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सूर्य को छूने वाला पहला मिशन था पार्कर सोलर प्रोब मिशन, जानिए NASA के इस मिशन से जुड़ी खास बातें । Facts About Parker Solar Probe In Hindi

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के आदित्य l1 मिशन की चर्चा इस समय पूरे विश्व में हो रही है। यह भारत का पहला सोलर मिशन है जिसे 2 सितंबर 2023 को लांच किया जा रहा है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें अभी तक विश्व भर में कुल 22 सोलर मिशन स्पेसक्राफ्ट सूर्य पर भेजे गए हैं जिनमें से 14 सोलर मिशन केवल अकेले नासा ने भेजे है। NASA अभी तक सबसे ज्यादा सोलर मिशन लॉन्च करने वाली स्पेस एजेंसी है।

हालांकि नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन अब तक का सबसे कामयाब सोलर मिशन है जिसने सूरज को सबसे नजदीकी से छुआ है। नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन सूर्य के सबसे नजदीक पहुंचने वाला पहला अंतरिक्ष यान है।

एक ओर जहां आज पूरी दुनिया की नजरे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के आदित्य एल 1 मिशन पर टिकी हुई है तो वहीं दूसरी ओर ढेर सारे लोग विश्व के अन्य सोलर मिशन के बारे में जानना चाहते हैं।

इसलिए हमने सोचा कि क्यों ना आज आपको विश्व के सबसे सफल सोलर मिशन पार्कर सोलर प्रोब मिशन के बारे में बताएं जिसने सूर्य की बाहरी सतह Corona को पहली बार छुआ था। अब देखना यह है कि क्या आदित्य एल 1 मिशन भी अपनी मकसद में कामयाब हो पाएगा?

Parker Solar Probe Spacecraft ने 14 दिसंबर 2021 को सूर्य का Outer  Corona Touch कर लिया। यानी कि यह Solar probe इस समय सूर्य के Outer Environment को Touch कर चुका है। यह मानव इतिहास के Space Science का सबसे महत्वपूर्ण और अविश्वसनीय पल है, जब हम एक Spacecraft के द्वारा सूर्य के इतने नजदीक Outer Part में जा पहुचें हैं जिससे अब हम सूर्य की सतह का भी निरीक्षण कर पाएंगे।

Solar Probe ऐसा कारनामा करने वाला पहला Spacecraft है। यह उपलब्धि हासिल करने में वैज्ञानिकों को दशकों का समय लग गया। नासा के इस स्पेसक्राफ्ट ने सूरज के उसे हिस्से को छुआ था जहां तापमान तकरीबन 17 लाख डिग्री फारेनहाइट है।

साल 2018 में नासा द्वारा इस महत्वपूर्ण मिशन को लांच किया गया था। इस कारनामे को अंजाम देने के बाद में Parker Probe एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है क्योंकि इस समय भारत ने अपना आदित्य एल 1 मिशन लॉन्च किया है.

तो आज हम जानेंगे Parker Solar Spacecraft क्या है, इसे कब Launch किया गया था। इसके अलावा हम कुछ रोचक तथ्यों (Facts about Parker Solar Probe in hindi) के बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

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पार्कर सोलर प्रोब क्या है? (What is Parker Solar Probe? It’s Speed)

Parker Solar Probe एक ऐसा  Spacecraft है जोकि  NASA के द्वारा बनाया गया है। Applied Physics Laboratory के द्वारा Design किया गया है  यह Solar Probe इस उद्देश्य से बनाया गया है ताकि सूर्य के Outer Part i.e. Corona की बारे में पता कर सके और सूर्य की सतह का निरीक्षण, मानव हस्तक्षेप से किया जा सके।

पूरे ब्रह्मांड में कई ऐसी चीजें हैं जो कि पृथ्वी के जीवन पर बहुत बुरा या अच्छा असर डाल सकती है। जिसमें से सूर्य तथा सूर्य के द्वारा निकलने वाली पराबैंगनी किरणें और electromagnetic waves भी शामिल है। तथा इसी का पता लगाने के लिए और इस जैसे कई कारणों का पता लगाने के लिए Parker Solar Probe को design किया गया है।

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Parker Solar Probe को 12 अगस्त 2018 को सुबह 7:31 पर Delta IV Heavy के द्वारा Launch किया गया था। इस तथा केप कैनेवरल एसएलसी-37 की साइट के ऊपर इस रॉकेट को भेजा गया। यह एक मानवरहित Spacecraft है, जिसमें कोई भी मानव नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य के बाहरी भाग यानी कोरोना का तापमान लगभग 17 लाख डिग्री फोरेनहाइट है। यहां तक पहुंचना अब तक मनुष्य के लिए अब तक का सबसे चुनौतिपूर्ण कार्य था।

केवल इतना ही नहीं आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें कि पार्कर सोलर प्रोब स्पेसक्राफ्ट की स्पीड तकरीबन 200 किलोमीटर प्रति सेकंड थी जो अब तक मानव द्वारा बनाया गया सबसे तेज यान है।

यह मानव के द्वारा बनाया गया पहला ऐसा Artificial Object है जो कि अंतरिक्ष में सूर्य की तरफ छोड़ा गया है। और जब इसमें सूर्य के 8 चक्कर लगा लिए थे, तब अगले चक्कर के दौरान इसे वह पल मिला जब यह सूर्य के कोरोना को छू सकता था। तथा इस ने वही किया। और Parker Solar Probe ने सूर्य के वातावरण में entry ले ली और वहां से कई तस्वीरें भी भेजी है।

Parker Solar Probe चर्चा में क्यों है?

Parker Solar Probe को इस लिए बनाया गया था ताकि इसकी मदद से सूर्य के बाहरी परत की जांच मानवीय हस्तक्षेप से हो सके और दिनांक 14 दिसंबर रात को Parker Solar Probe सूर्य के आतंरिक वातावरण में प्रवेश कर गया और इसके कोरोना को भी छू चुका है. तथा वही से ही इस spacecraft ने कुछ ऐसी तस्वीरें भी भेजी है जो सूर्य की अनिश्चित सतह को भी दर्शाता है।

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दुसरे शब्दों में कहे तो मानव के द्वारा बनाया गया यह पहला आर्टिफिशियल ऑब्जेक्ट है जिसने सूर्य की कक्षा में प्रवेश करके सूर्य के वातावरण में भी प्रवेश किया है. यह अद्भुत है और ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ है. यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा पल है जिसे पूरी दुनिया में आश्चर्य की नजर से देखा जा रहा है और इसीलिए Parker Solar Probe चर्चा में है।

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पार्कर सोलर प्रोब के कुछ रोचक तथ्य (Facts about Parker Solar Probe in hindi )

  • Parker Solar Probe को  NASA के द्वारा 12 अगस्त 2018 को Launch किया गया था। तथा इसका उद्देश्य  सूर्य की सतह का निरीक्षण करना था। तथा यह Solar Probe सूर्य के चारो और घूम रहा है और इसने घूर्णन की अब तक ८ आवृतिया पूरी कर ली है.
  • Parker Solar Probe का कुल वजन 685 किलोग्राम का है।
  • Parker Solar Probe  सन 2025 में तकरीबन  690000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से सूर्य के चक्कर लगाएगा।
  • Parker Solar Probe  प्रोजेक्ट के लिए 1.5 Billion Dollars का बजट सैंक्शन किया गया था।
  • Parker Solar Probe को Applied Physics Laboratory जोकि Johns Hopkins University में है, वहां पर इसे डिजाइन किया गया था। तथा इस Spacecraft  का निर्माण किया गया था।
  • 2018 को इस Spacecraft को  डेल्टा 4 हेवी रॉकेट के द्वारा  यूनाइटेड लॉन्च 14 अगस्त 2018 को यूनाइटेड लांच एलियांस की मदद से Launch किया गया था।
  • यह NASA का पहला ऐसा Spacecraft है जिसको नासा ने जिंदा फिजिसिस्ट Dr। Eugene Newman Parker पाकर के नाम पर रखा है।
  • इस प्रकार के Space Probe की शुरुआत  या फिर कहे तो इसके विचार की शुरुआत 1958 में 8 लोगों की कमेटी के द्वारा कही गई थी जिसे नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस कहा गया था।
  • 1958 में  नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के स्पेस साइंस बोर्ड ने एक ऐसा स्पेस मिशन प्रपोज किया था जिसमें एक Space Probe/ Solar Probe को शुक्र ग्रह के ऑर्बिट में भेजा जाएगा। जहां पर जा करके वह एक तपते हुए ग्रह में पैदा होने वाले  लक्षणों का निरीक्षण करेगा। तथा यह निरीक्षण सूर्य के आउटर कोरोना यानी कि सूर्य के सतह का निरीक्षण करने में भी मदद करेगा।
  • 29 अक्टूबर 2018 को ही यह Solar Probe पहला ऐसा Artificial Object बन गया था जो कि सूर्य के सबसे नजदीक जाकर आ चुका था। पिछली बार Hellos-2 Spacecraft के द्वारा 1976 में 42.73 मिलियन किलोमीटर की दूरी में प्रवेश करना सबसे नया रिकॉर्ड था। लेकिन इसे Parker Solar Probe ने 19 अक्टूबर 2018 को ही तोड़ दिया था।
  • Parker Solar Probe के मिशन को 7 सालों के लिए प्लान किया गया है यानी कि 7 साल बाद में यह 16 अप्रैल को पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।
  • Parker Solar Probe का वजन 1400 पाउंड का है और एक Spacecraft बनने के लिए इसका वजन तुलनात्मक रूप से काफी कम है।
  • 14 दिसंबर 2021 की रात को Parker Solar Probe  ने सूर्य के Corona को यानी कि सूर्य का वह स्थान जिसमें सूर्य अपने पार्टिकल्स को अपनी गुरुत्वाकर्षण क्षमता से बांधकर रख सकता है, उस स्थान को इस  Parker  Solar Probe ने Touch कर लिया है।
  • Parker Solar Probe के मुख्य शीर्ष पर एक ऐसी सफेद पट्टी लगी हुई है जो कि सूर्य से आने वाली तेज किरणों को दूसरी ओर धकेल देती है ताकि उसका नुकसान इस Spacecraft पर ना हो सफेद पट्टी का बाहरी हिस्सा कार्बन नामक एक तत्व से घिरा हुआ है जिसकी वजह से यह सूर्य से आने वाली एनर्जी को सोखे बिना उसे धकेलने का काम कर सके।
  • पार्कर सोलर प्रोब वह पहला ऐसा स्पेसक्राफ्ट है जिसने सूर्य के कोरोना में पहुंचकर इतिहास रच दिया है।

तो यह कुछ ऐसे रोचक तथ्य थे जिसने Parker Solar Probe को काफी ज्यादा चर्चा का विषय बनाया है। और जिस प्रकार से Parker Solar Probe ने 2018 से लेकर के 2021 के इस 3 वर्ष के समय में शानदार कामयाबी हासिल कर ली है। उसी प्रकार अगले 4 वर्षों में भी इसीलिए करके बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

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