संस्कृत भाषा या संस्कृत दिवस का महत्व, इतिहास | World Sanskrit day 2022

विश्व संस्कृत दिवस 2022, क्यो मनाया जाता है? संस्कृत दिवस का महत्व व इतिहास (World sanskrit day 2022, history importance facts in hindi)

हम सब जानते हैं कि भारत में वेदों व उपनिषदों की भाषा संस्कृत ही है यह प्राचीन इतिहास की सबसें समृद्ध भाषा है।संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है क्योंकि संस्कृत भाषा से ही सभी भाषाओं की उत्पत्ति हुई है।

सबसे पहले भारत में संस्कृत भाषा ही बोली जाती थी संस्कृत भाषा से ही दूसरी भाषा को बोलने और सीखने में मदद मिलती है। यहां तक कि वेद, पुराण, महाभारत की रचना संस्कृत भाषा में ही की गई है। भारत के सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत भाषा में ही लिखे गए हैं।

विश्व संस्कृत दिवस का महत्व, इतिहास (World Sanskrit Day history facts in hindi)

संस्कृत दिवस को 1969 में पहली बार मनाया गया था। इस वर्ष यह दिवस ११ अगस्त को मनाया जाएगा। संस्कृत भाषा दिवस भारतीय नागरिकों को जागरूक करने के लिए मनाया गया। भारत की सभी भारतीय भाषाओं की मा संस्कृत  को माना गया है। लेकिन आजकल लोग इससे दूर हटते जा रहे है ऐसे में  सभी भारतीय नागरिकों को जागरूक करने के लिए संस्कृत भाषा दिवस मनाने का निर्णय लिया गया जिससे सभी भारतीय संस्कृत भाषा में शिक्षित हो और इसके महत्व को समझे और संस्कृत को बढ़ावा दे सकें क्योंकि भारतीय सांस्कृतिक विरासत में संस्कृत भाषा का बहुत बढ़ा योगदान है। संस्कृत भाषा हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है।

संस्कृत दिवस का महत्व | world-sanskrit-day-in-hindi

विश्व संस्कृत दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? इसकी शुरुआत कब हुई-

संस्कृत दिवस श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस संस्कृत भाषा को हमारी  देव भाषा कहा जाता है।

22 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाएगा। संस्कृत दिवस का दिन बहुत ही पावन और अनूठा माना गया है क्योंकि अन्य प्राचीन भाषाओं को राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार नहीं मनाया जाता जिस प्रकार संस्कृत दिवस मनाया जाता है।

हमारे यहां अधिकतर धार्मिक ग्रंथ, मंत्र , पाठ का अध्याय संस्कृत भाषा में ही होता है। इस समय संस्कृत भाषा अपना वजूद खोती जा रही है क्योंकि अब भारत में विदेशी भाषाओं और अंग्रेजी का महत्व बढ़ता ही जा रहा है जिसके आगे संस्कृत भाषा को भारत में कोई महत्व नही दे रहा।

इसी उद्देश्य से संस्कृत दिवस मनाया जाता है जिससे भारत के सभी नागरिक संस्कृत को अधिक महत्व दे। संस्कृत हमारी मातृभाषा है। संस्कृत भाषा के आदि स्रोत ऋषि मुनि को माना गया है इसलिए इसे ऋषि पर्व के नाम से भी जाना जाता है यह दिन ऋषि मुनियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

भारत सरकार द्वारा 1969 में शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार संस्कृत दिवस मनाया गया था। केंद्रीय तथा राज्य स्तर पर भारत में श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन इस दिवस को मनाया जाता है। प्राचीन भारत में इसी दिन विद्यार्थी शास्त्रों का अध्ययन प्रारंभ करते थे और वेद पाठ का शुभारंभ होता  है।

संस्कृत भाषा की उत्पत्ति (Origin of Sanskrit language)

संस्कृत इंडो-यूरोपीय भाषाओं में सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत भाषा में करीब 102 अरब 78 करोड़ 5 0लाख शब्दों की विश्व में सबसे बड़ी शब्दावली है।

आपको बता दे कि कर्नाटक के शिमोगा नाम के गांव में संस्कृत भाषा बहुत ही मशहूर है। यहां हर कोई संस्कृत भाषा में ही बात करता है और इसके अलावा उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को उत्तराखंड की अधिकारिक भाषा घोषित किया गया है। हमारे यहां भारतीय शास्त्रीय संगीत में संस्कृत भाषा का ही प्रयोग किया जाता है और कंप्यूटर की सबसे अनुकूल भाषा संस्कृत को माना गया है।

संस्कृत दिवस मनाने का उद्देश्य –

संस्कृत भाषा को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए और सभी भारती को जागरूक करने के लिए संस्कृत दिवस मनाया जाता है क्योंकि भारत के नई पीढ़ी के लोग इससे वंचित है। संस्कृत के प्रति उनका रुझान खत्म होता जा रहा है जबकि विदेशों और अन्य देशों में संस्कृत भाषा के प्रति लगाव बढ़ता ही जा रहा है।

जापान की कई यूनिवर्सिटी में संस्कृत में शिक्षा दी जाती है।

नई पीढ़ी के लोग संस्कृत भाषा बोलने और पढ़ने में शर्माते हैं और इसे बहुत ही पुरानी भाषा समझ कर इस पर कोई ध्यान नहीं देते आज के लोगों को संस्कृत भाषा बोलने तक नहीं आता और ना ही वह पढ़ना और बोलना चाहते हैं

 इसी सोच को बदलने के लिए नई पीढ़ी के लोगों को जागरूक करने के लिए संस्कृत दिवस मनाया जाता है और इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।

संस्कृत दिवस का इतिहास (Sanskrit day history and facts in hindi)

भारत की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत ही है इसकी उत्पत्ति 4,000 वर्ष पूर्व ही हो गई थी। हिंदू धर्म के धार्मिक ग्रंथ, मंत्रों का उच्चारण संस्कृत भाषा में ही किया गया है। इसके पश्चात भारत में उपनिषदों, वेद व पुराणों की रचना 1000 से 500 ईसापूर्व की समयावधि में संस्कृत में ही की गई थी। हमारे यहां प्राचीन समय से ही ऋषि मुनियों द्वारा संस्कृत भाषा का उपयोग किया जाता था। उन्हीं के द्वारा सभी वेद ग्रंथ का उच्चारण संस्कृत में हुआ है।

 इसी प्रकार कई पुराण, उपनिषद, महापुराण, वेद आदि संस्कृत में ही लिखे गए हैं।

भारत के 12 अनुसूचित की भाषाओं में संस्कृत भाषा को सूचीबद्ध किया गया।

संस्कृत भाषा का महत्व (Importance of Sanskrit language)

भारतीय संस्कृति के विरासत का प्रतीक संस्कृत भाषा को माना गया है। संस्कृत भाषा बहुत ही सुंदर भाषा है। संस्कृत भाषा के कारण ही विश्व में भारत का समृद्धशाली इतिहास रहा है। संस्कृत भाषा हमारे कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना गया है।

इतिहास में भारत के सबसे अधिक मूल्यवान और शिक्षा सामग्री शास्त्रीय संगीत आदि संस्कृत में लिखी गई है।

संस्कृत भाषा के अध्ययन से इतिहास के तथ्यों का ज्ञान मिलता है और संस्कृत भाषा से ही हमें धार्मिक, सांस्कृतिक तथ्यों के असंख्य रहस्य के बारे में जानने में मदद मिलती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार संस्कृत भाषा को हमारे यहां देववाणी भाषा कहा जाता है। संस्कृत भाषा से ही अन्य भाषाओं की उत्पत्ति हुई है आज के समय में विदेशों  में संस्कृत संस्कृत भाषा को अधिक महत्व और बढ़ावा दिया जा रहा है और लगातार इसपर रिसर्च चल रहे हैं।

संस्कृत भाषा भारत देश का गौरव है। एक नागरिक होने के नाते हमें इसे अधिक से अधिक बढ़ावा देना चाहिए। संस्कृत दिवस सावन मास मे पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है उसी दिन रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जाता है। भारत के अलावा अन्य देशों में भी कॉलेजों एवं स्कूलों में फॉरेन भाषा के तौर पर संस्कृत भाषा की मान्यता प्राप्त है जिसमें छात्र अपनी इच्छा के अनुसार एक भाषा संस्कृत का भी अध्ययन कर सकता है।

इन्हें भी पढ़े :-
1. फादर्स डे क्यों मनाया जाता है? महत्व व इतिहास
2. बुद्ध पूर्णिमा 2022 कब और क्यों मनाई जाती है?
3. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून दिन क्यों मनाया जाता है?
4. राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
5. विश्व पर्यावरण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है

आधुनिक युग में संस्कृत भाषा की महत्वता-

संस्कृत भाषा में वेद और उपनिषद लिखे ही नहीं गए थे बल्कि नवग्रहों, राहु, केतु, धूमकेतु का ज्ञान भी संस्कृत भाषा को था।

 संस्कृत भाषा में ही आयुर्वेद के चिकित्सा का रहस्य भी छुपा था। वेद में लिखे गए नौ गृह, दिन, मौसम,  आदि की जानकारी से प्रकृति की रचना और मौसम के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।

जर्मन के एक भाषा विद मैक्स मूलर ने भारतीय की पौराणिक कहानियों व किदवंदियों व कथाओं को जर्मन में अनुवाद किया है। इसके साथ-साथ उसने अपना नाम भी संस्कृत में मोक्ष मूलर भट्ट रखा। उसे संस्कृत के प्रति उसका इतना गहरा लगाव हो गया था की उसने अपना नाम संस्कृत में ही रख लिया। मोक्ष मूलम भट्ट ने कालिदास द्वारा रचित मेघदूत को जर्मनी भाषा में फेटल रिंग नाम दिया।

इसके अलावा भी उसने कई सारी धार्मिक ग्रंथों को अनुवादित कर प्रकाशित किया।

श्रीमद् भागवत गीता को विद्वान सर चार्ल्स ने अंग्रेजी भाषा में लिखा।

इसके अलावा  विलियम जान 1783 में ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर कोलकाता आए थे। यह एक अंग्रेजी भाषाविद, संस्कृत के विद्वान और एशियाई सोसाइटी में संस्थापक थे।

इन्होंने कालिदास जी द्वारा रचित ऋतुसंहार, शकुंतला, को अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया इसके अलावा मनुस्मृति, गीता गोविंद जयदेव द्वारा रचित कई ग्रंथ और पाठ को अंग्रेजी भाषा में ट्रांसलेट किया। भारत के अलावा संस्कृत भाषा कई देशों में प्रसिद्ध है और आज भी उसका अध्ययन  विद्यालयों में कराया जाता है।

Follow us on Google News image

Leave a Comment