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नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि | Nag Panchami facts in hindi

नागपंचमी का महत्व, पौराणिक कथाएं, नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त, (Nag Panchami kyu manaya jata hai, importance and facts in hindi)

सावन माह का महीना भगवान शिव का अत्यधिक प्रिय महीना होता है। इस महीने में भोलेनाथ के गले में सुशोभित नाग देवता की पूजा का भी विशेष महत्व है। तो चलिए आज के इस लेख में हम आपको नागपंचमी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हैं। इसके अलावा इस लेख के माध्यम से हम आपको नाग पंचमी से जुड़ी हर प्रकार की जानकारी से अवगत करवाएंगे, इसीलिए आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

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आइये जानें- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व, इतिहास व पौराणिक कथा

विषय–सूची

नाग पंचमी क्या है? (Nag Panchami kya hai)

नाग पंचमी नाग देवता का त्यौहार होता है। नाग देवता भोलेनाथ के गले में सुसज्जित होते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि पूजा करने से सर्प दंश का डर भी दूर होता है और साथ ही सुख समृद्धि की प्राप्ति भी होती है।

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नाग पंचमी कब मनाई जाती है?

हर साल सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी बड़े धूम धाम से मनाई जाती है। नाग पंचमी इस वर्ष 2022 में यह 2 अगस्त के दिन हैं।

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नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

सावन का महीना शिव का प्रिय महीना होता है जो 14 जुलाई 2022 से शुरू हो गया है। नाग देवता भगवान शिव के गले में आभूषण की तरह हमेशा ही विराजमान रहते हैं, क्योंकि नाग देवता का संबंध शिवजी से है इसलिए सावन मे नाग पंचमी मनाई जाती है। श्रावण की पंचमी के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है दरहसल पंचमी तिथी का स्वामी नाग देवता को कहा गया है।

धाार्मिक मान्यता है नाग पंचमी के दिन सर्प पूजन कराने से कुण्डली में व्यात कालसर्प योग से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन सर्प पूजन करने से शिव भगवान एवं नाग देवता प्रसन्न हो जाते हैं घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

नाग पंचमी का महत्व एवं पौराणिक कथाएं

ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की विधि विधान व श्रद्धा भाव से पूजा करने से मनवांछित फल मिलते हैं और यदि इस दिन किसी को नागों के दर्शन हो जाते हैं तो यह बहुत शुभकारी माना जाता है। नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक ग्रंथो एवं वेदों (चरक संहिता, गरुण पुराण, शिव पुराण) में नाग पंचमी के महत्व का विस्तार से बताया है।

नाग पंचमी मनाने का पौराणिक महत्व कुछ इस प्रकार से है:-

1. समुद्र मंथन में वासुकी नाग देवता का योगदान

नाग देवता का आभार प्रकट करने के लिए भी नाग पंचमी मनाई जाती है, क्योंकि समुद्र मंथन के वक्त वासुकी नाग ने ही देवताओं की मदद की थी।

2. शेषनाग है विष्णु भगवान की शैया

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु अपनी शेषनाग की शैया पर पंचमी के दिन ही विराजित हुये थे। इसी दिन शेषनाग की शैया विष्णु जी ने विश्राम किया था।

3. वासुदेव और शेषनाग का संबंध

भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर, तेज़ आंधी तूफान के मौसम में, उफनती नदी को पार करवाने के लिए शेषनाग ने ही वासुदेव जी की मदद की थी।

4. शेषनाग के फन पर टिकी है धरती

ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और उस शेषनाग के शैया पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं।

5. जन्मजेय का नाग से बदला

जन्मजेय के पिता को तक्षक सांप ने मार डाला था इसीलिए अर्जुन के पोते जन्मजेय ने नागो से बदला लेने की ठानी और नाग के कुल को समाप्त करने के लिए नाग यज्ञ की व्यवस्था की। तब आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागो की रक्षा का आग्रह किया और तक्षक नाग ने भी जन्मजेय से माफी मांगी। इससे जन्मजेय का क्रोध शांत हुआ। यह सब घटना सावन महीने के शुक्ल पंचमी के दिन में घटित हुई। इसीलिए सांप के बचाव में इस दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है महत्व एवं कारण

नाग पंचमी बनाने के अन्य निम्न कारण है:-

कालसर्प दोष से मुक्ति

ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी पर की जाने वाली पूजा से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि भोलेनाथ सदैव अपने गले में वासुकी नाग को धारण किए हुए रहते हैं इसीलिए नाग पूजा करने से शिव भगवान को प्रसन्न किया जाता है।

सर्पदंश से भय की मुक्ति

बरसात के मौसम में सांप के बिलों में पानी भर जाता है जिसकी वजह से वह अपने स्थान को छोड़कर सुरक्षित स्थान खोजते हैं। इसीलिए भारतीय संस्कृति में सर्पदंश के भय से मुक्ति के लिए भी नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई है।

देश के प्रमुख नाग मंदिर

आइए, देश के कुछ प्रमुख नाग मंदिरो और उनके महत्व के बारे में जानते है:-

स्नेक टेंपल

स्नेक टेंपल केरल के अलप्पी जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। इस मंदिर में सांपों की हजारों प्रतिमाएं मौजूद है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर पूजा करने से निसंतान को संतान प्राप्ति होती है। यहां पर पूजा करने से उनकी मनोकामना शीघ्र ही पूर्ण हो जाती है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर

यह मंदिर उज्जैन में महाकाल मंदिर के परिसर में स्थित है। यह मंदिर साल में केवल नाग पंचमी वाले दिन ही खुलता है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर नाग देवता के दर्शन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के सर्प दोष दूर हो जाते हैं।

प्रयागराज

प्रयागराज मे नाग पंचमी के दिन भक्तों की बहुत भीड़ लगती है। यहां पर लोग विशेष रूप से कालसर्प दोष की पूजा करवाने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

नाग पंचमी पूजा विधि

आइए नाग पंचमी की पूजा की पूरी विधि आपको बताते हैं –

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • घर के मुख्य दरवाजे पर सांप के 8 आकृतियां बनाएं।
  • चावल, फूल, रोली, हल्दी आदि चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें।
  • नाग देवता को भोग लगा कर कथा अवश्य पढ़ें।
  • पूजा के बाद नाग देवता को कच्चे दूध में घी और चीनी मिलाकर जरूर अर्पित करें।

नाग पंचमी 2022 कब है?

सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 2 अगस्त को पड़ रही है। अतः इस वर्ष यानी साल 2022 में नाग पंचमी 2 अगस्त, मंगलवार को है।

नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त

नाग पंचमी तिथि मंगलवार, 2 अगस्त को सुबह 5:13 से शुरू होकर अगले दिन यानी बुधवार, 3 अगस्त को सुबह 5:41 तक रहेगी और नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त 2 अगस्त से सुबह 5:45 से आरंभ होकर 8:25 तक रहेगा।

नाग पंचमी के दिन जरूर करें यह कार्य

  • नाग पंचमी में पूजा करते समय मिठाई, दूध और फूल जरूर चढ़ाएं।
  • जिन लोगों के राहु और केतु ग्रह भारी है उन्हें नाग पंचमी के दिन पूजा अवश्य करनी चाहिए।
  • नाग देवता को केवल तांबे के लोटे से दूध चढ़ाएं।
  • पीतल के लोटे से नाग देवता को दूध बिल्कुल भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • सर्पदंश से बचने के लिए नाग पंचमी के दिन उपवास जरूर करना चाहिए।

ऐसे कार्य जो नाग पंचमी के दिन नहीं करने चाहिए।

  • किसानों को नाग पंचमी के दिन खेती नहीं करनी चाहिए।
  • पेड़ों को नहीं काटना चाहिए।
  • इस दिन सुई धागे का प्रयोग करना वर्जित होता है।
  • नाग पंचमी के दिन धार वाली और नुकीली चीजो का उपयोग नहीं करना चाहिए।
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FAQ

साल 2022 में नाग पंचमी कब है?

2 अगस्त, 2022

नाग पंचमी के दिन क्या ना करें?

पेड़ ना काटे, सुई धागे का प्रयोग ना करें, खेती का काम ना करें और धारदार वस्तुओं का उपयोग ना करें।

नाग पंचमी कब मनाई जाती है?

सावन महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को।

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