मोहनजोदड़ो का इतिहास व रहस्य | Mohenjo Daro History in hindi

मोहनजोदड़ो की विशेषताएं निबन्ध, टिप्पणी, मोहनजोदड़ो का इतिहास व रहस्य बताइए (Mohenjo Daro History in hindi, facts story, eassy)

आज का हमारा यह लेख सिन्धु घाटी सभ्यता के शहर मोहनजोदड़ो (Mohenjo Daro History in hindi) और हड़प्पा संस्कृति के ऊपर रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे। यह मानव इतिहास का एक चमत्कारिक और अविस्मरणीय पहलू है जिसमें वर्तमान में हम भूतकाल में बसे हुए उन लोगों के बारे में जानेंगे जो 500-600 साल पहले नहीं बल्कि 8000 साल से भी ज्यादा पहले हमारी ही धरती पर जी रहे थे, रह रहे थे और फल फूल रहे थे।

आज के लेख में हम यह जानेंगे की मोहनजोदड़ो क्या है? मोहनजोदड़ो कहा स्थित है, इसकी खोज किसने करी और कब करी, इसके अलावा मोहनजोदड़ो का असली नाम क्या है, इसका मतलब क्या है, यह कैसा शहर था, और इसके बारे में कुछ रोचक तथ्यों की जानकारी आपको आज देंगे।

सिन्धुघाटी सभ्यता का शहर मोहनजोदड़ो का इतिहास व रहस्य (Mohenjo Daro History in hindi)

मोहनजोदड़ो क्या है? इसकी विशेषता क्या है?

मोहनजोदड़ो सिन्धुघाटी सभ्यता का एक प्राचीन शहर है। जिसकी तुलना आज के उन्नत तकनीक से की जा सकती है। इस शहर को देखकर नहीं लगता है कि यह किसी प्राचीन सभ्यता द्वारा बसाया गया शहर है। यह 500 एकड़ में फैला एक उत्कृष्ठ शहर था। शहर के चारो ओर मोटी पक्की ईटों की बनी दीवारे हैं। घरों में बने हुए शौचालय, स्नानागार, दो-तीन मजिलों की इमारते, चौड़ी गलिया, पानी को निकालने की उचित व्यवस्था थी। यह शहर बहुत ही नियोजित तरीके से एक-एक चीज को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया गया था।

जिसे आज के उन्नत शहरों की तरह एक आधुनिक शहर माना जा सकता है। एक तरीके से कहा जाए तो मोहनजोदड़ो सिन्धु और सरस्वती घाटी सभ्यता का एक शहर है। सिन्धु- सरस्वती घाटी सभ्यता को दयाराम सहानी ने खोजा था, लेकिन इसके पदचिन्ह 1826 में चार्ल्स मेसन द्वारा दिए गए।

कहा जाता है की जब 17वीं शताब्दी में लोगों ने पंजाब राज्य में अपना घर बनाने के लिए जमीन खोदी तो वहां उन लोगो को मजबूत और टिकाऊ बनी बनाई ईंटे मिलने लगी। बहुत से लोगों ने इसे भगवान का अवतार माना और उन ईंटो से घर बनाने लगे। आश्चर्य इस बात का है कि हजारो सालों बाद भी उनके घर की ईंटे इतनी मजबूत थी।

मोहनजोदड़ो का असली नाम क्या है?

मोहनजोदड़ो केवल बोलने के लिए ही एक नाम है जो शब्दों की आसानी के लिए काम में लिया जाता था। असल में इस शहर को सिन्धु नदी के किनारे खोजा गया था इसी लिए इसको नाम भी सिन्धी भाषा में ही दिया गया। इसका मूल नाम ‘मुअन जो दड़ो’ था जिसका अर्थ निकाला जाए तो हिंदी में इसको ‘मुर्दों का शहर’ कहते हैं।।

अब आप सोच रहे होंगे कि कोई एक पूरे शहर को मुर्दों का शहर भला क्यों कहेगा? लेकिन इसके पीछे भी एक कारण है। क्या कारण है आइए जानते है 1922 में राखलदास जी ने इस शहर की खोज करी, तब खुदाई में यहाँ से बहुत ही ज्यादा हड्डियाँ व कंकाल मिले, इतने ज्यादा कंकाल को देखकर यह समझा आ गया कि इस शहर की सड़कों पर लोग मरे पड़े थे। इस लिए इसे मुर्दों का शहर कहा जाता है।

मोहनजोदड़ों कहा स्थित है?

मोहनजोदड़ो की खोज सिन्धु घाटी सभ्यता के नजदीक हुई। यहाँ शहर जिसे मोहनजोदड़ो के नाम से जाना जाता है वह शहर सिन्धु और सरस्वती नदी के किनारे पर बसा हुआ था।

मोहनजोदड़ो लगभग पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित, लरकाना जिला में है। इसको इतिहास की सबसे पुरानी और उन्नत सभ्यताओं में से एक माना जाता है। इस सभ्यता का विकास सिंधु, घघ्घर, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, हडप्पा और सिंधु घाटी की सभ्यताओं के कालखण्ड के दौरान हुआ।

मोहनजोदड़ो की खोज किसने करी? (Mohenjo Daro Discovery)

सिन्धुघाटी सभ्यता के बाद 1922 में खुदाई के दौरान राखलदास जी ने वहा खुदाई शुरू करी जिसमे एक पूरा का पूरा शहर निकला जिसे मोहनजोदड़ो नाम दिया गया।

मोहनजोदड़ो के अनेकों रहस्य (Facts About Mohenjo Daro)

सन 1820 में एक ब्रिटिश खोजकार चार्ल्स मेसन ने जब देखा की लोग जमीन की पूजा इस लिए कर रहे है क्योंकि उन्हें घर बनाने के लिए ईंटे दी जा रही है तो उनका सर चकरा गया। उन्होंने वहा के राजा से आज्ञा लेकर वहा थोड़ी सी खुदाई करी।

बाद में उन्हें जो पता चला वह एक दम सर चकरा देने वाला था। चार्ल्स मेसन को एक पूरी सभ्यता की जानकारी मिली जिसके एक शहर मोहनजोदड़ो (खोज के बाद नाम दिया गया) बाद में सन 1922 में राखलदास जी ने खुदाई शुरू करी और एक पूरे शहर को ही खोज लिया।

लेकिन वहा जो तथ्य और जानकारियां मिली वह आज भी लोगो को आश्चर्यचकित कर देती है-

1.  यह सभ्यता अपने आप में मिस्र की पूरी सभ्यता से भी बहुत बड़ी थी और जगह जगह सरस्वती नदी और सिन्धु नदी के किनारे इस सभ्यता के शहर बसे हुए थे।

2.  लगभग 8000 साल पुराने शहरों में भी आज के कुछ गाँवों के मुकाबले में अधिक सुख सुविधाए मौजूद थी।

3.  कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि सिन्धु घटी सभ्यता 5000 साल पुरानी है, लेकिन इन दावों को IIT खड़गपुर के कुछ वैज्ञानिकों ने खंडित किया है और उन्होंने बताया है कि यह शहर 8000 साल से भी ज्यादा पुराना है ।

4.  मोहनजोदड़ो शहर का यदि बारीकी से निरक्षण किया जाए तो हमें यह बात समझ आती है की 8000 साल पहले इस शहर में रहने वाले लोग अत्यधिक समझदार थे और व्यापार की भी उनमे समझ थी।

5.  मोहनजोदड़ो शहर से प्राप्त हुई वस्तुओं के अवशेषों में उस समय की भाषा में छपि लिपि को आज तक कोई समझ नहीं पाया है। इससे यह साबित होता उस समय इस शहर के लोगों की अपनी एक भाषा थी और वह इस भाषा बोल भी लेते थे और समझ सकते थे। अगर आज कोई खोजकर्ता इस भाषा को समझ जाये तो हमें पहले के बहुत सारे राज खुल सकते है।

6. यहां मिले कंकालों के अवशेषों का निरिक्षण करने पर पता चला है उस समय दांतों के चिकित्सक भी मौजूद थे। इन कंकालों के जबड़ों में नकली दांत मिले है जोकि एक चौकाने वाला तथ्य है।

7. इस शहर से प्राप्त सभी ईंटों का माप, भारत सभी एक जैसा था जिससे साबित होता है। इन लोगों को गणित का अच्छा ज्ञान था। इन ईंटों की बनावट इतनी उन्नत थी लगता है मानों इन्हें एक ही मशीन में बनाई गई हो

8.  मोहनजोदड़ो में मिले सबूतों से यह बात समझी जा सकती थी की वहा लोगों ने अन्न का संरक्षण और उसे बचाने और सुरक्षित रखने के तरीकों पर भी काम किया था क्योंकि वहा बड़े बड़े अन्न भण्डार मिले थे।

9. मोहनजोदड़ों शहर के बीचो-बीच एक स्नानागार मिला है जोकि लगभग 600 वर्गफुट चौड़ा और छ फूट गहरा है। यह बहुत ही मजबूत था। इसके चारो तरफ चारकोल की मोटी परत लगा रखी थी दरअसल चारकोल पानी को रिसने नहीं देता है और इसके निर्माण में उपयोगी की गई ईटे पूरी तरह वाटरप्रूफ थी।

10.   इसी के साथ वहा लोगों को साज सज्जा से भी उन लोगों को लगाव था क्योंकि वहा कुछ ऐसी चीजे मिली जिनका उपायों श्रींगार में आ सकता था। वहा लोगों ने ऐसे अच्छे घर बनाये थे जैसे आजकल शहरों में बनते है।

11. वहां लोगों ने शहरों और गावों दोनों में पानी निकास के लिए उपाय कर रखे थे जो अपने आप में बहुत सी बाते कहता है और हमें 8000 साल पुराने लोगों को समझने में मदद करता है।

मोहनजोदड़ो के निवासी सफाई से प्रेम करते थे

मोहनजोदड़ो के निवासियों को सफाई बहुत पसंद थी इसलिए उन्होंने नालियां बनाना, स्नानागार बनाना, शौचालय बनाना, बरसात के पानी के लिए ड्रेनेज सिस्टम बनाना, टाइल्स बनाना, अच्छी सड़के बनाना और स्नान घरों के साथ ही एक छोटा कमरा भी बनाना इन बातों को साबित करता है कि इस शहर में रहने वाले लोग अत्यधिक समझदार थे और सफाई पसंद थे।

चित्रकला में भी निपुर्ण थे ये लोग

यहां के लोग चित्रकला मे भी निपूर्ण थे क्योंकि वहा पर जो शिलालेख मिले थे उनसे यह बात समझ आ सकती है की वे भाषाओं और चित्रें के मिश्रण से भी वार्तालाप कर सकते थे।

पूजा करना भी उनका धर्म था।

मोहनजोदड़ों में मिले सबूतों से यह भी पता चला की वहां लोग आग की पूजा करते थे क्योंकि वहा कुछ अग्निकुंड भी मिले थे, जली हुई लड़कियों के अवशेष और पूजा की सामग्रियों के अवशेष भी मिल थे।

मोहनजोदड़ो के लोग काफी समझदार भी थे।

एक और आश्चर्यजनक चीज वहा मिली जो यह बताती है कि मोहनजोदड़ो शहर में लोग खेलों को भी पसंद किया करते थे और शतरंज जैसे खेल खेलते थे। इससे से यह बात सामने निकलकर आती है कि, वहां रहने वाले लोग बहुत ही ज्यादा समझदार थे।

मोहनजोदड़ो सभ्यता समाप्त कैसे हुआ?

बहुत से लोग बहुत सी बाते कहते है लेकिन इसका प्रमाण किसी के पास नहीं लेकिन इसी पर कुछ लोगों के कल्पना करी कि शायद वहा बाढ़ आ गयी होगी।

वह पूरा शहर नदी किनारे बसा हुआ था तो इस बात की कल्पना करना निरर्थक भी नहीं हो सकता था कि वहा बाढ़ आ जाये।

लेकिन कुछ लोगों का कहना था की इतनी बड़ी मात्र में कंकालों का मिलना यह बताता है की या तो उस शहर पर किसी ने आक्रमण किया था, या फिर कोई भयंकर महामारी ने लोगों को मार दिया था या कोई भूकंप आ गया था।

क्योंकि केवल बाढ़ से इतने लोग नहीं मर सकते और इसकी वजह यह भी थी की भारी बारिश के लिए भी यहां ड्रेनेज सिस्टम मौजूद था।

तो आज के लेख में हमने मोहनजोदड़ों क्या है? (Mohenjo Daro History in hindi ) और इससे संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त करी है। हम उम्मीद करते है आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा यदि आपको ये लेख पसंद आया हो तो कृपया इसे जरूर शेयर करें।

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