छठ पूजा कब है? क्यों मनाया जाता है? शुभ मुहूर्त, छठ पूजा मनाने की विधि, सामग्री, छठ पूजा का इतिहास, छठ पूजा मंत्र (Chhath puja ka itihas 2025 History & Story in hindi) छठी मैया की आरती (chhath maiya aarti lyrics)
भारत पर्व और त्योहारों का देश है। यहां हर आए दिन किसी न किसी राज्य प्रदेश में कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है। इन्हीं त्योहारों में से छठ पूजा का त्यौहार भी एक है जो मुख्य रूप से बिहार में मनाया जाता है।
छठ पूजा का त्योहार बिहार तथा उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख त्यौहार होता है। यह सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इस दिन सभी छठ पूजा करने वाले लोग गंगा में जाकर माता गंगा और भगवान सूर्य देव की पूजा आराधना विधि-विधान से करते हैं।
छठ पूजा का पावन त्यौहार 4 दिनों का होता है ऐसे में बहुत सारे लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर में छठ पूजा क्यों मनाया जाता है? उसका महत्व क्या है 2025 में छठ पूजा कब है? पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? कैसे मनाया जाएगा?
इन सभी चीजों के बारे में अगर आप विस्तार से जानना चाहते है तो हम आपसे निवेदन करेंगे कि हमारे साथ आर्टिकल पर बने रहें चलिए शुरू करते हैं-

विषय–सूची
छठ पूजा कब मनाया जाता है?
छठपूजा का पर्व वर्ष में दो बार आता है। पहली बार चैत्र मास में दूसरा कार्तिक माह की शुल्क पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। छठ पर्व, छठी माता, डाला छठ, षष्ठी के नाम से भी जानते हैं। यह त्यौहार मुख्यतः बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
2025 में छठ पूजा कब है?
आपकी जानकारी के लिए बताने की इस बार छठ पूजा का त्यौहार 25 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। छठ पूजा का पहला दिन 25 अक्टूबर 2025 को नहाय खाय का दिन होगा। जबकि इस पर्व का दूसरा दिन खरना के तौर पर मनाया जाएगा।
जैसा कि हम सब जानते हैं छठ पर्व पर दो बार भगवान सूर्य को जल से अर्घ्य दिया जाता है। इनमें से एक अर्घ्य डूबते हुए सूर्य तथा दूसरा अर्घ्य उगते हुए सूर्य देव को दिया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसबार 27 अक्टूबर 2025 की सांझ भगवान सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा जबकि अगले दिन 28 अक्टूबर 2025 की सुबह भगवान सूर्य को ऊषा अर्घ्य देकर छठ पर्व त्यौहार का समापन हो जाएगा।
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त (Chhat puja Shubh Muhurat 2025)
| नहाय खाय | 25 अक्टूबर (शनिवार) | सूर्योदय : 06:28 सूर्यास्त : 05:42 |
| खरना | 26 अक्टूबर (रविवार) | सूर्योदय: 06:29 सूर्योस्त: 05:41 |
| सूर्यास्त का समय (संध्या अर्घ्य) | 27 अक्टूबर (सोमवार) | सूर्योदय: 06:30 सूर्योस्त: 05:40 |
| ऊषा अर्घ्य (प्रातःकाल सूर्य अर्घ्य) | 28 अक्टूबर (मंगलवार) | सूर्योदय: 06:30 सूर्योस्त: 05:39 |

छठ पूजा क्यों मनाया जाता है? इसका पौराणिक इतिहास
छठ पर्व हिंदू धर्म का बहुत ही पवित्र त्यौहार है। रामायण के वैदिक काल से ही इसकी शुरुआत हो गई थी। महाभारत युग में दानवीर कर्ण सूर्य को अर्घ्य देने के लिये घंटो खडे रहते थे। हिंदु धर्म सुबह-सुबह पवित्र नदी में स्नान करने के पश्चात अर्घ्य देकर ही दिन की शुरुआत होती थी।
रामायण काल में श्री राम जब 14 वर्षो के वनवास के पश्चात अयोध्या वापस आये तो रावण की हत्या के पाप से मुक्त होने के लिये राजसूर्य यज्ञ किया और मुग्दल ऋषि के आदेश पर आश्रम में रहते हुये कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को सूर्य देव की पूजा की। ऋषि के आदेश पर लगातार 6 दिनों तक सूर्य देव की कठिन उपासना व अनुष्ठान किया। पौराणिक मान्यता है तभी से इस त्यौहार को मनाने की परंपरा आरंभ हुई थी।
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छठ पूजा मंत्र (Chhath Puja mantra)
छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देते समय इन मंत्रो का उच्चारण किया जाता है।
ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः,
ॐ घृणि सूर्याय नमः, ॐ पूष्णे नमः, ॐ हिरण्यगर्भाय नम:, ॐ मरीचये नमः,
ॐ आदित्याय नमः, ॐ सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः,
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नमः

छठी मैया की आरती (chhath maiya aarti lyrics)
जय छठी मईया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुरवसे, सुगा गिरे मुरझाए । जय छठी मईया ।।
ॐ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए । जय छठी मईया ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥ जय छठी मईया .. ।।
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए | जय छठी मईया .. ।।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए । जय छठी मईया... ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय । जय छठी मईया .. ।।
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए । जय छठी मईया .. ।।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए । । जय छठी मईया .. ।।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।। जय छठी मईया .. ।।

छठ पूजा मनाने की विधि
जैसा कि आप लोग जानते हैं कि छठ पूजा चार दिनों का महापर्व है और 4 दिनों की पूजा विधि काफी अलग-अलग होती है उन सभी वीडियो के बारे में हम आपको नीचे विस्तार पूर्वक जानकारी देंगे आइए जानते हैं।
प्रथम दिन नहाए खाए
पूजा का शुभ आरंभ नहाए खाए के द्वारा होता है इस दिन सभी महिलाएं सुबह उठकर घर की साफ सफाई करती हैं उसके बाद अच्छी तरह से स्नान कर अपने आप को पवित्र करती है फिर भात दाल साग और सब्जी में कद्दू जैसे स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं और उनको सबसे पहले माता छठ मैया को अर्पित किया जाता है उसके बाद व्रत रखने वाली महिलाएं उसे खाती हैं इसके बाद ही उसे सभी लोगों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इस दिन कद्दू बनाना आवश्यक होता है क्योंकि कद्दू इस विधि का सबसे प्रमुख पूजा सामग्री हैI
दूसरा दिन खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन खरना की पूजा विधि संपन्न की जाती है इस दिन महिलाएं पूरे दिन भर उपवास व्रत का पालन करती हैं और फिर संध्या के समय की खीर बनाई जाती है चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसके बाद छठ मैया को भोग अर्पित किया जाएगा और फिर व्रत रखने वाली महिलाएं उसे खा कर अपना उस दिन का व्रत पूरा करेंगे फिर प्रसाद के रूप में इसे सभी घरों में वितरण किया जाएगा इसके अलावा इस दिन घर पर लोगों को आमंत्रित किया जाता है ताकि जब पूजा समाप्त हो जाए तो उन्हें भोजन कराया जा सकेI
तीसरे दिन अर्घ्य दिया जाता है
तीसरे दिन छठ मैया को प्रथम अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन छठ मैया को भोग लगाने के लिए ठेकुआ और चावल के लड्डू बनाए जाते हैं। साथ में पांच प्रकार के फल पूजा सामग्री के रूप में बनाकर रखा जाता है। उसके बाद उन सभी पूजा सामग्री को सूप पर सजाएंगे फिर उसे बात की एक टोकरी में रख देते हैं। दोपहर के बाद से छठ मैया का डाला तैयार किया जाता है। फिर गंगा घाट जाने की तैयारी शुरू हो जाती है। घर के सभी लोग व्रत करने वाली लोगों के साथ जाते हैं।
नदी के घाट पर पहुंच कर व्रती स्त्रियां छठ घाट पर जाकर जल में कमर तक प्रवेश करते हैं और फिर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस रात बहुत से लोग जागरण करते हैं और धार्मिक कथाएं भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है और इस दिन व्रत रखने वाले लोग कुछ भी नहीं खाते हैं यहां तक कि पानी भी नहीं पीते हैं यह पूरी तरह से निर्जला व्रत होता हैI
चौथे दिन अरग
छठ व्रत के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में छठ मैया का डाला सजाकर व्रती लोग छठ घाट पर आते हैं। उसके बाद व्रत रखने वाले लोग गंगा जी में प्रवेश करते हैं और जब सूरज उदित होता है तब उसे देखकर माता गंगा को अरग दिया जाता है उस दौरान व्रत रखने वाली महिलाएं अपने बेटे और पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं और साथ में उनके घर के ऊपर किसी प्रकार की कोई तकलीफ यह समस्या ना आए।
इस दिन विवाह के लिए भी माता छठ मैया से आशीर्वाद लेते हैं पूजा समाप्त होने के बाद सभी लोग घाट के ऊपर व्रत रखने वाली महिलाओं को मिठाई या गुड देकर उनका व्रत पूरा करवाती हैं उगते हुए सूर्य को व्रती अर्घ्य देते हैं। इसके अलावा व्रती लोग गुनगुना दूध पीकर व्रत समाप्त करते हैं।
चूंकि व्रती 36 घंटे से कुछ भी खाए पीए नहीं होते हैं ऐसे में कुछ भी खाने से गला छिल जाने का भय रहता है इसलिए पहले दूध पीकर गले को तर कर लिया जाता है। फिर सभी लोग घर वापस आते हैं और आकर सभी लोगों को प्रसाद का वितरण करते हैं फिर घर में विभिन्न सब्जियों को मिलाकर मिला हुआ सब्जी और चावल बनाया जाएगा और उसे व्रत रखने वाली महिलाओं को खिलाया जाएगा या एक प्रकार का प्रसाद ही होता है I
छठ पूजा कैसे मनाया जाता है?
छठ पूजा का त्यौहार भारत के उत्तर भारत में विश्वेश्वर पर बिहार और उत्तर प्रदेश में काफी हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है क्योंकि छठ पूजा की महिमा अगर आपको देखनी है तो आप बिहार और उत्तर प्रदेश चल जाए क्योंकि यहां पर छठ पूजा विशेष पर्व के रूप में मनाया जाता है।
छठ पूजा का महाभारत 4 दिनों का होता है और 4 दिनों का होता है और 4 दिनों की पूजा विधि काफी अलग-अलग होती है छठ व्रत में बिना अन्न जल ग्रहण करे रहना, सूर्य को कमर तक पानी में खड़े होकर अर्घ्य देना, साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना छठ पूजा के विशेष नियम है और इस नियम के द्वारा छठ पूजा पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है
इस दिन सूर्य की दोनों पत्नियां उषा अर्थात सूर्योदय एवं प्रत्युषा अर्थात सूर्यास्त की पूजा भी की जाती है। बिहार में षष्ठी माता के लोकगीत बहुत प्रचिलित हैं छठ पूजा के दिन विभिन्न प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और लोकगीत भी आयोजित किए जाते हैं उनके माध्यम से माता छठ मैया की महिमा का गुणगान किया जाता है और लोगों को छठ पूजा क्यों किया जाता है उसके बारे में भी जानकारी दी जाती है I
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छठ पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
छठ पूजा करने के लिए आपको निम्नलिखित प्रकार की पूजा सामग्री की जरूरत पड़ती है जिसका विवरण हम आपको नीचे बिंदु अनुसार देंगे आइए जानते हैं-
- नए वस्त्र
- दो बांस की टोकरें
- पानी वाला नारियल, सूप
- लोटा, गन्ना, लाल सिंदूर, धूव, बड़ें दीपक
- कच्ची हल्दी, चावल, थाली, दूध, गिलास, अदरक
- सिंघाड़ा नाशपाती, मूली, केला, सेब,
- सुथनी, आम पत्ते, शकरकंद, मीठा नींबू
- शहद, मिठाई, पान-सुपारी, कपूर कैराव
- चंदन कुमकुम, रोली
छठ पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है I छठ पूजा के दिन भगवान सूर्य और माता छठ मैया की पूजा की जाती है मान्यता के अनुसार अगर किसी भी नारी को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो आकर छठ मैया की पूजा करती है तो उसे संतान की प्राप्ति होगी इसके साथ परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है इसके अलावा छठ पूजा करने से आपके जीवन में अगर कोई भी विपदा या तकलीफ है तो उसका निवारण के छठ पूजा के माध्यम से होता है I
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छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?
छठ पूजा मनाने के पीछे कई प्रकार की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं उन सभी कथाओं के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि छठ पूजा क्यों मनाई जाती है आइए जानते हैं उसके बारे में
पहली कहानी
जैसा कि आप लोग जानते हैं कि पांडव अपना सभी राजपाट खो चुके थे जिसके कारण ही महाभारत का युद्ध हुआ था महाभारत के युद्ध में पांडवों और कौरवों के बीच में भीषण युद्ध हुआ था इस युद्ध में पांडवों जीत जाए ऐसी प्राण द्रौपदी के दौरान लिया गया था।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि अगर पांडव युद्ध में जीत जाते हैं तो आप माता छठ मैया की पूजा करेंगे ऐसे में जब पांडव की महाभारत में जीत हासिल हुई तब द्रौपदी ने छठ मैया की पूजा विधि विधान के साथ किया इसके बाद से ही छठ पूजा मनाने की प्रथा शुरू हो गई जो आज तक कायम है
दूसरी कहानी
दूसरी काया कहानी के मुताबिक जब श्रीराम ने रावण का वध कर और जय वापस आए तो अपनी पत्नी सीता के साथ सरयू नदी पर जाकर भगवान सूर्य देव की पूजा विधि विधान के साथ की जैसा कि आप लोग जानते हैं कि छठ मैया भगवान सूर्यदेव की बहन है यही कारण है कि छठ पूजा के दिन सूर्य देव की पूजा होती है तभी से छठ पूजा मनाने की शुरुआत हुई I
तीसरी कहानी
आप लोगों ने दानवीर कर्ण का नाम जरूर सुना होगा दानवीर कर्ण भगवान सूर्य देव के बहुत बड़े उपासक थे वह नियमित रूप से भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करते थे जिसके कारण भगवान सूर्य ने उन्हें असीम शक्तियां प्रदान की थी तभी से पूजा मनाने की परंपरा शुरू हुई I
चौथी कहानी
एक राजा थे प्रियव्रत, जिनकी कोई संतान नहीं थी उन्होंने लगातार तपस्या की और उन्हें एक संतान की प्राप्ति होगी लेकिन वह संतान मरा हुआ पैदा हुआ जिससे राजा बहुत ज्यादा दुखी है। उन्होंने यह तय किया कि वह अपनी संतान के साथ अपने आप को भी समाप्त कर लेंगे जैसे ही राजा अपने आप को मारने जा रहे थे तभी अचानक एक देवकन्या प्रकट होती है। वह राजा से कहती है कि,
वह ब्रह्मा पुत्री देवी षष्ठी की की पूजा अर्चना करें अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको दोबारा से संतान की प्राप्ति होगी जिसके बाद राजा ने देवी षष्ठी की पूजा विधि विधान से की जिसके बाद राजा को दोबारा से संतान की प्राप्ति हुई और तभी से से छठ पूजा मनाने की परंपरा शुरू हुई अगर किसी को संतान प्राप्ति नहीं हो रहा है देवी षष्ठी की पूजा-अर्चना करता है तो उसे संतान की प्राप्ति होगी I
कौन हैं छठ मइया?
छठ मैया भगवान ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं जिन्हें षष्ठी देवी कहां जाता है ऐसी मान्यता है कि अगर किसी को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो वह छठ मैया की पूजा विधि विधान से करेगा तो उसे संतान की प्राप्ति होगीI
FAQ
छठ पूजा कहां-कहां मनाया जाएगा?
छठ पूजा पूरे भारतवर्ष में मनाया जाएगा आप इसे सर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में यह पूजा काफी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैI
छठ पूजा साल में कितनी बार मनाया जाता है?
छठ पूजा साल में दो बार मनाया जाता है पहला छठ पूजा गर्मी के दिनों में और दूसरा शीतकाल में मनाया जाता हैI
छठ पूजा कितने दिनों का पर्व होता है?
छठ पूजा चार दिनों का पर्व होता है I