विजय कुमार कार्णिक का जीवन परिचय | Vijay Kumar Karnik Biography & Bhuj Real story in hindi

आज हम हाल ही में रिलिज हुई फिल्म Bhuj the pride of India real story in hindi के ऊपर बात करेंगे और जानेंगे की कैसे एक भारतीय वायुसेना के एक वीर जवान स्क्वाड्रन चीफ विजय कुमार कार्णिक की सूझबूझ और वीरता के फलस्वरुप 1971 के भारत-पाक युद्ध का रुख भारत की और मोड़ दिया था। इस फिल्म में रियल लाइफ हीरो विजय कुमार कार्णिक का रोल अभिनेता अजय देवगन ने बखूबी निभाया है।

इस युद्ध में पाकिस्तान ने भुज एयरस्ट्रीप पर भारी बमबारी की ताकि भारत का कोई भी लडाकु विमान उड़ान न भर सकें, पर दुश्मन को क्या पता था कि इस हवाईपट्टी की बागडोर विजय कार्णिक के मजबूत हाथों में हैं।

विजय कुमार कार्णिक व भुज फिल्म की असली कहानी (Vijay Kumar Karnik Biography & Bhuj Real story in hindi)

3 दिसंबर का दिन कोई भी नहीं भूल सकता जब 1971 में पाकिस्तान ने भारत के हवाई अड्डे पर हमला बोला था वो भी अपने नापाक मकसद को अंजाम देने के लिए और उन्हे चोट पहुंचाने के लिए। इसी के परिणामस्वरूप भारत ने 4 दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी और भारतीय वायुसेना को ये आदेश दिया कि वे पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दें। पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन का नाम चंगेज खान दिया। काफी हद तक उसका यह ऑपरेशन सफल भी हो जाता पर भारतीय सैनिकों की शूरवीरता और देशभक्ति के आगे उसकी एक न चली।

दोनों देशों के बीच युद्ध का संग्राम छिड़ चुका था। जिसका निशाना गुजरात को बनाया और 8 दिसंबर 1971 में पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादे के चलते भारत के भुज शहर के हवाई अड्डे को निशाना बनाया और हवाई हमले किए। एक के बाद एक लगातार हमले करवाए जिसके चलते भुज एयरपोर्ट की हवाईपट्टी (Airstrip) पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। इस बात का पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देने के लिए भुज के एयरपोर्ट की हवाईपट्टी का सही होना अति आवश्यक था। इस वक्त एयरबेस की जिम्मेदारी स्‍क्‍वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक संभाल रहे थे। यह एक जाबांज और निडर कमांडर थे।

विजय कुमार कार्णिक कौन थे?

विजय कुमार कार्णिक का परिवार महाराष्ट्रीयन चंद्रसेनिया कायस्थ प्रभु समुदाय से था। उनका जन्म 6 नवंबर 1939 को नागपुर में हुआ था। इन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नागपुर शहर से प्राप्त। वह बचपन से ही एक परिश्रमी छात्र थे उन्होंने शुरूआत से ही भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते थे इसके लिए उन्होंने खूब मेहनत की। उन्होंने अपनी विज्ञान स्नातक की डिग्री नागपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की।

वह अपने भाई विनोद कार्णिक से प्रेरित थे वह भी अपने भाई की ही तरह देश की सेवा करना चाहते थे इसके लिये उन्होंने भारतीय वायु सेना की परीक्षा सफलतापूर्वक पास करी और महाराष्ट्र पूणे की खडकवासला अकादमी में दाखिला ले लिया।

विजय कुमार कार्णिक के बारे में जानकारी (Vijay Kumar Karnik, Education, birth place, height, weight, Religion, Caste)

पूरा नाम (Full Name)विजय कुमार कार्णिक
जन्म (Date of Birth)6 नवंबर 1939
जन्म स्थान (Birth Place)नागपुर, महाराष्ट्र
राष्ट्रीयता (Nationality)भारत (Indian)
धर्म (religion)हिन्दू (Hindu)
जाति महाराष्ट्रीयन चंद्रसेनिया कायस्थ प्रभु समुदाय
स्कूलस्थानिय स्कूल, नागपुर
कॉलेजविज्ञान स्नातक, नागपुर विश्वविद्यालय
पेशा (Occupation)एयर फोर्स ऑफिसर (Air Force Officer)
सेवा/सर्विसभारतीय वायुसेना
रैंक (Rank)विंग कमांडर
ईकाई (Unit)6 स्क्वाड्रन
भारतीय सेना में सर्विस26/5/1962 से 14 /10/1986 तक
युद्ध लड़ें (War)1. 1962, भारत -चाइना युद्ध
2. 1965, भारत-पाक युद्ध)
3. 1971, भारत-पाक युद्ध
हॉबी (hobbies)गोल्फ खेलना, बागवानी करना, किताबे पढ़ना
लंबाई (Height)5 फीट 8 इंच
आंखें (Eye Colour)काला (Black)
बाल (Hair Colour)सफ़ेद (White)
वर्तमान में आयु (2021)82 वर्ष

विजय कुमार कार्णिक का परिवार (Family, wife, personal life,)

इनके पिता का नाम श्री निवास कार्णिक था। वह एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी थे और माता का नाम ताराबाई कार्णिक था। विजय कुमार कार्णिक के तीन भाई और एक बहन थी।

इनका विवाह 20 फरवरी 1965 में उषा कार्णिका (शहनाज हुसैन फ्रेंचाइली की मालिक) से हुआ था। उनकी एक बेटी शरदा कार्णिक और एक बेटा परेश कार्णिक है।

विजय कुमार कार्णिक के बारे में व्यक्तिगत जानकारी ( Vijay Kumar Karnik Biography hindi, Father name, mother name, sister, brothers name, height, wife name, hobbies)

पिता (Father Name)श्रीनिवास कार्णिक (सरकारी अधिकारी)
माता (Mother Name)ताराबाई कार्णिक
भाई (Brothers)> विंग कमांडकर, लक्ष्मण कार्णिक
> मेजर जनरल, विनोद कार्णिक
> एयर मार्शल, अजय कार्णिक
बहन (Sister)वसंती
वैवाहिक स्थिति (marital status)विवाहित
पत्नी (Wife)उषा कार्णिक
विवाह की तारीख (marriage date)20 फरवरी 1965
बेटी (Daughter)शलाका कार्णिक
बेटा (Son)परेश कार्णिक

विजय कार्णिक की भारतीय वायुसैना में भूमिका (Vijay Kumar Karnik Career)

विजय कुमार कार्णिक 12 मई 1962 को भारतीय वायुसेना में शामिल हुये थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध में भाग लिया और 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने अपने साहस और वीरता व देशभक्ति को बखूबी दर्शाया।  1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में विजय कार्णिक IAF के chief स्‍क्‍वाड्रन लीडर थे। इन्होंने अपने साहस और शौर्य के दम पर पाकिस्तान को 1971 वाले युद्ध में मुंहतोड़ जवाब दिया था और वीरता और साहस की एक नई मिसाल पेश की। 1967 में विजय कुमार 6 स्क्वायरफीट में शामिल हुये।

1 अक्टूबर 1985 को विग कमांडर के तौर पर प्रमोट किया गया। 14 अक्टूबर 1986 को विजय कुमार कार्णिक अपनी सर्विस से सेवा निवृत (रिटायर) हो गये थे। इन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत सारे युद्धों में अपनी वीरता व पराक्रम का परिचय दिया।

विजय कुमार कार्णिक ने एक बार 1971 युद्ध के दौरान एयरफील्ड आर्मी ऑफिसरों व सैनिकों का विमान सुरक्षित लैंड कराया था। विजय कुमार की सूझबूझ, देशभक्ति और साहस का जो प्रदर्शन को देखते हुये उन्हें भारत सरकार द्वारा वायुसेना मेडल पुरुस्कार दिया गया।

विजय कुमार कार्णिक की 1971 युद्ध में भूमिका

पाकिस्तान के नापाक हमले के बाद भुज एयरपोर्ट की हवाईपट्टी (Airstrip) बुरी तरह से नष्ट हो गई थी। इन्होंने भारतीय सेना से मदद मांगी जबतक कोई मदद आती बहुत देर हो जाती तब विजय कुमार कार्णिक जी ने बड़ी ही शांति और बुद्धिमानी से काम लेते हुए हवाईपट्टी को वापस से ठीक करने का फैसला किया था और उस गांव में लोगो से मदद मांगना ही उचित समझा। देश के प्रति सच्चे प्रेम और देशभक्ति के चलते हर कोई विजय कार्णिक की सहायता करने के लिए आगे आया था।

परन्तु उस गांव (माधवपुर) में पुरुष से ज्यादा महिलाएँ थी। तो अपने देश की रक्षा करने के लिए माधवपुर गाँव की 300 महिलाओं ने अपने हिम्मत और जोश के साथ मिलकर विजय कुमार कार्णिक और उनके साथियों का साथ दिया।

केवल 3 दिन में ही यानी कि 72 घंटों में भुज के एयरपोर्ट की हवाईपट्टी को वापस से तैयार कर दिया गया और युद्ध के लिए तैयार कर दिया था। उसके पश्चात भारतीय सेना ने पूरे जोश के साथ पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुये यह युद्ध कुछ ही दिनों में जीत लिया और एक ऐतिहासिक मिसाल पेश कर दी।

300 माधोपुर की महिलाओं को मिला पुरुस्कार

माधोपुर की महिलाओं को उनकी शूरवीरता और नीडरता से देश कि सेवा करने के लिये उन्हें उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इंद्रिरा गांधी जी ने उन्हें ‘झांसी की रानी’ कहा और प्रत्येक महिला को पचास हजार रुपये की राशि देकर उन्हें सम्मानित किया।

विजय कुमार कार्णिक व भुज द प्राइड ऑफ़ इंडिया (Vijay Kumar Karnik & Bhuj The Pride of India )

हाल ही रिलिज हुई फिल्म भुज द प्राइड ऑफ इंडिया ( Bhuj Real story in hindi) को देखकर प्रत्येक भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना प्रज्वल्लित हो उठती है इस फिल्म में भारत-पाक युद्ध के भुज एयरवेज की पट्टी पर की गई भीषण बमबारी को मुखतौर पर दिखाया गया है।

युद्ध के दौरान भुज एयरवेज की पट्टी पूर्ण रुप से नष्ट हो गई है और इस पट्टी को मरम्मत करने के लिए जाबांज स्क्वाड्रन चीफ विजय कुमार कार्णिक की लीडरशीप में एयरफील्ड पट्टी को मात्र 72 घंटों में 300 गांव की साधारण महिलाओं व कुछ सैनिकों की मदद से इसको युद्ध के लिये बिल्कुल दुरुस्त कर दिया था।

इस फिल्म के मुख्य किरदार विजय कार्णिक का रोल अजयदेवन ने निभाया है व अन्य दूसरे महत्वपूर्ण किरदार रणछोड़ दास पगी की भूमिका में संजय दत्त नजर आते हैं। इस फिल्म का ट्रेलर 12 जुलाई 2021 को लॉन्च हुआ था और यह फिल्म 13 अगस्त 2021 को रिलीज हो चुकी है।

1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध का मुख्य कारण क्या है?

इस युद्ध का कारण बहुत ही शर्मशार था। पाकिस्तान की घिनौनी हरकतों को देखते हुए और बांग्लादेश कि सहायता करने के लिए ये युद्ध भारत ने पाकिस्तान से लड़ा था।

1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा हुआ करता था तब पाकिस्तान आर्मी और पाकिस्तानी आतंकवादियों के द्वारा बांग्लादेश के तीन लाख लोगों को मार दिया गया था और 2 लाख से भी ज्यादा बांग्लादेशी महिलाओं की आबरु के साथ खिलवाड़ किया गया था। रेप करके उन्हे मार डाला गया उनका कत्ल कर दिया गया। पाकिस्तान के इस जघन्य अपराध को देखते हुए ये सर्वाेपरी हो गया था कि बंग्लादेश को एक आजाद मुल्क देश बनाया जाए और इसमें बांग्लादेश की सहायता करने भारत की सेना ने हाथ बढ़ाया था। इसी कारण से पाकिस्तान ने भारत को निशाना बनाया और युद्ध छेड़ दिया।

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1971 के युद्ध का परिणाम

13 दिनों तक चले इस भीषण युद्ध का परिणाम कुछ इस प्रकार रहा की भारतीय सेना के पराक्रम के आगे पाकिस्तानी सेना ने अपनी हर स्वीकारी और अपने आपको 90,000 सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया था। ये युद्ध पाकिस्तान और भारत की मित्र वाहिनी सेना के बीच लड़ा गया था।

युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान के कमांडर चंगेज खान ने भारत के तीन हवाई अड्डों पर हमला करके की थी। इसका खामियाजा पाकिस्तान को अपना मेंज पाकिस्तान को  देकर चुकानी पड़ी। जोकि हमारे लिए एक गर्व की बात है।

आज के इस लेख में हमने भारत के वीर सपूत विजय कुमार कार्णिक की वीरता व शौर्य को दर्शाति फिल्म भुज द पराइड ऑफ इंडिया के बारे में जाना। 1971 में हुए इस युद्ध में माधोपुर की 300 महिलाओं की वीरता और देशभक्ति को भी बखूबी दर्शाया गया है। जिसको देखकर भारत के हर नागरिक के मन में देशभक्ति की भावना और जागृत हो जाती है। अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई हो तो कृपया इसे शेयर अवश्य करें।

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