सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय | Sardar Vallabhbhai Patel biography in hindi

भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने आप को सर्वस्व समर्पित कर देने वाले क्रांतिकारी नेताओं को आज भी बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है उन्हीं नेताओं में से एक थे सरदार वल्लभ भाई पटेल जी जिन्हें लौह पुरुष की संज्ञा दी गई है।

आज इस लेख के माध्यम से हम सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय पर प्रकाश डालेंगे और आप उनके पारिवारिक शैक्षणिक और राजनीतिक जीवन से जुड़ी हुई जानकारियां देने का प्रयास करेंगे।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय व इतिहास| Sardar Vallabhbhai Patel biography in hindi

सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए किए गए आंदोलन और संघर्ष मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

अखण्ड भारत के मूल को अस्तित्व देने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का जन्म 31 अक्टूबर सन 1975 को गुजरात के नडियाद नामक गांव में हुआ था।

भले ही इनका वास्तविक नाम वल्लभ भाई झावर भाई पटेल था लेकिन लोग इन्हें प्यार से सरदार जी भी कह कर बुलाया करते थे।

लोग उन्हें सरदार जी इसलिए भी कहा करते थे क्योंकि उनके भीतर  कुशल नेतृत्व की कला थी उन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए बहुत से आंदोलन का नेतृत्व किया और उन्हें पूरी तरह से सफ़ल भी बनाया।

सन 1948 में गांधी जी की मृत्यु के मात्र 2 वर्ष के पश्चात ही 15 दिसंबर सन 1950 में अकस्मात हृदयाघात के कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की दुखद मृत्यु हो गई।

सरदार पटेल जी बहुत ही बुद्धिजीवी और दृढ़ निश्चय व्यक्ति थे विकट परिस्थिति का सामना करने में तनिक भी विचलित व असहज नहीं हुये। उनके इन्हीं गुणों के कारण उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का सक्षिप्त परिचय (Short and Brief Biography of Sardar Vallabhbhai Patel hindi)

पूरा नाम (Full Name)सरदार वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल
उपनाम (Nickname)लौह पुरुष (Iron man of India)
जन्म (Date of Birth)31 अक्टूबर, 1875
जन्म स्थान (Birth Place)नाडियाड, गुजरात
राष्ट्रीयता (Nationality)भारत (Indian)
धर्म (religion)हिन्दू (Hindu)
शिक्षा (Education)एनके हाईस्कूल, पेटलाड, इंस ऑफ कोर्ट, लंदन, इंग्लैंड
पेशा (Occupation)वकिल
मृत्यु/निधन15 दिसंबर 1950
मृत्यु का कारणहृदयाघात (Heart Attack)
पिता का नामझावेरभाई पटेल
माता का नाम लाड़बाई
पत्नी का नामझावेरबा
बच्चों के नामदहयाभाई पटेल(बेटा), मणिबेन पटेल (बेटी)

सरदार पटेल जी का पारिवारिक सम्बन्ध

सरदार वल्लभ भाई पटेल जी का जन्म गुजरात के छोटे से परिवार में हुआ था इनके पिता का नाम झावर भाई पटेल था जो पेशे से एक किसान थे तथा इनकी माता का नाम लाड बाई देवी था।

सरदार वल्लभभाई पटेल जी के चार भाई सोम भाई, नरसी भाई और विट्ठल भाई पटेल थे और उनकी एक बहन भी थी जिनका नाम दबीहा था।

अपने जीवन के शुरुआती दिनों में महामारी रोग से ग्रसित होने के कारण यह अपने परिवार से दूर नडियाद में अकेले रहते थे लेकिन जब इन्हें महामारी से राहत मिल गई तो यह पुनः अपने परिवार के साथ रहने लगे।

पटेल जी की एक पुत्री और थी जिसका नाम मानी और एक पुत्र था जिसका नाम दया भाई पटेल था।

उनकी पत्नी को कैंसर की बीमारी थी जिसके ऑपरेशन के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

सरदार जी का शैक्षणिक जीवन

इन्होंने 22 वर्ष की अवस्था में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी जिसके बाद इन्होने बैरिस्टर बनने में अपनी रुचि जाहिर की।

पटेल जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और एक दृढ़ निश्चय और कर्तव्य परायण व्यक्ति थे उनको बचपन से ही वकील बनने का शौक था ।

36 वर्ष की अवस्था में उन्होंने बैरिस्टर बनने के लिए प्रयास शुरू किया अपने इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल जी इंग्लैंड गए वहां जाकर माध्यमिक धर्मशाला मंदिर के  नाम की संस्था में प्रवेश लिया।

इन्होंने बैरिस्टर बनने के लिए पढ़ाई जाने वाली 36 महीने के कोर्स को 30 महीने में ही पूरा कर लिया।

अपना कोर्स पूरा करने के तुरंत बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल जी इंग्लैंड से डिग्री लेकर भारत आए और अमदाबाद में एक कुशल अधिवक्ता के पद पर कार्य किए।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इनका योगदान

जब सरदार वल्लभभाई पटेल जी भारत आए तो यहां की विपरीत परिस्थिति को अच्छी तरह से समझा और उनका गंभीर आंकलन करने के बाद महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर सरदार जी भारत को स्वतंत्र कराने के लिए किए जा रहे आंदोलनों के मैदान में कूद पड़े और अपने कुशल नेतृत्व के साथ भारत को स्वतंत्र कराने के लिए हो रहे आंदोलनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिस समय इन्होंने आंदोलन की शुरुआत की उस समय अंग्रेजों द्वारा भारतीय नागरिकों पर फिजूल के राजस्व कर लगाए जाते थे, इन्होंने अंग्रेजों द्वारा लगाए गए कर के विरोध में गुजरात और आसपास के सभी क्षेत्रों के किसानों को एकत्रित किए और गैर हिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन की स्थापना में सहयोग किया।

इन्होंने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए लगभग 300000 किसान आंदोलनकारियों को अंग्रेजी हुकूमत के राजस्व कर भुगतान के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा किया और 15 लाख रुपए की राशि फंड में जमा भी की।

पटेल जी ने जिस लक्ष्य के साथ इस आंदोलन की स्थापना की थी वह उसमें खरे उतरे और राजस्व पर लगाए जाने वाले इस कर को समाप्त करने में सफल हुए।

अंग्रेजों सरदार वल्लभ भाई पटेल के इस आंदोलन उसके बाद किसानों पर लगाए जाने वाले राजस्व कर को माफ कर दिया। राजस्व कर भुगतान की माफी के लिए किए गए इस आंदोलन से उनकी भूमिका उभरकर लोगों के सामने आई और गुजरात में एक शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे।

राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रमिक गतिविधियों में सरदार वल्लभभाई पटेल सन 1920 में गुजरात कमेटी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए गए और सन 1945 तक अपने पद पर कार्यरत रहे।

सरदार वल्लभ भाई पटेल गांधी जी द्वारा किए जा रहे असहयोग आंदोलन के कट्टर समर्थक रहे और उन्होंने खुलकर असहयोग आंदोलन का समर्थन करते हुए अंग्रेजी कानून का बहिष्कार किया।

इन आंदोलनों के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल ने ऊंची जाति और नीची जाति में फर्क करने वाले जातिवादी भावनाओं का खुलकर विरोध किया।

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सरदार पटेल जी की उपल्ब्धियां व सम्मान

सरदार वल्लभ भाई पटेल जी स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री बने जिन्हें 565 रियासतों का भारत में विलय का श्रेय जाता है। लेकिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय हो रहे आंदोलनों में भी उन्होंने विभिन्न उपलब्धियां प्राप्त की थी।

सरदार वल्लभभाई पटेल सन 1922 से 1927 तक अमदाबाद के नगर पालिका अध्यक्ष रहे।

इसके अलावा सन 1931 में कराची में होने वाले कांग्रेस के अधिवेशन में सरदार वल्लभभाई पटेल अध्यक्ष रहे।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सरदार जी एक प्रमुख नेता के रूप में उभर कर सामने आए। इस आंदोलन की शुरुआत के साथ ही उन्होंने इसका नेतृत्व करने का जिम्मा उठाया लेकिन 1942 के आंदोलन में इन्हें अंग्रेजों द्वारा कैद कर लिया गया था।

3 साल सब जेल की सजा काटने के बाद सन 1945 में भारतीय आंदोलनकारियों की मांग पर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।

सरदार वल्लभाई पटेल जी के निधन के पश्चात 1991 को सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

भारत की राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान

जब भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली तो उसके बाद ही कांग्रेस ने भारतीय राज व्यवस्था के संचालन के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत के पहले गृह मंत्री के रूप में चुना गया।

भारत के विभाजन के बाद विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए इन्होंने दिल्ली और पंजाब में आए हुए आए हुए शरणार्थियों के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के शिविरों का आयोजन किया।

सरदार जी का सबसे बड़ा योगदान भारत को एक पूर्ण गणराज्य बनाने में था।

इन्होने भारत की आजादी के बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय का दारोमदार थामा और अपने कुशल नेतृत्व के जरिए कुल 565 रियासतो का भारत में भौगोलिक विलय किया।

उन्ही की देन है की विश्व की भौगोलिक संरचना में भारत इतना बड़ा गणराज्य बनकर उभरा विभाजन के बाद जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है?

आज हम भारत को जो वर्तमान स्वरुप देख रहें हैं वह सरदार पटेल जी के अथक प्रयास से ही संभव हो पाया था उन्होंने भारत की विभिन्न रियासतों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1947 में जूनागढ़ रियासत व जम्मू कश्मीर के नवाबों ने भारत में शामिल न होने के लिये निर्णय ले लिया था। सरदार पटेल जी ने अपनी कूटनीति व राजनीतिक बुद्धिमत्ता इस्तेमाल किया और बिना किसी संघर्ष के इनको भारत में मिला लिया। इसके साथ उन्होंने भारत की सभी 565 रियासतों को सफलतापूर्वक एकजुट किया।

इनकी इसी कुशलता और दृढ़संकल्प निर्णय लेने के गुण के कारण ही इन्हें लौहपुरुष के नाम से जाना जाता है और इनके जन्मदिवस 31 अक्टूबर का दिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में मनाया जाता है।

2013 में इनको सम्मान व श्रद्धाजंलि देने व राष्ट्रीय अखंडता व एकता में इनके सहायनीय कार्य को याद करते हुये संसार की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैचू आफ यूनिटी (Statue of Unity) शिलान्यास तत्कालिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया। इसके निर्माण में लगभग 5 वर्ष का समय लगा। इसकी ऊंचाई लगभग 182 मीटर की है।

निष्कर्ष

सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनकारियों एवं भारत की राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआती दौर के प्रमुख नेताओं में से एक थे जिन्होंने भारत को एक पूर्ण गणराज्य बनाने के स्वप्न को साकार किया।

आज भी सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारतीय नागरिकों द्वारा बहुत सम्मान से याद किया जाता है इतना ही नहीं वर्तमान समय में भारत में उनके नाम से विभिन्न प्रकार की संस्थाएं आज संचालित होते हैं।

इतना ही नहीं सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा जिससे स्टैचू आफ यूनिटी (Statue of Unity) के नाम से जाना जाता है यह विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक है।

आज इस लेख के माध्यम से हमने सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय के विषय में चर्चा की और उनके जीवन से संबंधित प्रत्येक तथ्यों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया आशा करता हूं कि यह लेख आपको पसंद आया होगा।

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