(How to Write an essay speech on Dussehra In Hindi, Essay on Dussehra In 100, 150, 200, 250, 300 & 500 Words, Dussehra Speech In Hindi, Poem On Dussehra In Hindi) (लिखिए दशहरा पर निबंध 100, 150, 250, 300 और 500 शब्दों में। दशहरा पर भाषण एवं दशहरा पर कविता)
Essay Speech on Dussehra in Hindi : अक्टूबर का महीना आते ही भारत में हिंदुओं के त्योहारों की झड़ी लग जाती है। अक्टूबर से लेकर नवंबर महीने के बीच हिंदुओं के कई प्रमुख त्यौहार मनाए जाते हैं जिनमें नवरात्रि दशहरा और दीपावली शामिल है।
दशहरे के दिन भगवान श्रीराम ने राक्षस रावण का वध किया था इसी कारण हर साल दशहरे का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरे को विजयदशमी के नाम से भी जानते हैं क्योंकि इस दिन दशमी की तिथि पर भगवान श्रीरामचंद्र जी ने रावण पर विजय पाई थी।
दशहरा अर्थात विजयदशमी के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है और रामलीला मंचन जैसे विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा कई स्थानों पर दशहरे के अवसर पर भाषण वाद संवाद आदि का भी आयोजन किया जाता है।
भारत में दशहरे के उपलक्ष में भव्य मेलों और भंडारों का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत को प्रकाशित किया जाता है। इस साल 02 अक्टूबर 2025 को विजयदशमी की तिथि पड़ेगी और दशहरा का त्यौहार मनाया जाएगा।
दशहरा और विजयदशमी के उपलक्ष में समाज को नैतिकता का संदेश देने के लिए हमने इस लेख में एक कविता भी साझा की है।
आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको विजयादशमी व दशहरा पर निबंध और भाषण (Essay and Speech on Dussehra in Hindi) अर्थात विजयदशमी पर निबंध (Essay on Vijaydashmi) तथा दशहरा विजयदशमी पर कविता (Poem on Dussehra, Vijaydashmi in Hindi) के बारे में बताएंगे।
विषय–सूची
विजयादशमी एवं दशहरा पर निबंध 500 शब्दों में हिंदी (500 Words Dussehra Essay in Hindi)
हिंदू समुदाय के लोग हर साल विजयदशमी की तिथि पर दशहरा का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। नवरात्रि के उपरांत दसवें दिन यह त्यौहार मनाया जाता है।
दशहरे का त्यौहार अश्विनी यानि की क्वार मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी ने राक्षस रावण का वध किया था और उसपर विजय पाई थी। इसलिए यह पर्व विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता हैं।
इस दिन हम सब के आराध्य देव प्रभु श्री राम ने राक्षस रावण का वध किया था। रावण लंका नगरी का राजा था जिसने तीनों लोकों पर अपनी राक्षसी शक्तियों का प्रभुत्व स्थापित किया था इसीलिए उसे त्रिलोक विजेता रावण भी कहते थे।
रामचरित मानस में वर्णित है कि अधर्मी रावण ने भगवान श्री राम भगवान श्री राम की पत्नी सीता माता का हरण कर लिया था और उन्हें अपने अशोक वन में बंदी बना रखा था। सीता माता को रावण से आजाद कराने के लिए भगवान श्रीराम और उनकी सेना ने संयोजन समुद्र पर राम सेतु पुल बांधा और लंका पर आक्रमण किया।
विजयदशमी का दिन ही वह दिन था जब प्रभु श्री रामचंद्र जी ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की रक्षा की थी। इसलिए विजय दशमी की यह तिथि दशहरे के तौर पर हर साल मनाई जाती है।

दशहरा का पर्व क्यों मनाया जाता हैं?
अश्विन महीने की प्रतिपदा तिथि को रावण भगवान श्री राम से युद्ध करने के लिए मैदान में उतरा था। 10 दिनों तक घोर संग्राम के बाद भगवान श्रीराम ने अंततः दशमी की तिथि पर रावण का वध कर दिया और लंका पर विजय प्राप्त कर दी। इसी कारण इस दसवीं की तिथि को विजयदशमी का नाम दिया गया। और इसीलिए बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में हर साल दशहरा मनाया जाता है।
दशहरे से जुड़ी एक और कथा काफी प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि अश्विन महीने की प्रतिपदा तिथि को ही महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच युद्ध प्रारंभ हुआ था और विजयदशमी की तिथि पर ही देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। यानी कि दशहरे का त्यौहार ना केवल रावण पर प्रभु श्री राम के विजय का प्रतीक है बल्कि यह महिषासुर पर देवी दुर्गा के विजय का भी प्रतीक है।
यही कारण है कि असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत के लिए हर साल दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है।
दशहरे के अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें रामलीला मंचन और रावण दहन प्रमुख हैं। खासकर रामलीला मंचन अश्विन महीने की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है जिस दिन रावण युद्ध स्थल में उतरा था और 10 दिनों तक चलता है और अंततः विजयदशमी की तिथि पर रावण वध का मंचन किया जाता है।
भारत में दशहरे की तिथि पर मुख्य रूप से मेलों का आयोजन किया जाता है। दशहरे के दिन भारत के कोने कोने में रावण के पुतले को जलाया जाता है और भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है।
आइये जानते हैं- रावण से जुड़े रोचक तथ्य- क्या सचमुच रावण के 10 सिर और 20 भुजाएं थी?
दशहरा पर निबंध 100 एवं 150 शब्दों में (Essay on Dusshera In Hindi)
हर साल अश्विनी मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का दिन विजयदशमी एवं दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री रामचंद्र जी ने लंका में रावण का वध किया था। विजयदशमी का दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
विजयदशमी की घटना को सदैव जीवित रखने के लिए भारत में हर साल विजयदशमी की तिथि पर रावण वध जैसे नाटक एवं रामलीला प्रस्तुतियां की जाती है। इस दिन दशहरे के मेले का भव्य आयोजन किया जाता है तथा रावण का पुतला भी जलाया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में राक्षस रावण का वध करने के लिए ही भगवान नारायन ने श्री रामचंद्र जी का अवतार लिया था। 14 वर्षों के वनवास के दौरान इसी अधर्मी रावण ने भगवान श्री राम की अर्धांगिनी माता सीता का अपहरण कर लिया था।
परिणाम स्वरूप भगवान अपनी वानर भालूओं की सेना लेकर लंका पर चढ़ाई कर दी। प्रतिपदा की तिथि से युद्ध की शुरुआत हुई और मान्यता है कि यह युद्ध दस दिन तक चला जिसके दश वें दिन रावण प्रभु श्री रामचंद्र जी के हाथों मारा गया।
250, 300 शब्दों में दशहरा पर निबंध
हिंदू पंचांग के अनुसार भारत में हर साल अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी मनाई जाती है, जिसे दशहरा के नाम से भी जानते है।
दशहरा का यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म एवं असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इसलिए हमारी संस्कृति के नैतिक मूल्यों में इस त्यौहार का स्थान बहुत विशेष है।
भगवान श्री रामचंद्र को अपने पिता दशरथ और माता कैकेई की आज्ञा पर 14 वर्षों के लिए वनवास गए थे। इस वनवास के दौरान उनके छोटे भाई लक्ष्मण और उनकी पत्नी सीता भी उनके साथ थी।
एक दिन लंका के अधर्मी राक्षस रावण ने छल से सीता जी का हरण कर लिया। माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्री रामचंद्र जी अपनी सेना सहित लंका गए और रावण का वध करके उन्होंने माता सीता की रक्षा की। कहा जाता है कि विजय दशमी की तिथि पर ही रामचंद्र जी ने रावण को मारा था इसलिए दशमी की यह तिथि प्रभु श्री राम के विजय का विजयदशमी कही जाने लगी।
भारत में हर साल दशहरा दशमी के इस दिन मनाया जाता है। विजयदशमी की तिथि पर जगह-जगह मेलों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान रामलीला मंचन भी किया जाता है और रावण वध का प्रसंग मंचित किया जाता है। दशहरा का पर्व दिन संपूर्ण भारत में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है।
इस दिन पूरे भारतवर्ष में आधिकारिक छुट्टी रहती है। यह दिवस धर्म की विजय और न्याय का प्रतीक है। इसलिए हमारी संस्कृति में इस दिन का बहुत विशेष महत्व है।
विजयादशमी दशहरा पर भाषण (Speech on Dussehra in Hindi)
अभिवादन !
जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि हर साल बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक रूप में दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने दुष्ट रावण का संघार किया था और लंका पर विजय प्राप्त की थी।
इसके अलावा इसी दिन देवी दुर्गा ने भी दानव महिषासुर का संहार किया था। इसलिए विजयादशमी की तिथि हमारी संस्कृति में इतनी खास है। रावण प्राचीन कालखंड का एक ऐसा व्यक्तित्व है जो ज्ञानी और अत्यंत बलशाली होने के उपरांत भी दुराचारी और क्रूर था।
यह व्यक्तित्व हमें सन्देश देता है कि हमारी नैतिकता ज्ञान से नहीं उपजती बल्कि सदाचार, और आचरण से आती है। ज्ञान होने से कोई बुद्धिमान और सरल नहीं होता बल्कि अपनी अंतरात्मा को सुनने और समझने से होता है।
ठीक ऐसे ही विजयदशमी को लेकर हिंदू धर्म में कई सारी मान्यताएं प्रचलित हैं। इसीलिए भारत में इस दिवस को बुराई पर अच्छाई तथा सत्य पर सत्य की जीत के तौर पर मनाया जाता है।
भले ही त्रेता युग के कालखंड में विजयदशमी की तिथि पर भगवान राम जी ने रावण को मार दिया था लेकिन आज भी हमारे समाज में हमारे देश में ऐसे कई रावण पैदा हो रहे हैं। रावण ने तो सीता माता का हरण ही किया था पर कभी उन्हें स्पर्श नहीं किया था लेकिन आज के समय में ऐसे न जाने कितने रावण पैदा हो रहे हैं जो हर दिन देश के न जाने कितनी औरतों का हरण, शोषण कर रहे हैं।
आज का समय अधर्म अत्याचार और अपराध का है। ऐसे में दशहरे का त्यौहार मनाकर हम अपने इस सभ्य समाज के नैतिक पतन को रोकने का एक स्वर्णिम प्रयास कर सकते हैं। दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के साथ-साथ हमें अपने मन की भी सारी बुराइयां जला देनी चाहिए ताकि कलयुग में कोई रावण पैदा ना हो।
तो आइए आज इस दशहरे के अवसर पर संकल्प लेते हैं कि ना अधर्म और अपराध करेंगे न इसे सहेंगे बल्कि एक अभियान चलाकर इन्हें रोकने का प्रयास करेंगे।
धन्यवाद !
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विजयादशमी व दशहरा पर कविता (Vijayadashami & Dussehra Poem in Hindi)
हे कलयुग के राम जगो !
रावण ने अधर्म मचाया है।
कर्म न्याय की दुनिया पर,
अब घना अंधेरा छाया है।
हे कलयुग के राम जगो !
यह नर ही अब नरभक्षी हैं,
संकट इनसे ही इन पर है।
वसुधा पापों से भरी हुई,
सौ नरकों से भी बदतर है।
यह संकट निशा मिटा दो ना,
फिर आज दशहरा आया है।
हे कलयुग के राम जगो!
अब घना अंधेरा छाया है।
रघुनाथ आप तो बसते हैं,
इस सृष्टि के हर कण कण में।
फिर धनुष उठा कर हाथों में,
आ जाओ जगति के रण में।
कलयुग की हर सीता ने,
रघुनाथ तुम्हें बुलाया है।
हे कलयुग के राम जगो!
अब घना अंधेरा छाया है।
– सौरभ शुक्ला
दशहरा का पर्व कब मनाया जाता हैं?
अश्विनी यानि की क्वार मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।
रावण के अन्य नाम बताए?
लंकेश, लंकापति, दशानन, दशग्रीव
दशहरा 2025 कब है?
02 अक्टूबर 2025
