की गरिमा हिंदी है।। घाटी की गोद पनपती है, कन्याकुमारि तक जाती है। उत्तर-दक्षिण, पश्चिम-पूर्व, भारत को एक बनाती है। जिसकी आभा के आगे, अंग्रेजी भी शर्मिंदी है। अंग्रेजी की लत गंदी है। हिंद की गरिमा हिंदी है।। हिंदी के होने से ही तो, अपनों में अपनापन सा है। है भव्य अलंकृत शब्दकोश, जो नियति के दर्पण सा है। निज भाषा का सम्मान करो, फिर दूर न ढेर बुलंदी है। अंग्रेजी की लत गंदी है। इस हिंद की गरिमा हिंदी है।। - सौरभ शुक्ला

हिंदी दिवस पर स्लोगन (Quotes On Hindi Diwas)

  • राष्ट्र के विकास में उसकी मूल भाषा का विशेष योगदान होता है। जो देश जितनी जल्दी अपनी मूल भाषा का विकास करता है, उतनी ही जल्दी उस देश का विकास होता है।
  • हिंदी हम भारतीयों के लिए केवल भाषा नहीं है बल्कि यह उस भावना की तरह है जो पूरे परिवार को एक दूसरे से जोड़ कर रखती हैं।
  • हिंदी के उत्थान में ही हमारा उत्थान निहित है, जैसे-जैसे हमारी मातृभाषा हिंदी का पतन होता जाएगा वैसे वैसे हम भी पतन की ओर अग्रसर होंगे।
  • हिंदी केवल हिंदुस्तान के नाम में नहीं बल्कि हर हिंदुस्तानियों के दिल में बसती है और हम हिंदुस्तानी हमेशा इसका सम्मान करते रहेंगे।
  • हिंदी हमारी मातृभाषा है हमें इसका उपयोग अपने दैनिक जीवन में बातचीत से लेकर हर क्रियाकलाप में करना चाहिए जहां भाषा का उपयोग अनिवार्य हो।
  • हिंदी का सम्मान ही हिंदुस्तान का सम्मान है। अगर आप स्वच्छंदता से हिंदी का इस्तेमाल कर सकते हैं तो समझ लीजिए आप पूर्णत स्वतंत्र हैं।
  • एक भारतीय होने के नाते हमें हिंदी बोलने में हमेशा गर्व महसूस करना चाहिए। अगर हम अपनी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा के लिए गर्व नहीं करते तो समझ लीजिए कि आपके भीतर कभी राष्ट्रप्रेम नहीं हो सकता।

हिंदी दिवस पर शायरी (Poetry on Hindi Diwas)

ना शोहरत ना ही बुलंदी से, मेरा हिंद जगेगा हिंदी से। सभ्यता-संस्कृति की राग है हिंदी, मधु वाणी का अनुराग है हिंदी। दुनिया के अलग मुल्कों में पहचान यही है, हिंदी हमारी बोली, हम हिंदोस्तां के हैं! निज भारतीयों की भाषा है। हिंदी हिंदुत्व की आशा है। मेरे आवाम की जिस्म जन्नत जान है हिंदी, हिंदी जब तलक है मेरा हिंदुस्तान जिंदा है! - सौरभ शुक्ला

Leave a Comment