भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी । Freedom Fighters of India in hindi

हेलो दोस्तों आज के इस लेख में हम स्वतंत्रता सेनानियों (Freedom Fighters of India in hindi) के बारे में जानेंगे। जिन्होंने अपने प्राण की परवाह न करते हुए हमारे देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई। ऐसे स्वतंत्रता सेनानी जिनके बारे में हर एक भारत वासियों को जानना चाहिए। जैसा कि हम सब जानते हैं हमारा देश 15 अगस्त 1947 में आजाद हुआ था और इस आजादी पर हम सभी भारतवासियों को नाज है। 15 अगस्त वो दिन है जिस दिन बच्चे अपने स्कूल में झण्डा फहराया करते हैं, देशभक्ति के गीत गाते हैं और इन महान हस्तियों को याद करके श्रद्धांजलि देते हैं।

भारत के स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighters of India in hindi)

आज के इस लेख पर हम ऐसे से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे जिन्होंने अकेले अपने दम पर अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी थी और अंत में देश को अंग्रेजी मुल्क से आजादी दिलाई। तो चलिए जानते हैं भारत मां के ऐसे जवान शहीदों के बारे में जो अपने देश के लिए (हमारे लिए) अपनी जान न्योछावर कर दिए।

1. रानी लक्ष्मी बाई (Rani Laxmi Bai)

झांसी की रानी नाम से मशहूर रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 1828 में बनारस (काशी) के ब्रहाम्ण मराठी परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम मणिकर्णिका था उन्हें बचपन में प्यार से मनु कहकर पुकारते थे। देश को आजादी दिलाने के लिए झांसी की रानी का सहयोग बहुत ही बड़ा था। इनका विवाह सन् 1842 मे हुआ था।

‘‘झांसी की रानी’’ की उपाधि कैसे मिली:-

रानी लक्ष्मी बाई जब बड़ी हुई तो उस समय ब्रिटिश इंडिया के गर्वनर डलहौजी था। उसने सारी रियासतों में ऐलान कर दिया था कि जिस राज्य का राजा जीवित नहीं होगा। वहां पर अंग्रेजो का शासन चलेगा। इस समय रानी लक्ष्मी बाई विधवा थी और इन्होंने एक पुत्र को गोद भी लिया था जिसका नाम दामोदर था। अपनी झांसी को बचाने के लिए रानी लक्ष्मी बाई ने इनके खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। क्योंकि इनको अंग्रेजो के सामने झुकना मंजूर नहीं था। ये युद्ध 1858 में हुआ था जो 2 हफ्ते तक चला था और उन्होंने इसमें काफी संघर्ष किया था। हालांकि ये उस युद्ध को हार गई थी और ग्वालियर के लिए प्रस्थान किया था वहां पर इन्होंने फिर एक युयद्ध लड़ा था। अपने जीवन में इन्होंने इतने युद्ध लड़े की इनका नाम ‘‘झांसी की रानी’’ पड़ गया। ये भारत की वीर बेटियों मे से एक थी।

2. मंगल पांडेय (Mangal Pandey)

भारत को अंग्रेजो से आजादी दिलाने के लिए सबसे पहली नीव मंगल दिवाकर पाण्डेय ने ही रखी थी। जी हां इनका पूरा नाम मंगल दिवाकर पाण्डेय था। इनका जन्म 19 जुलाई सन् 1827 मे उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में हुआ था। 1857 में जो क्रांति छिड़ी थी वे इनकी देन थी। हालांकि इनकी क्रांति से आजादी तो नहीं मिल पाई थी पर आशा की छोटी सी किरण सबके हृदय में जग गई थी। मंगल पांडे जी ने एक ही लक्ष्य के साथ कार्य किया जिसमे हर कार्य भारत को आजादी दिलाने का था। वे भारत के ऐसे वीर सपूत थे जिन्होंने अकेले अपने दम पर ब्रिटिश अफसर के ऊपर हमला बोल दिया था। जिसके कारण उन ब्रिटिश दुष्टों ने उन्हें 8 अप्रैल सन् 1857 मे फांसी पर लटका दिया था।

3. चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad)

चंद्रशेखर आजाद जी का जन्म 23 जुलाई 1906 मे भाँवरा नामक गांव में हुआ था। इन्होंने भारत की आजादी के लिए नौजवानों कि सेना बनाई और उनके हृदय में देश भक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की। इनके पिता जी का नाम पंडित सीताराम तिवारी और इनकी माता का नाम जगरानी देवी था।

इनका एक नारा जो सबसे हट के था वो ये कि ‘जब तक एक क्रांतिकारी के हाथ में पिस्तौल है तब तक कोई आपको जिंदा नहीं पकड़ सकता था’ देश की आजादी मे चंद्रशेखर आजाद जी का बहुत बड़ा योगदान था। अंग्रेजो के हृदय में इनका खौफ बहुत ज्यादा था। लेकिन इनकी एक इच्छा ये थी कि चंद्रशेखर अंग्रेजो के हाथो नहीं मरना चाहते थे। इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली थी और शाहिद हो गए थे। इनकी मृत्यु सन् 27 फरवरी 1931 मे हुई थी।

सम्पूर्ण जीवन जीवन परिचय  महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय

4. भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh)

भगत सिंह जी का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले, बंगा पंजाब में हुआ था। भगत सिंह के रग-रग में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी। वह उस समय के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत्र थे एक आर्दश स्थापित करके गए। इनके पिता जी का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था। पूरे परिवार में ही देशभक्ति की लहर दौड़ती थी। इनके, दादाजी, पापाजी और चाचाजी सबने देश की आजादी मे भाग लिया था। इसलिए इनके सभी विचार बचपन से ही क्रांतिकारी थे और देश भत्तिफ़ की नीव बचपन में ही पड़ गई थी।

1919 में हुए जलियांवाला बाग कांड ने उन्हें अंदर से झकझोर कर रख दिया था कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और भारत की स्वाधीनता दिलाने के लिए नौजवान भारत सभा की नींव रखी।

23 मार्च 1931 को उन्हें और उनके दो क्रांतिकारी साथियों (राजगुरु और सुखदेव) को फांसी दे दी गई।  केवल 23 वर्ष की छोटी सी आयु में बहुत बड़े-बड़े कार्य करते हुए उन्होंने हंसते-हंसते देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्रांण न्यौछावर कर दिये।

5. सुभाषचंद्र बोस (Subhash Chandra Boss)

नेताजी के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म सन् 23 जनवरी 1897 मे उड़ीसा में हुआ था। इन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आजाद हिन्द फौज नामक संस्था का गठन किया। इसके अलावा इन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए आईसीएस की नौकरी का त्याग कर दिया था। ये विचारो से काफी उग्र थे और गांधीजी के अहिंसा आंदोलन के खिलाफ रहते थे इसी वजह से हिटलर से सहायता मांगने जर्मनी भी गए थे।

इनके उग्र विचारो के चलते ब्रिटिश सरकार ने कई बार इनको जेल में भी डाला था पर नेताजी के परम उद्देश्य से वे लोग उन्हें विमुख नहीं कर पाए। इसके अलावा पूर्व में ये 1919 मे पढ़ाई के विदेश चले गए थे। तब वहां पर उनको जलियांवाला बाग हत्याकांड का पता चला जिसके चलते 1921 में वापस भारत आ गए और भारतीय कांग्रेस ज्वाइन की। ऐसा माना जाता है 17 अगस्त सन् 1945 में इनकी मृत्यु एक प्लान क्रैश मे हुई थी।

6. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi)

महात्मा गांधी जो पूरे भारत के लिए राष्ट्रपिता और बच्चो के लिए बापू के नाम से प्रसिद्ध है। महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ था। बापूजी के महान कार्यों के कारण ही हमारा देश आजादी की नई बुनियाद कायम कर पाया था। उनके बलिदान को कोई भी भारतवासी कभी नहीं भूल पाएगा। इन्होंने अपने जीवन में हमेशा सत्य और अहिंसा का ही पालन किया था। अहिंसा को ही अपना हथियार बनाकर बापू ने कई सारे आंदोलन लड़े थे और ब्रिटिश शासकों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था और उन्होंने 15 अगस्त सन् 1947 मे भारत देश छोड़ दिया था।

बापूजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। पिताजी का नाम करमचंद गांधी और माता जी का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी जी अपने जीवन में केवल स्वतंत्रता के लिए ही मशहूर नहीं थे अपितु इन्होंने अपने जीवन में लेखकी, पत्रकार, और समाज सुधारक का कार्य भी कुशलता से किया है। 30 जनवरी सन् 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

7. जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)

जवाहर लाल नेहरू जी हमारे स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे और इनको बच्चो से बहुत स्नेह था। इसलिए इनका जन्म दिन हर बच्चो के लिए समर्पित है जिसको हर कोई चिल्ड्रेन डे (बाल दिवस) के रूप में मनाते है। जवाहरलाल  नेहरू भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भी थे।

इनका जन्म 14 नवंबर 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। महात्मा गांधी जी से प्रेरित होकर व उनके संपर्क में आने से इनके मन में देश को स्वतंत्र करवाने की तीव्र इच्छा जागृत हुई और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इन्होंने भी भाग ले लिया और उनके साथ मिलकर ब्रिटिश के खिलाफ खड़े रहे। इनकी आखरी इच्छा थी कि इनके मारने के बाद इनकी अस्थियां इलाहाबाद के संगम में विसर्जित कर दी जाएं। और इनका निधन 27 मई 1964 मे दिल्ली में हुआ था।

8. लाल बहादुर शास्त्री जी (Lal Bahadur Shastri)

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में वाराणसी (काशी) के नजदीक, मुगलसराय, यूपी में हुआ था। शास्त्री जी आजाद भारत के द्वितीय प्रधानमत्रीं भी बने। काशी विद्यापीठ से उन्हें शास्त्री की उपाधि मिली।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सभी प्रमुख आंदोलनों असहयोग आंदोलन(सन 1921), दांढ़ी मार्च (सन 1930), भारत छोड़ो आंदोलनों(1942) में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वह गांधीवादी विचारधारा से बहुत प्रभावित थे। आजादी की लड़ाई में वह कई बार जेल भी गये। इसके चलते उन्होंने अंग्रेजो के लिये भारत छो़डो, भारतवर्ष के देशभक्तों के लिये ‘करो या मरो’ व ‘मरो नहीं मारों’ का नारा दिया था और एक आजादी की क्रांतिकारी ज्वाला भी जला दी थी। उनका निधन दिल का दौरा पड़ने की वजह से 11 जनवरी 1966 को उनका निधन हो गया।

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9. सरदार बल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel)

इनको भारत के लौह-पुरुष के नाम से जाने जाते थे। इन्होंने भारत की 600 रियासतों को एक सूत्र में जोड़कर भारत में मिलाने का कारनामा कर दिखाया था। इन्होंने अपनी सूझबूझ और कुशार्ग बुद्धि के बलबूते सभी रियासतों के सरदारों को मना लिया था। 31 अक्टूबर 1875 को उनका जन्म गुजरात के खेड़ो जिले में हुआ। वह पेशे से वकील थे। वह गांधी जी के अंहिसा की नीति से बहुत प्रभावित थे। स्वतंत्रता के सभी आंदालनों जैसे भारत छोड़ों आंदोलन, दांडी मार्च, स्वराज व असहयोग आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के पश्चात सरदार बल्लभ भाई पटेल भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और प्रथम गृहमंत्री बनेे। इनका निधन 15 दिसंबर 1950 का दिल का दौरा पड़ने से हो गया।

10. लाला लाजपत राय जी (Lala Lajpat Rai)

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के तीन महान नायकों की त्रिमूर्ति लाल-बाल-पाल के प्रमुख नायक थे। उनका जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के धुड़ी गांव में हुआ था। उन्हें पंजाब केसरी के नाम से भी जाना जाता था। उन्होनं अपना पूरा जीवन देश के आजादी के लिए समर्पित कर दिया था। इनमें नेतृत्व शक्ति गजब की थी इनके भाषणों में बहुत ही प्रभावशाली शक्ति थी।

जलियावाला बाग कांड के बाद उन्हें बहुत ही धक्का लगा था इसके बाद उन्होनें साइमन कमीशन का घोर विरोध प्रर्दशन किया इसमें वह बुरी तरह घायल हो गए और इसके बाद 17 मई 1928 लाहौर में उनकी मृत्यु हो गई।

11. बाल गंगाधर तिलक (Bal Ganga Dhar Tilak)

आधुनिक भारत के निर्माण और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अहम भूमिका थी। स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है यह नारा उन्होंने ही दिया था उनके भाषण के यह शब्द बहुत लोकप्रिय हुये। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सिपाही थे।

बाल गंगाधर तिलक जी का जन्म एक ब्रहाम्ण परिवार में 23 जुलाई 1856 के दिन रत्नागिरी जिले में स्थित गांव चिखली, महाराष्ट्र में हुआ। पूर्ण स्वराज की मांग उनके द्वारा ही की गई थी उनके इस नारे ने अंग्रेजों की नींद उड़ा रखी थी। तिलक जी गरम दल के नेता थे। लाल-बाल-पाल में लाला लाजपत राय, विपिन चन्द्रपाल और बालगंगाधर तिलक प्रमुख नेता थे।

भारतवासी प्यार से उन्हें ‘लोकमान्य तिलक’ के नाम से पुकारते थे। जिसका अर्थ है समाज के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति। उनकी मृत्यु 1 अगस्त 1920 मुम्बई में हुई।

12. विपिन चन्द्र पाल (Vipin Chandra Pal)

भारत के प्रमुख क्रांतिकारियो में इनका प्रमुख स्थान था वह लाल-बाल-पाल में प्रमुख थे। विपिन चन्द्र पाल जी का जन्म 7 नवंबर 1858 हबीबगंज (बंगलादेश वाले क्षेत्र) में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र पाल फारसी के विद्वान व एक जंमीदार थे। यह उन महान विभूतियों में एक है जिन्होंने आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। 1905 में बंगाल विभाजन के खिलाफ उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में बहुत बड़ा योगदान था। उन्हें क्रांतिकारी विचारों का जनक कहां जाता है। वह एक शिक्षक, लेखक और समाजसुधारक व पत्रकार थे। वह जातिवाद, सामाजिक कुरीतियों, रुढ़िवादिता के घोर विरोधी थे। 20 मई 1932 को इस महान क्रांतिकारी का कलकत्ता में निधन हो गया।

आज के इस लेख में हमने स्वतंत्रता सेनानियों (Freedom Fighters of India in hindi) के बारे में जाना की उन्होंने कैसे अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। हमे हमेशा स्वतंत्रता सेनानियों पर गर्व रहेगा। हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा। पसंद आया हो तो इसे अपने मित्रो व सगे संबंधियों के साथ अवश्य शेयर करें।

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