विश्व ओज़ोन दिवस का इतिहास और महत्व | World Ozone Day hindi

आज के लेख में हम एक ऐसी निर्जीव रक्षा कवच के बारे में बात करेंगे जिसके कारण तकरीबन 7 अरब इंसानों और खरबों दूसरे जीवो की जिंदगी चल रही है। यदि वह रक्षा कवच ना हो तो आज के समय में धरती पर जीवन तुरंत ही समाप्त हो जाए। इंसान ने रक्षा कवच के बारे में 1839 में पता लगाया था और तब से लेकर आज तक हमें इस की महत्वता के बारे में पता चला है। हमने इस रक्षा कवच को शिक्षित करने की संकल्प लिया है।

यह केवल कुछ लोगों का रक्षा कवच नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी का रक्षा कवच है, जी हां! हम बात कर रहे हैं ओजोन परत (Ozone Layer in hindi) की।

यह जीवन को  चलते रहने में सहायता करती है ओजोन परत के कारण सूर्य से निकली पराबैगनी किरणे मानव को नुकसान नहीं पहुंचा पाती और और ओजोन परत के कारण ही पेड़ पौधे फलते-फूलते होते हैं, इंसान जीते हैं और जानवर अपना जीवनयापन करते हैं।

आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि ओजोन लेयर की खोज कब की गई, किसने करी और विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day hindi) के बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे कि, यह किस प्रकार प्रोक्लेम किया गया और इसकी प्रक्रिया क्या थी। ओजोन परत के बारे में सारी जानकारी देने का प्रयास करेंगे।

विश्व ओज़ोन दिवस की पूरी जानकारी, इतिहास, निबंध (Full information about ozone day hindi)

ओजोन परत क्या है? (Ozone Layer in hindi)

ओजोन परत हमारी पृथ्वी का एक रक्षा कवच है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी के जल जीवन की रक्षा करता है। ओजोन परत, सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों अर्थात अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन को 97% तक सोख लेता है और बाकी बची 3% किरणें पृथ्वी के अंदर आ जाती हैं और पृथ्वी के वातावरण में घुल मिल जाती है। लेकिन यह 3% इतना ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाती क्योंकि  पृथ्वी के अंदर और भी कई ऐसी गैसे हैं जो इन पराबैंगनी किरणों को इनकी सीमा पर ही नष्ट कर देती है।

लेकिन यदि वे 97% पराबैगनी किरणे भी हमारे आंतरिक वातावरण में प्रवेश कर जाए तो पृथ्वी पर का जीवन का सर्वनाश निश्चित है और इस पर यह ओजोन परत पूरी पृथ्वी पर जन जीवन की रक्षा करने में सबसे बड़ा योगदान निभाती है।

ओजोन परत कैसे बनी?

ओजोन परत का निर्माण बिल्कुल शुरू में नहीं हुआ था। लेकिन जब पृथ्वी पर पानी के कारण बनी भाप से  ऑक्सीजन के भारी कण जब पृथ्वी के ऊपर भाग अर्थात 15 से 35 किलोमीटर ऊपर उठकर  सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से टकराए तो उनसे ओजोन के कणों का निर्माण हुआ। और जब यह बड़ी भारी मात्रा में होने लगा, क्योंकि उस समय पृथ्वी पर समुद्र भी बन रहे थे तो इस कारण सूर्य की किरणों के कारण भाप का बनना  आश्चर्यजनक नहीं था। 

लेकिन जब पृथ्वी का निर्माण हुआ था उस समय ओजोन परत  विद्यमान नहीं थी। इसलिए सॉरी के सारी पूरा देखने के लिए तेज गति से  समुद्र के पानी को सुखारे की ओर  वह पानी बहुत बड़ी मात्रा में ऊपर उठकर के  सूर्य की पराबैंगनी किरणों से टकराकर ओजोन के कणों का भारी मात्रा में निर्माण कर रही थी।

इस प्रकार पूरी पृथ्वी पर यह प्रक्रिया चलती रही और मात्रा  दो से तीन लाख वर्षों में पूरी पृथ्वी पर ओजोन परत की एक बहुत बड़ी संरचना तैयार हो गई। यह ओजोन परत तकरीबन ढाई सौ से तीन सौ करोड़ साल पुरानी हो सकती है। और हो सकता है कि यह इससे भी ज्यादा पुरानी हो।

ओजोन की खोज किसने करी?

आधुनिक युग में ओजोन परत की खोज एक जर्मन वैज्ञानिक 1839 में करी थी। उस वैज्ञानिक का नाम क्रिस्चियन  फ्रेडरिक  शानावीन था। शानावीन को विज्ञान के क्षेत्र में रसायनों के साथ खेलना बड़ा पसंद था।  वह एक टीचर भी था।

सन 1839 में जब वे अपनी लेब में काम कर रहे थे तो  इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का  ऑक्सीजन के साथ में  रिएक्शन करवाते समय  बने ओजोन के कणों को उन्होंने पहचाना और जब बड़ी भारी भारी मात्रा में  ओजोन  के  अणु बनने लगे तो उन्होंने यह है देखा कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की किरणें उन सभी ओजोन के अणुओं को पार नहीं कर पा रही है और शानावीन ने पृथ्वी के ऊपरी भाग पर अर्थात तक धरातल  15 से 35 किलोमीटर ऊपरी सतह पर एक ऐसे क्षेत्र के बारे में बताया जहां ओजोन बड़ी भारी मात्रा में उपस्थित है। इस प्रकार ओजोन गैस की खोज हुई।

ओज़ोन दिवस का उद्देश्य, इतिहास और महत्व (World Ozone Day History)

विश्व ओजोन दिवस कब मनाया जाता है?

यूनाइटेड नेशन के प्रोक्लेमेशन के बाद में 16 सितंबर को पूरे विश्व में इंटरनेशनल डे फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ़ ओजोन लेयर मनाया जाता है, अर्थात ओजोन दिवस मनाया जाता है। जिसमें पूरे विश्व में ओजोन परत के संरक्षण के विभिन्न प्रकार के मापदंड अपनाए जाते हैं और उन्हें अपने जीवनशैली में डालकर के ओजोन परत की रक्षा को पृथ्वी के भीतरी सतह से रक्षित करने का लक्ष्य साधा जाता है।

विश्व ओजोन दिवस क्यों मनाया जाता है? 

पृथ्वी पर अब तक 7 अरब की मानव जनसंख्या हो चुकी है। हो सकता है कि आज के समय में जनसंख्या 7 अरब के आंकड़े को पार कर चुकी हो। सब लोगों को अपने जीवन जीने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है जिसमें व्यक्ति विभिन्न प्रकार के संसाधन और उपकरणों को काम में लेता है।

विज्ञान का प्रसार और इसकी उपयोगिता मानव जीवन को सहज भी बनाती हैं और प्रकृति को कहीं ना कहीं नुकसान ही पहुंचाती है। इसी प्रकार  जब  मानव विभिन्न प्रकार के संसाधनों के कारण  कुछ ऐसी गैस का उत्सर्जन करते हैं जिसके द्वारा  पृथ्वी के अंदर से ओजोन परत का क्षरण होता है,  तो  ओजोन परत कमजोर पड़ती है और सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर सीधे तौर पर आती है, जिन्हें रोकने वाला कोई भी नहीं होता और यदि लगातार ऐसा होता रहा तो वह दिन दूर नहीं होगा जब सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर सीधे तौर पर आएंगी। मानव जीवन के सहित हर प्रकार के जनजीवन का सर्वनाश कर देगी।

बस यही  जानकारी और अवेयरनेस फैलाने के लिए हर वर्ष 16 सितंबर को ओजोन दिवस मनाया जाता है। ओजोन दिवस पिछले 35 वर्षों से हम मना रहे हैं।

विश्व ओजोन दिवस की घोषणा कब हुई?

सन 1994 में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 16 सितंबर को पूरे मानव जाति को एक दिन प्रदान किया, जब वह पृथ्वी की रक्षा के लिए इंसान अपने प्रयासों के तौर पर ओजोन परत की रक्षा में कदम उठा सकते हैं। और इसका प्रचार कर सकते हैं। विश्व ओजोन दिवस की घोषणा सन 1994 यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली के प्रोक्लेमेशन के बाद करी गई।

विश्व ओजोन दिवस की घोषणा कैसे हुई?

22 मार्च 1985 को ओजोन लेयर के प्रोटेक्शन के लिए वियना कन्वेंशन लाया गया। वियना कन्वेंशन के बाद में “मोंट्रियल प्रोटोकोल ऑन सब्सटेंस देट डिप्लीट ओजोन लेयर” के बारे में सितंबर 1987 को एक ड्राफ्ट तैयार किया गया और ठीक इसके बाद में उसे ड्राफ्ट पर 28 देशों ने अपनी मुहर लगाते हुए सन् 1994 को यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 16 सितंबर को ओजोन लेयर के सुरक्षा हेतु एक इंटरनेशनल दिन मुकर्रर किया। यह कार्य आज से 35 साल पहले संपन्न हुआ था।

ओजोन परत को किससे खतरा है?

मानव के द्वारा निर्मित बहुत सारे ऐसे रसायन होते हैं। जो ओजोन परत को बहुत ही बुरी तरह से क्षति पहुंचाते हैं। सबसे ज्यादा इनमें हेलोकार्बन के केमिकल होते हैं जो ऐसा कर के नुकसान पहुंचाते हैं हेलो कार्बन के अंतर्गत क्लोरीन फ्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन के परमाणु जब हेलोकार्बन के साथ मिल जाते हैं तब वे एक ऐसा संयोग बनाते हैं जो ओजोन परत को सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाते हैं।

जब हेलो कार्बंस ब्रोमीन को सुरक्षित रखते हुए ओजोन परत से जा करके टकराता है तो वह ओजोन परत में सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाता है। क्योंकि हेलोकार्बन में क्लोरीन की मात्रा में भी बहुत ज्यादा होती है।

इन सबके अलावा क्लोरीन व ब्रोमीन मिलकर के ओजोन परत के क्षति में अपना योगदान निभाते हैं। और मिथाइल ब्रोमाइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड और इसके परिवार के सदस्य हेलोन कहलाते हैं। वह सभी ओजोन परत के क्षति मैं अपना योगदान देते हैं। इनके अलावा क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन भी ओजोन परत को सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाते हैं। यह सारे के सारे केमिकल मानव निर्मित केमिकल है जिन्हें मानव ने अपनी सुविधा के अनुसार बनाए हैं।

ओजोन परत के बचाव में हमारे द्वारा किए जाने वाले योगदान

एक सामान्य शहरी के तौर पर आप ओजोन लेयर को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि आप भी ओजोन लेयर के प्रति समर्पण भाव रखते हैं तो आपको

• उन सभी प्रकार की गैसों से दूर रहना चाहिए जो ओजोन लेयर को क्षति पहुंचाती है।

• उन सभी वाहनों से दूर रहना चाहिए जो पेट्रोल या डीजल पर चलती है।

• आपको उन सभी क्लीनिंग प्रोडक्ट्स से दूर रहना चाहिए जो किसी न किसी प्रकार से वातावरण को दूषित या हानि पहुंचाते हैं।

• आपको सामान्य तौर पर लोकल प्रोडक्ट खरीदने चाहिए। 

• आपको अपने A.C. अर्थात एयर कंडीशनर को भी समय-समय पर मेंटेन रखना चाहिए

2021 में ओज़ोन दिवस की थीम

हर साल मानव को ओज़ोन परत के संरक्षण के प्रति जागरूकता दिखाने के लिए एक
dedicated थीम जारी की जाती है। परन्तु 2021 की थीम अभी तक जारी नहीं की गई है। जैसे ही ये जारी कर दी जाएगी हम अपने लेख में अवश्य अपडेट करेंगे।

आज के इस लेख में हमने ओज़ोन डे (World Ozone Day hindi) से संबंधित हर छोटे बड़े पहलुओं पर चर्चा करी है। हम उम्मीद करते हैं आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा यदि पसंद आया हो। तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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