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आइये जानें कारगिल विजय दिवस का महत्व व इतिहास | Kargil Vijay Diwas History Facts hindi

कारगिल विजय दिवस की शुरुआत, कैसे हुई, कारगिल विजय दिवस क्यों मनाया जाता है? (Kargil Vijay Diwas History Facts hindi)

हमारे देश में वीरों को हमेशा ही सम्मान दिया जाता है। इसलिए वीरों के सम्मान में हम कारगिल विजय दिवस भी मनाते हैं। कारगिल युद्ध के समय जो भी सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे उनके लिए हम यह कारगिल विजय दिवस मनाते हैं।

कारगिल के युद्ध को ऑपरेशन विजय का नाम दिया गया था और इस ऑपरेशन विजय की सफलता के बाद से ही कारगिल विजय दिवस मनाया जाने लगा।

26 जुलाई को कारगिल दिवस आने वाला है इसलिए आज का यह लेख हम कारगिल विजय दिवस के लिए ही समर्पित कर रहे हैं। आज के इस लेख में हम आपको कारगिल विजय दिवस से संबंधित संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं। यदि आप भी इस दिन के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

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कारगिल विजय दिवस का महत्व व इतिहास (Kargil Vijay Diwas History Facts hindi)

कारगिल दिवस कब मनाया जाता है?

कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई को मनाया जाता है। 2022 में यह 23वाँ कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा। 22 साल पहले भारतीय सेना ने कारगिल में उन सभी भारतीय चौकियों पर फिर से कब्जा कर लिया था जिस पर पाकिस्तान की सेना ने कब्जा किया हुआ था।

26 जुलाई के दिन ही भारतीय सेना सभी चौकियों पर कब्जा करने में सफलता हासिल की थी इसलिए 26 जुलाई 1999 के दिन युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की याद में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

Kargil-Vijay-Diwas-2022

कारगिल विजय दिवस क्यों मनाया जाता है?

कारगिल विजय दिवस के द्वारा हम उन शहीदों को याद करते हैं जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपना बलिदान दिया था। साथ ही कारगिल विजय दिवस के दिन हम उन सैनिकों को श्रद्धांजलि भी देते हैं। हमारे कुल 200000 सैनिकों ने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया और सभी पाकिस्तानी सेनाओं को भारतीय सीमा से खदेड़ निकाला था और 26 जुलाई के दिन इस कारगिल युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी। इस दिन को याद रखने के लिए हम कारगिल विजय दिवस मनाते हैं।

कारगिल विजय दिवस का इतिहास

भारत-पाकिस्तान द्वारा तीन युद्ध (1947, 1965, 1971) लड़ने के बावजूद जम्मू-कश्मीर सीमा पर लगातार, घुसपैठ की कोशिश होती रहती थी। जिससे सीमावर्ती इलाकों में तनाव व युद्ध का माहौल बना रहता था। जिसके लियेे भारत सरकार ने आपसी बातचीत व शांति समझौते से सीमा पर शांति व्यवस्था कायम करने की बहुत सी कोशिशे की।

1999 कारगिल युद्ध से 1 साल पहले भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही परमाणु परीक्षण किए गए थे जिससे कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर लड़ाई का माहौल बन गया था।

1998 में श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार बनी हुई थी और अटल जी शांत स्वभाव के व्यत्तिफ़ थे इसलिए वह पाकिस्तान के साथ दोस्ती करना चाहते थे। लेकिन यह बात पाकिस्तानी सेना के प्रमुऽ आर्मी चीफ परवेज मुशर्रफ को पसंद नहीं आई।

जहां एक और अटल बिहारी जी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के प्रमुऽ परवेज मुशर्रफ भारत में घुसपैठ करने की योजना बना रहे थे।

पाकिस्तानी ने इस घुसपैठ को “ऑपरेशन बद्र” का नाम दिया था क्योंकि वह लद्दाख और कश्मीर के बीच की कड़ी तोड़ना चाहते थे। भारत में जब अटल जी को इस घुसपैठ के बारे में पता चला तो वह स्तब्ध रह गए थे क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था।

लेकिन वह यह नहीं जानते थे कि इस घुसपैठ में नवाज शरीफ का कोई हाथ नहीं है। पाकिस्तानी सेना ने चुपके से उन सभी चौकियों पर कब्जा किया था जिन चौकियों को भारतीय सेना सर्दियों के मौसम में छोड़ देती थी।

अटल जी ने घुसपैठ के बारे में सुनते ही “ऑपरेशन विजय” की घोषणा की। ऑपरेशन विजय में 2 लाख भारतीय सैनिकों ने हिस्सा लिया था। ऑपरेशन विजय का यह कारगिल युद्ध 60 दिनों तक चला था और 26 जुलाई 1999 को यह युद्ध खत्म हुआ था।

भारतीय सैनिकों द्वारा या युद्ध पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर जाकर लड़ा गया था और इसमें कुल 550 सैनिक शहीद हुए थे और 1400 सैनिक घायल हुए थे। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा ने काफी बहादुरी दिखाई थी और “यह दिल मांगे मोर” कहते हुए सभी पाकिस्तानी सेनाओं को खदेड़ दिया था।

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कारगिल विजय दिवस कैसे मनाया जाता है?

जैसा कि हमने आपको बताया कारगिल विजय दिवस 60 दिनों तक चला था और 26 जुलाई को खत्म हुआ था। यह विजय दिवस हम सैनिकों को याद करके मनाते हैं। देश के वीर जवान व पराक्रमी सैनिकों को उनकी शहादत के लिये नमन करते हुये उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
हर वर्ष कारगिल के क्षेत्र में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है इसके साथ नई दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री द्वारा इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते है।

नई दिल्ली में यह विजय दिवस इंडिया गेट के अमर जवान ज्योति स्थल पर मनाया जाता है जहां पर सभी शहीद हुये सभी सैनिकों के नाम भी लिखे गए हैं। इस वर्ष 20 जनवरी 2022 को नेशनल वॉर मेमोरियल, शाश्वत ज्योति का अनावरण किया गया है जहां पर 25,942 शहीदों के नामों को सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है।

कारगिल युद्ध के कुछ महत्वपूर्ण दिन (Important days of Kargil Vijay Diwas)

  • कारगिल युद्ध के समय हमारे सैनिकों ने कई दिनों तक लड़ाई की थी और इन दिनों उन्होंने कई बार विजय भी प्राप्त की। हम आपको नीचे कुछ महत्वपूर्ण दिनों के बारे में बताने जा रहे हैं जिस दिन को हमें जरूर याद करना चाहिए।
  • 3 मई 1999 : इस दिन भारतीय सेना को पता चला था कि पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में घुसपैठ कर लिया है और इसकी जानकारी भारतीय सेना को एक चरवाहे ने दी थी।
  • 5 मई 1999 : जब भारतीय टीम को यह घुसपैठ की जानकारी मिली तो भारतीय सेना पेट्रोलिंग पर निकली और वहां पर पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा पांच भारतीय सैनिक की मृत्यु कर दी गई।
  • 9 मई 1999 : 9 मई को पाकिस्तानियों ने गोलीबारी की जिसके कारण कारगिल में मौजूद भारतीय सेना का गोला बारूद का स्टोर नष्ट हो गया।
  • 10 मई 1999 : 10 मई को पहली बार भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को लद्दाख के प्रवेश द्वार, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में देखा था।
  • 26 मई 1999: इस दिन भारतीय वायु सेना को कार्यवाही करने के लिए आदेश दे दिया गया था।
  • 27 मई 1999 : इस दिन भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ mig-27 और mig-29 का इस्तेमाल किया था।
  • 15 जून 1999: इस दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने यूनाइटेड स्टेट के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को टेलीफोन के द्वारा कारगिल युद्ध को रोकने के लिए कहा। लेकिन बिल क्लिंटन ने उनकी यह बात मानने से इनकार कर दिया।
  • 4 जुलाई 1999: इस दिन भारतीय सेना कारगिल की सबसे ऊंची चोटी टाइगर हिल पर वापस कब्जा जमाने में सफल रही।
  • 26 जुलाई 1999: 26 जुलाई के दिन भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को पूर्ण रूप से कारगिल से खदेड़ दिया था और आधिकारिक तौर पर कारगिल युद्ध समाप्त हुआ था।

कारगिल लड़ाई क्षेत्र के बारे में कुछ जानकारी

कारगिल लड़ाई क्षेत्र श्रीनगर से कुछ दूरी पर है कारगिल एलओसी की उत्तर दिशा में है जो श्रीनगर से 205 किलोमीटर दूर है। कारगिल एक पहाड़ी क्षेत्र है जहां पर गर्मियों के मौसम में भी काफी ठंड होती है और रात में बर्फ भी गिरती है यहां का मौसम अक्सर – 48 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।

इसी कारण भारतीय सेना सर्दियों के मौसम में कारगिल क्षेत्र में उपस्थित कुछ भारतीय चौकियों को छोड़ देती थी। पाकिस्तान में इस कार्द्दू नामक एक टाउन है जहां से कारगिल लड़ाई क्षेत्र 173 किलोमीटर दूर है इसीलिए भारतीय सेनाओं द्वारा कारगिल क्षेत्र पर कब्जा किया गया था क्योंकि उन्हें यहां से गोला बारूद का मुहैया कराने में काफी आसानी होती थी।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने आपको कारगिल विजय दिवस के बारे में जानकारी दी। उम्मीद है कि आपको कारगिल विजय दिवस से संबंधित संपूर्ण जानकारी मिल पाई होगी और आपको यह लेख भी पसंद आया होगा। यदि आपको आज का यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर साझा करें और उन्हें भी सैनिकों के बहादुरी से अवगत कराएं।

FAQ

कारगिल दिवस कब मनाया जाता है?

2022 में भी 26 जुलाई को 23 वा कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा।

कारगिल युद्ध के हीरो कौन थे?

कारगिल युद्ध के हीरो विक्रम बत्रा थे जिन्हें हम शेरशाह के नाम से भी जानते हैं। इन्होंने प्वाइंट 5140 को पाकिस्तानी कब्जे से छुड़वाया था।

कारगिल विजय दिवस किसकी स्मृति में मनाया जाता है?

कारगिल विजय दिवस कारगिल युद्ध में शहीद हुए 500 से भी ज्यादा सैनिकों की स्मृति में मनाया जाता है।

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