डॉ. विक्रम साराभाई का जीवन परिचय | Vikram Sarabhai Biography in hindi

आज के लेख में हम एक ऐसे महान व्यक्तित्व (Vikram Sarabhai Biography in hindi) के बारे में जानेंगे, जिन्होंने सबसे पहले अंतरिक्ष विज्ञान के महत्व को समझा और जो आज हम भारत के स्पेस प्रोग्रामों का मौजूदा स्वरुप देख रहें वह उनके प्रयासों का ही परिणाम है। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान का जनक ऐसे ही नहीं कहा जाता है। उनके अथक प्रयासों के कारण ही आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केेंद्र की नीव रखी गई थी। हरिकोटा में स्थित रॉकेट प्रक्षेपण केन्द्र, अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र विक्रम साराभाईं की देन है।

इनका जन्म 12 अगस्त सन् 1919 को अहमदाबाद में हुआ था। मात्र 52 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई थी, लेकिन उन्होंने अपने इस छोटे से जीवनकाल में भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था। उनके महान प्रयासो के कारण ही आज भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) का नाम विश्व की अग्रणी (TOP 5) अंतरिक्ष एजेंसियों में स्थान रखता है।

आज हम बात कर रहे हैं विक्रम साराभाई जी का उनका पूरा नाम विक्रम अंबालाल साराभाई था। वह एक महान भारतीय भौतिकशास्त्री थे। विक्रम साराभाई एक ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिनके बारे में भारत की युवा पीढ़ी को पता होना चाहिए। कुछ ही लोग इस महान व्यक्तित्व बारे में जानते हैं। आज की लेख में हम आपको बताएंगे कि, विक्रम साराभाई मूल रूप से कौन थे? उन्होंने अपने जीवन में क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की? उनका Indian Space Research Program और Nuclear Power Agenda में क्या योगदान था? उनको कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं? उन्हें और किन नामों से जाना जाता है, आज के लेख में हम विक्रम साराभाई के जीवन के बारे में (Vikram Sarabhai Biography in hindi) पूरी जानकारी देंगे-

इन सब के बारे में आज के लेख में हम आपको जानकारी देंगे। और अंत में हम आपको बताएंगे कि विक्रम साराभाई के ऊपर आई हुई एक Web Series जिसका नाम Rocket Boys है, वह किस प्रकार की Web Series है। और क्या आपको उसे देखना चाहिए या नहीं? उसका एक authentic Review आज के लेख में हम आपको बताएंगे।

Vikram Sarabhai Biography in hindi

डॉ. विक्रम साराभाई का जीवन परिचय (Vikram Sarabhai Biography in hindi)

विक्रम साराभाई जी का शुरुआती जीवन

विक्रम साराभाई के पिता का नाम अंबालाल साराभाई था। गुजरात के अहमदाबाद में साराभाई परिवार बहुत ही समृद्ध, सम्पन्न और प्रसिद्ध था। साराभाई परिवार उस समय राष्ट्रप्रेम की भावना एवं स्वतंत्रता संग्राम से बहुत प्रभावित था। उनके यहां राष्ट्रवादी नेता एवं देश के प्रसिद्ध समाजसेवकों का आना-जाना लगा रहता था। रबिन्द्रनाथ टेगौर जैसे महान कवि उनके घर आया करते थे।

विक्रम साराभाई जी की माता का नाम सरला देवी था, और उनका जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत गुजरात में अहमदाबाद इंटरमीडिएट कॉलेज से की थी। इसके बाद में वह इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज में पढ़ाई करने के लिए चले गए थे।

सन 1937 में वह कैंब्रिज चले गए जहां उन्होंने सन् 1940 में ट्राइपोज में डिग्री प्राप्त की। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान वह भारत लौट आए और भारतीय विज्ञान केन्द्र बेंगलुरु में सीवी रमन जी के साथ काम करने लगे। जहां उन्होंने PhD करी और Cosmic Ray Investigation in Tropical Latitude के ऊपर विक्रम साराभाई ने प्रायोगिक रिसर्च की और उस पर एक थीसिस भी लिखा। जिसका उपयोग आज के समय भी स्पेस रिसर्च एजेंसीज करती है। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के पश्चात वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए और कॉस्मिक किरणों पर अनुसंधान करके 1947 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

विक्रम साराभाई का विवाह

नृत्यांगंना मृणलिनी के साथ 1942 में विक्रम साराभाई का विवाह हुआ उस समय भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था उनका परिवार राष्ट्रवादी विचारधारा के चलते उनके विवाह में शामिल नहीं हो सका था। उन्हें दो बच्चों का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्हे एक बेटा जिसका नाम कार्तिकेयन एवं एक बेटी मल्लिका था वह एक नामचीन एक्ट्रेस बनी, और उनके पुत्र कार्तिकेय विज्ञान के क्षेत्र में एक्टिव रूप से भूमिका निभाई।

विक्रम साराभाई का प्रोफेशनल जीवन

सन 1947 में विक्रम साराभाई के द्वारा Physics Research Laboratory की स्थापना करी गई थी जिसे Space Science की गोद भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस laboratory की शुरुआत विक्रम साराभाई ने अपने घर से ही करी थी, जहां पर भी Cosmic Rays के ऊपर रिसर्च करते थे।

इसके बाद में 11 नवंबर सन 1947 को अहमदाबाद में MG Science Institute की स्थापना करी गई जिसके लिए Karmakshetra Educational Foundation की मदद ली गई थी। और अहमदाबाद एजुकेशन सोसाइटी के प्रोफेसर कालापति रामकृष्ण रामनाथन ने इस इंस्टिट्यूट के सबसे पहले डायरेक्टर की भूमिका निभाई थी।

इंस्टिट्यूट का मुख्य उद्देश्य सबसे पहले Cosmic Rays के ऊपर research करना था, तथा पृथ्वी के Upper Atmosphere के बारे में भी Research करना था।

इसके बाद में यह Research का दायरा बढ़ाया गया, जिससे Theoretical Physics और रेडियो फिजिक्स के ऊपर ग्रांट मिलने का काम पूरा हुआ।

इसके पश्चात उन्होंने ऑपरेशन रिसर्च ग्रुप जोकिभारत की पहली मार्केट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन थी उसकी स्थापना करी। उनके द्वारा स्थापित करी गई तथा यूनिवर्सिटीज को नेहरू फाऊंडेशन फॉर डेवलपमेंट की सहायता मिली। जिसकी वजह से अहमदाबाद में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM Ahmadabad) की स्थापना करी गई।

विक्रम साराभाई को Indian space Institute के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है।

Institute के साथ-साथ में उन्होंने Ahmadabad Textile Industry Research Association स्थापना भी करी और, उन्होंने अपनी पत्नी मृणालिनी साराभाई के साथ मिलकर के उन्होंने दर्पणा अकेडिमी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स की स्थापना भी करी।

विक्रम साराभाई जी के द्वारा Fast Breeder Test Reactor, काकलपक्कम में स्थापित किया गया। इसके बाद में उन्होंने कोलकाता में Variable Energy Cyclotron Project, उन्ही के द्वारा स्थापित किया गया। Electronics corporation of India LTD, हैदराबाद और Uranium Corporation of India Limited जादूगोड़ा, उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है।

इसी के साथ में उन्होंने एक ऐसा प्रोजेक्ट शुरू किया जो कि फेब्रिकेशन के साथ में जुड़ा हुआ था, और इसके लिए उन्हें Indian Satellite को लांच करना था। और इसके परिणाम स्वरूप भारत ने अपनी पहली इंडियन सेटेलाइट जिसे आर्यभट्टा के नाम से जाना जाता है, उसे 1975 में भारत के ऑर्बिट में उन्हीं के सुपरविजन में स्थापित किया गया, जिसके लिए रूस के कॉस्मोड्रोम नामक स्पेसक्राफ्ट की मदद ली गई। इसी के साथ-साथ वह Indian Space Research Organization (ISRO) के प्रथम अध्यक्ष, फाउंडर थे।

विक्रम साराभाई की मृत्यु

विक्रम साराभाई की मृत्यु बड़े ही रहस्यमई ढंग से हुई। 30 दिसंबर 1971 को रात्रि के समय जब विक्रम साराभाई मुंबई में SLV डिजाइन का रिव्यू करने जा रहे थे, हालांकि यह रिव्यू इस डिजाइन के डिपार्चर से ठीक पहले था, तो उसी रात उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम सभी टेलीफोन पर बात करी थी। लेकिन ठीक इसके 1 घंटे के बाद में ही 52 वर्ष की आयु में विक्रम साराभाई जी की मृत्यु एक दिल के दौरे से हो गयी।विक्रम साराभाई की मृत्यु त्रिवेंद्रम में हुई थी, जिसे आज के समय तिरुअनंतपुरम के नाम से जाना जाता है। और उनका अंतिम संस्कार अहमदाबाद में हुआ।

विक्रम साराभाई की उपाधियां और उनके पुरस्कार

विक्रम साराभाई ने Indian Science Congress के President के रूप में 1962 में भूमिका निभाई है। तथा International Agancy for Atomic Energy जो कि Vianna में थी उसके president के रूप में भी उन्होंने General Conference में अपनी भूमिका निभाई है।तथा वह Atomic Energy Commission of India के Chairman भी थे, और उनका कार्यकाल 1966 से 1971 तक था। तथा वे Peaceful use of Atomic Energy जो कि UN की चौथी कांफ्रेंस थी, उसके Vice President के रूप में भी में कार्यरत थे, तथा वे Space Application Center के फाउंडर और चेयरमैन भी थे।

उन्होंने अपने जीवन काल में काफी सारी संस्थाओं का संस्थापन भी किया, और उन्हें भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो का जनक भी माना जाता है।

विक्रम साराभाई जी को सन 1966 में पद्मभूषण और इसके बाद में सन 1972 में पद्म विभूषण जो कि उन्हें मरणोपरांत दिया गया।

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Rocket Boys का रिव्यू

Rocket Boys एक ऐसी Web Series है जिसे 4 फरवरी 2022 को लांच किया गया है। यह मूल रूप से हिंदी और अंग्रेजी भाषा में शुरुआती रूप से ट्रांसलेट करी गई है। लेकिन इसकी शूटिंग हिंदी में करी गई है।

किस बारे में है यह Web Series?

इस Web Series में डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा तथा विक्रम साराभाई के महान आविष्कारों के बारे में पूरे विस्तार से बताया गया है। इस Web Series में जिम सर्भ इस, इश्वक सिंह,सबा अहमद, रेजिना कैसैंड्रा, रजित कपूर, दिव्यांशु भट्टाचार्य, यह सभी कास्ट इस्तेमाल किया गया है। इसके क्रिएटर निखिल आडवाणी है, तथा डायरेक्टर का नाम अभय पन्नू है। और इस Web Series के कुल 8 एपिसोड है तथा हर एपिसोड तकरीबन 45 मिनट का है।

इस Web Series के पहले एपिसोड की शुरुआत में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री एपीजे अब्दुल कलाम जी की एक बात के साथ में हुई थी, और उस लाइन में उन्होंने कहा था कि, “बर्बाद गुलिस्तां करने को, बस एक ही उल्लू काफी है, हर शाख पर उल्लू बैठे हैं, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा?”

इस Web Series में बताया गया है कि किस प्रकार से होमी जहांगीर भाभा तथा विक्रम साराभाई ने मिलकर के कई ऐसे महान अविष्कारों को अंजाम दिया तथा भारत के पहले Atomic Reactor और Space research Program को स्थापित करने का भी सारा सीन इस Web Series में दिखाया गया है। यह Web Series हमारे महान इतिहास को एक चरितार्थ के रूप में प्रदर्शित करने का काम बेहतरीन तरीके से करती है।

इस Web Series में जिम सर्भ होमी जहांगीर बाबा का रोल निभा रहे हैं ,तथा ईश्वर सिंहविक्रम साराभाई का रोल निभा रहे हैं।

यह Web Series बहुत ही बड़े दर्जे पर लोगों के द्वारा पसंद करी जा रही है, क्योंकि इस Web Series में भारत के महान इतिहास को दिखाया गया है, औरयदि हम एक IMDB Rating की बात करें तो 9।5/10 की IMDB Rating इस Web Series को मिली है।

निष्कर्ष तो आज के लेख में हमने यह जाना किविक्रम साराभाई कौन थे, उनका जन्म कहां हुआ था, उन्होंने क्या-क्या काम किए थे, तथा उन्होंने कौन-कौन से अविष्कार किए थे। इन सब के बारे में आज के लेख में हमने जाना है। और आज के लेख में हमने Vikram Sarabhai Biography in hindi के बारे में जाना है, और इसी के साथ में हमने यह भी जाना कि उनकी आकस्मिक मृत्यु किस प्रकार से हुई, और उनके ऊपर एक बायोग्राफी के तौर पर आ चुकी Web Series के बारे में भी हमने आपको जानकारी दी। और एक In-depth review देने की कोशिश करी।

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