शहीद उधम सिंह का जीवन परिचय | Udham Singh Biography in hindi

आज के इस लेख में हम ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के बारे में चर्चा करेंगे जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में विख्यात हुए। जी हां दोस्तो आज के इस लेख में हम उधम सिंह के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे।

1919 में हुयें 1500 लोगों के क्रूर जलियावाला नरसंहार से बच निकलने में कामयाब हुये थे उधम सिंह इनका असली नाम शेरसिंह था। यह नाम से ही बल्कि असली शेर थे। अपनी छोटी सी 20 वर्ष की आयु में इन्होंने संकल्प ले लिया था की वह इस नरसंहार के प्रमुख जिम्मेदार व्यक्ति ले. जनरल डायर से बदला लेंगे।

तो आइए, उधम सिंह का जीवन परिचय ( Udham Singh Biography in hindi) के बारे में पूरी कहानी जानते हैं। गदर पार्टी से संबंध रखने वाले उधम सिंह भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन के एक बहुत ही दृढ़ संकल्प क्रांतिकारी नेता थे। उधम सिंह को शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह के नाम से भी जाना जाता है।

विषय–सूची

उधम सिंह का जीवन परिचय (Udham Singh Biography in hindi)

नाम (Full Name)उधम सिंह
असली नाम (Real name)शेर सिंह
जन्म (Date of Birth)26 दिसंबर 1899
जन्म स्थान (Birth Place)सुनाम, पंजाब, ब्रिटिश भारत
मृत्यु (Death)31 जुलाई 1940
स्थान (Place) बार्न्सबरी, इंग्लैंड, यूके
मृत्यु कारण40 वर्ष की आयु में फांसी की सजा मिली
पेशास्वतंत्रता सेनानी व क्रांतिकारी नेता
संगठन व राजनीतिक पार्टी ग़दर पार्टी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन,
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन

उधम सिंह का प्रारंभिक जीवन

उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को पंजाब राज्य के सुनाम नामक जगह पर हुआ था। जो कि उस समय ब्रिटिश भारत के अंतर्गत आता था, और तभी इनका नाम शेर सिंह रखा गया था। जब शेर सिंह छोटे थे तो इनकी माता की मृत्यु हो गई थी। उधम सिंह के पिता का नाम तहल सिंह था।

तहल सिंह एक किसान थे और खेती – किसानी के आलावा उपल्ली नामक गांव में रेलवे क्रॉसिंग में चौकीदार का काम करते थे। उधम सिंह की माता की मृत्यु के कुछ समय बाद ही उनके पिता तहल सिंह की भी मृत्यु हो गई।

अपने पिता तहल सिंह की मृत्यु के बाद उधम सिंह और उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह को अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय ले जाया गया। उधम सिंह ने अपनी मैट्रिक की परीक्षा 1918 में पास की और सन 1919 में अनाथालय छोड़ दिया।

उधम सिंह के जीवन की कुछ प्रमुख घटनाएं

जलियांवाला बाग हत्याकांड

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं जैसे: सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल आदि को रॉलेट एक्ट के तहत 10 अप्रैल 1919 को गिरफ्तार किया गया था। तो 13 अप्रैल 1919 को लगभग 20 हजार से अधिक लोग इकठ्ठे हुए थे जो कि बिल्कुल निहत्थे थे मतलब कि उनके पास कोई भी हथियार नहीं थे। उस समय बाग में गोलियां चलाई गईं जिसमें कि कई लोग मारे गए ये गोलियां ब्रिटिश सैनिकों के द्वारा चलाई गईं थीं। उस समय उधम सिंह जलियांवाला बाग में भीड़ को पानी पिला रहे थे।

उस समय में चल रही क्रांतिकारी राजनीति में उधम सिंह शामिल हो गए। उधम सिंह, भगत सिंह से बहुत ज्यादा ही प्रभावित थे। उधम सिंह गदर पार्टी में शामिल हुए थे। और वह विदेशों में भारतीयों को इकठ्ठा कर रहे थे। भगत सिंह के कहने पर 1927 में उधम सिंह अपने 25 साथियों के साथ गोला, बारूद, रिवाल्वर आदि लेकर भारत वापस आए। जैसे ही उधम सिंह वापस आए उन्हें बिना लाइसेंस के हथियार रखने पर गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चला कर उधम सिंह को पांच वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई।

जेल से 1931 में रिहा होने के बाद उधम सिंह पर लगातार पुलिस की नजर बनी हुई थी। और विदेश जाने के लिए बनने वाले पासपोर्ट के लिए ही उधम सिंह ने अपना शेर सिंह से नाम बदलकर उधम सिंह रऽा था। 1934 में उधम सिंह लंदन पहुंचे जहां पर उन्होंने एक इंजीनियर के रुप में रोजगार पाया। और उन्होंने लंदन में ही निजी रूप से जनरल डायर की हत्या की योजना बनाई।

जनरल ओ’ ड्वायर की हत्या

जलियावालां कांड ने उधम सिंह को अंदर से झंकझोर कर रख दिया था। वह बहुत ही आक्रोशित थे। उनके जीवन का एक ही दृढ संकल्प था कि उन्हें इसके मुख्य दोषियों से बदला लेना है जिनमें जनरल डायर प्रमुख थे। जिन्होंने वहा पर मौजूद महिलाओं, बच्चों व बूढ़ों को बचने का एक मौका भी नहीं दिया और सभी को गोलियों बुरी तरह भून डाला था और निकलने वाले मेन गेट पर तोपे लगा दी।

लेकिन 1927 में ही जनरल डायर अपनी मौत खुद ही मर गया था। वह दिमाग की घातक बीमारी वजह से मर चुका था। इसके बाद उन्होंने पंजाब के गर्वनर माइकल फ्रेंसिस ओ’ ड्वायर को इसका प्रमुख जिम्मेदार माना, जिसने जलियावाला कांड जैसे जगन्य अपराध को जरूरी और उचित कहा था।

कैक्सटल हाल में शूटिंग

ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और मध्य एशिया सोसाइटी की संयुक्त बैठक में 13 मार्च 1940 को कैक्सटन हाल, लंदन में माइकल फ्रेंसिस ओ’ ड्वायर का एक भाषण था। जब यह सूचना उधम सिंह को मिली तो उन्होंने एक पब में एक सैनिक से बहुत अधिक दामों में एक रिवॉल्वर खरीदा और उन्होंने उसे इस प्रकार से एक किताब के पन्नों को काटा कि उसमें वो रिवॉल्वर सटीक बैठे और फिर उधम सिंह ने बड़ी ही चालाकी से हॉल में प्रवेश किया।

एक खाली सीट पाकर उसमें बैठ गए। और जैसे ही जनरल डायर स्टेज की ओर भाषण देने के लिए बढ़ा वैसे ही उधम सिंह ने जनरल डायर की ओर कई गोलियां चलाईं जिनमें से एक गोली जनरल ओ’ डायर के दाहिने फेफड़े से होकर गुजरी जिसके लगभग तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई और उधम सिंह द्वारा चलाई गई गोलियों में लगभग 5 से 6 अन्य लोग भी घायल हुए थे। इस हत्याकांड के तुरंत बाद ही उधम सिंह ने खुद को आत्मसमर्पित कर दिया था।

उधम सिंह पर हत्या का मुकदमा

उधम सिंह पर 01 अप्रैल 1940 को माइकल फ्रेंसिस ओ’ ड्वायर की हत्या का आरोप लगाया गया। और उन्हें ब्रिक्सटन जेल में हिरासत के लिए भेज दिया गया। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि, वो इसी के लायक था मैंने एक पब से रिवॉल्वर खरीदी थी और मैने उसे मार दिया मुझे किसी प्रकार का कोई डर नहीं है और मुझे मृत्यु से बिल्कुल डर नहीं लगता है।

अपने मुकदमे के दौरान उधम सिंह 42 दिनों की भूख हड़ताल पर चले गए लेकिन उन्हें जबरदस्ती भोजन खिलाया गया। उधम सिंह का मुकदमा 04 जून 1940 को ओल्ड बेली के क्रिमिनल कोर्ट में जस्टिस एटिंसन के सामने शुरू हुआ।

उधम सिंह को जनरल डायर की हत्या का दोषी पाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 31 जुलाई 1940 को उधम सिंह को अल्बर्ट पियरेपॉइंट द्वारा पेंटनविले जेल में फांसी दी गई थी। उधम सिंह के अवशेष पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में संरक्षित हैं। प्रत्येक 31 जुलाई को विभिन्न संगठनों द्वारा सुनाम में मार्च निकाला जाता है और शहर में उधम सिंह की प्रत्येक प्रतिमा को फूलों की माला से श्रद्धांजलि दी जाती है।

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उधम सिंह की उपलब्धिया और सम्मान:

उधम सिंह की जीवनी के बाद अब हम आपको उनके उपलब्धियों के बारे में जानकारियाँ देंगे। और उन्हें मिले हुए सम्मान का जिक्र करेंगे।

  • जलियांवाला बाग (अमृतसर) के नजदीक में सिंह लोगों को समर्पित एक म्यूजियम भी बनाया गया है।
  • उधम सिंह जी के द्वारा दिए गए बलिदान को कई भारतीय फिल्मों में दमदार तरीके से फिल्माया गया है जिनमें (१) शहीद उधम सिंह (१९७७) (२) जलियांवाला बाग़ (१९७७) (३) शहीद उधम सिंह (२०००) फिल्में प्रमुख हैं।
  • सिक्ख भाईयों के हथियार जैसे:- चाकू तथा शूटिंग के दौरान उपयोग की गई गोलियों को ब्लैक म्यूजियम में जो कि स्कॉटलैंड यार्ड में है।, उधम सिंह के सम्मान के रूप में दिखाया गया है।
  • Rajasthan में अनूपगढ़ में एक पुलिस चोकी का नाम उधम सिंह के नाम पर रखा गया है।
  • झारखंड के एक जिले का नाम उधम सिंह है जो कि उन्ही के नाम से प्रेरित है।
  • जिस दिन पुण्यतिथि होती है। उस दिन पंजाब और हरियाणा में सभी जगह छुट्टी रहती है।
  • हर एक 31 जुलाई को विभिन्न संगठनों के द्वारा सुनाम में मार्च पास्ट निकाला जाता है। और उस शहर में उधम सिंह की हर एक प्रतिमा को फूलों की माला से श्रद्धांजलि भी दी जाती है।

आज के इस लेख में हमने शहीद ऊधम सिंह (udham Singh biography in hindi) के विषय पर सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की है। हम उम्मीद करते हैं आपको हमारे द्वारा लिखा गया ये लेख पसंद आया होगा। यदि पसंद आया हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

उधम सिंह जीवन परिचय सम्बन्धित कुछ FAQ

प्रश्न- उधम सिंह का असली नाम क्या था?

उत्तर- उधम सिंह का असली नाम शेर सिंह था।

प्रश्न- उधम सिंह कौन थे?

उत्तर- उधम सिंह एक क्रांतिकारी व्यक्ति थे और वह भगत सिंह से बहुत प्रभावित थे और उधम सिंह ने ही जलियांवाला बाग के हत्याकांड के प्रमुख मास्टरमाइंड जनरल ओ’ ड्वायर को मारा था।

प्रश्न- उधम सिंह का जन्म किस जगह हुआ था?

उत्तर- उधम सिंह का जन्म स्थान सुनाम, पंजाब में हुआ था।

प्रश्न- उधम सिंह का जन्म कब हुआ था?

उत्तर- उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर 1899 को हुआ था।

प्रश्न:- उधम सिंह की मृत्यु कब हुई थी?

उत्तर- उधम सिंह की मृत्यु 31 जुलाई 1940 को हुई थी।

प्रश्न- जनरल डायर को किसने मारा था?

उत्तर- जनरल डायर को उधम सिंह ने नहीं मारा था। बल्कि उसकी मृत्यु खुद ब्रेन हेम्रेज के कारण हुई। वास्तव में उधम सिंह ने माइकल फ्रेंसिस ओ’ ड्वायर को मारा था। जोकि जलियांवाला कांड के समय तत्कालित पंजाब के गर्वनर थे।

प्रश्न- उधम सिंह ने जनरल डायर को कब मारा था?

उत्तर- उधम सिंह ने जनरल ओ’ ड्वायर को कैक्सटल हॉल लंदन में 13 मार्च 1940 को मारा था।

प्रश्न- उधम सिंह जनरल डायर को क्यों मारना चाहते थे?

उत्तर- उधम सिंह ने जनरल डायर को इसलिए मारना चाहते था क्योंकि जनरल डायर जलियांवाला बाग के हत्याकांड का मास्टरमाइंड था।

प्रश्न- उधम सिंह ने जेल में अपना नाम क्या रख लिया था?

उत्तर:- मोहम्मद सिंह आजाद नाम वह नाम था जो उधम सिंह ने रख लिया था। क्योंकि उन्हें जेल में बंद हिन्दू मुस्लिम सिख को आजाद करवाना था।

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