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गणेश चतुर्थी कब है 2026: जानिए गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त व्रत कथा और पूजा विधि।

गणेश चतुर्थी कब है क्यों मनाई जाती है? विनायक चतुर्थी, गणेश चतुर्थी का महत्व, इतिहास, गणेश चतुर्थी व्रत, शुभ मुहूर्त 2025 तथा पूजन विधि (Ganesh Chaturthi ka mahatva, kyu manye jati hai and Vinayak Chaturthi Vrat, Puja Vidhi, Story Facts in Hindi)

भारत में सनातन संस्कृति के लोग आए दिनों अलग अलग त्यौहार मनाते रहते हैं। भाद्रपद महीने में कृष्ण जन्माष्टमी के बाद अब गणेश चतुर्थी का त्यौहार आने वाला है।

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वैसे तो गणेश चतुर्थी पूरे भारतवर्ष में भगवान श्री गणेश के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाई जाती है लेकिन महाराष्ट्र के लोगों में गणेश चतुर्थी को लेकर एक अलग उत्साह देखने को मिलता है।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार महाराष्ट्र का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे महाराष्ट्र के लोग अपने रीति-रिवाजों के साथ बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

सनातन संस्कृति के लोग किसी भी देवी देवता की पूजा करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा करते हैं। भगवान श्री गणेश को विनायक, गजानन, एकदंत और विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है।

आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताते हैं कि गणेश चतुर्थी से जुड़ा हुआ इतिहास क्या है और गणेश चतुर्थी मनाने की शुरुआत किस प्रकार हुई। साथ ही साथ हम आपको यह भी बताएंगे की गणेश चतुर्थी 2026 में कब मनाई जाएगी तथा इसे मनाने का शुभ मुहूर्त क्या होगा?

गणेश चतुर्थी क्या होती है?

गणेश चतुर्थी हिंदुओं का एक विशेष त्यौहार है जिसे भगवान श्री गणेश के जन्मदिन के उपलक्ष्य के रूप में मनाते है। गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और गणेश उत्सव के नाम से भी जाना जाता है।

महाराष्ट्र में विशेष रूप से गणेश चतुर्थी महोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है जो 10 दिनों तक चलता है। गणेश उत्सव के दौरान चतुर्थी के दिन महाराष्ट्र और भारत के अन्य हिस्सों में लोग अपने घरों में तथा कई सार्वजनिक स्थलों पर भगवान श्री गणेश के मूर्ति की स्थापना करते हैं और लगातार 10 दिनों तक अपने रीति-रिवाजों के साथ विधिवत गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है।

गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना के ठीक दसवें दिन अनंत चतुर्दशी तिथि को गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है।

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गणेश चतुर्थी कब है क्यों मनाई जाती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का व्रत एवं त्यौहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन लोग चतुर्थी का व्रत रखते हैं और इसी दिन से ही गणेश उत्सव की शुरुआत भी होती है।

अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक गणेश चतुर्थी अगस्त माह के अंतिम सप्ताह और सितंबर के शुरुआती सप्ताह के बीच में पडती है।

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इस दिन गणपति की स्थापना के साथ शुरू होने वाला गणेश उत्सव अगले 10 दिनों तक मनाया जाता है और ठीक अगले दसवें दिन अनंत चतुर्दशी को गणपति विसर्जन के साथ यह महोत्सव समाप्त होता है।

गणेश चतुर्थी कब है 2026?

हिंदू पंचांग के मुताबिक गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी और गणेश महोत्सव की शुरुआत की जाएगी।

हिंदू पंचांग के मुताबिक गणेश चतुर्थी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन रखा जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को को मनाई जाएगी। जो आने वाले अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव के रूप में मनाई जाएगी।

2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। उदया तिथि और पूजा के शुभ समय को ध्यान में रखते हुए गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।

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14 सितंबर 2026 गणेश चतुर्थी से लेकर 25 सितंबर 2026 अनंत चतुर्दशी तक गणेश महोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा और अनंत चतुर्दशी की के दिन ही भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।

गणपति स्थापना और पूजन का शुभ मुहूर्त 2026

दिल्ली के लिए 14 सितंबर 2026 को गणेश पूजा का शुभ समय लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक बताया गया है। स्थान के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।

इस दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करके पूजा, आरती और मंत्र-जाप करते हैं। भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और फल आदि अर्पित की जाती है।

गणेश चतुर्थी 2026 की तिथियां

गणेश प्रतिमा स्थापना14 सितंबर 2026सोमवार
गणेश उत्सव की शुरुआत14 सितंबर 2026सोमवार
अनंत चतुर्दशी25 सितंबर 2026शुक्रवार
गणपति विसर्जन25 सितंबर 2026शुक्रवार

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

भगवान श्री गणेश को देवताओं में सबसे बुद्धिमान माना जाता है इसके साथ ही वह सिद्धि के स्वामी जी हैं जिन की कृपा से हर परिवार में सुख और समृद्धि आती है और लोगों की बुद्धि का विकास भी होता है।

भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता कह कर भी बुलाया जाता है क्योंकि उनकी कृपा से परिवार पर आने वाले सारे विघ्न और संकट दूर हो जाते हैं। बिन गणेश जी के किसी भी घर में लक्ष्मी का प्रवेश नहीं होता लक्ष्मी और गणेश दोनों साथ साथ घर में प्रवेश करते हैं और परिवार को सुख तथा समृद्धि प्रदान करते हैं।

इसलिए भगवान श्री गणेश की जन्मतिथि को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी के समय से ही गणेश चतुर्थी मनाने की परंपरा चली आ रही है जिसे गणेश उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी का इतिहास

गणेश चतुर्थी मनाने की शुरुआत महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे से हुई थी और आज भी पुणे में मनाया जाने वाला गणेश उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

गणेश चतुर्थी मनाने का इतिहास मराठा साम्राज्य के सम्राट छत्रपति शिवाजी से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जब शिवाजी महाराज अपनी बाल्यावस्था में थे तो उनकी माता जीजाबाई ने उनके साथ मिलकर गणेश चतुर्थी मनाने की शुरुआत की थी।

जिस समय भारत पर मुगल अपना वर्चस्व जमाने में लगे हुए थे उस समय सनातन संस्कृति को बचाने के लिए छत्रपति शिवाजी ने गणेश चतुर्थी के दौरान मनाए जाने वाले गणेश महोत्सव की शुरुआत कर दी थी।

छत्रपति शिवाजी के बाद मराठा साम्राज्य के अन्य पेशवाओं ने भी गणेश महोत्सव को मनाना जारी रखा। इस दौरान मराठा पेशवा ब्राह्मणों को भोजन कराते थे तथा दान पुण्य करते थे।

ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भारत में हिंदुओं के सार्वजनिक पर्वों पर रोक लगा दी गई थी जिस दौरान बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के महोत्सव को पुनर्जीवित किया।

जिस दौरान लोग ब्रिटिश हुकूमत की डर के मारे अपने घरों में पूजा पाठ करते थे उस दौरान बाल गंगाधर तिलक ने पुणे में गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से मना कर एक नया आंदोलन शुरू कर दिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गणेश उत्सव ने एक अहम भूमिका निभाई जिस दौरान भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों जैसे कि बाल गंगाधर तिलक, विनायक दामोदर सावरकर, पंडित मदन मोहन मालवीय और सरोजिनी नायडू को आंदोलन छेडने का सार्वजनिक मंच मिला।

जब बाल गंगाधर तिलक ने पुणे में सार्वजनिक रूप से गणेश महोत्सव मनाने की शुरुआत की तो ब्रिटिश हुकूमत भी आंदोलन की आशंका से भयभीत हो गई और इन क्रांतिकारियों का दमन करने का प्रयास करने लगी। लेकिन मुगल और ब्रिटिश हुकूमत ने भले ही भारत को आर्थिक रूप से लूटा हो लेकिन भारत की सांस्कृतिक धरोहर का बाल भी बांका नहीं कर सके और आज भी उसी उत्साह और जुनून के साथ प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी का महोत्सव महाराष्ट्र समेत भारत के अन्य राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी की कथा –

गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश की जन्म तिथि से जुड़ी हुई एक कथा अत्यंत लोकप्रिय है। कहा जाता है कि एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थी उस दौरान उन्होंने अपने शरीर पर लगे लेप अथवा मैल के जरिए एक काया बनाई और उसमें प्राण डाल दिए ताकि उनके द्वारा बनाया गया बालक द्वार पर पहरेदारी कर सके। यही बालक भगवान श्री गणेश थे जिन्हें माता पार्वती ने अपने शरीर के लेप से निर्मित किया था।

माता पार्वती ने गणेश जी को आज्ञा दी कि वह द्वार पर ही रुक कर पहरेदारी करें और किसी को भी अंदर आने की अनुमति ना दें। इतना कहकर माता पार्वती अंदर स्नान करने चली गई और भगवान श्री गणेश द्वार पर पहरेदारी करने लगे।

कुछ समय बाद भगवान शंकर आए और द्वार से अंदर प्रवेश करने लगे इस पर माता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान श्री गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। भगवान शिव ने गणेश जी से उनका रास्ता छोड़ने के लिए कहा लेकिन गणेश जी एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह माता पार्वती की आज्ञा का निर्वहन करते रहे।

इस पर भगवान शिव अत्यधिक क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल के जरिए भगवान श्री गणेश के सर को उनके धड़ से अलग कर दिया।

गणेश जी की चीख सुनकर जब माता पार्वती बाहर निकलती हैं तो गणेश जी का कटा सिर देखकर रोने भी लगने लगती हैं और शिव शंकर भगवान को बताती हैं कि आप उनके द्वारा बनाया गया उनका पुत्र था। माता पार्वती भगवान शिव से गणेश जी को जीवित करने का आग्रह करती हैं।

तब भगवान शंकर अपने सेवकों को आज्ञा देते हैं कि वे लोग धरती पर जाएं और जिस बच्चे की मां अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सो रही हो उसका सर काट कर लाएं। जब भगवान शिव के सेवक पृथ्वी लोक पर जाते हैं और एक हाथी के बच्चे का सर काटकर वापस कैलाश आते हैं।

भगवान शिव इस गजमुख को गणेश जी के धड़ से जोड़ देते हैं और प्राण मंत्र पढ़कर उन्हें जीवनदान देते हैं। इसी कारण भगवान श्रीगणेश को गजानन भी कहा जाता है।

गणेश महोत्सव मनाने की विधि –

गणेश चतुर्थी व्रत के साथ ही गणेश महोत्सव की शुरुआत होती है तथा अनंत चतुर्दशी तक मनाई जाती है।

गणेश महोत्सव मनाने के लिए कुछ विशेष प्रकार के यज्ञ अनुष्ठान किए जाते हैं।

  • प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के दौरान भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापना की जाती है और पुनः 16 रूपों में भगवान गणेश को श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाते हैं और पूरे विधि विधान के साथ अगले 10 दिनों तक उनकी पूजा की जाती है।
  • लड्डू और मोदक भगवान गणेश के प्रिय व्यंजन माने जाते हैं इसके अलावा भी बहुत से पकवान बनाकर भगवान श्रीगणेश को चढ़ावा चढ़ाया जाता है।
  • गणेश महोत्सव का अगला अनुष्ठान उत्तर पूजा होता है स्थापना के बाद इस अनुष्ठान को किए बिना मूर्ति को कहीं ले जाया नहीं जा सकता। इसलिए उत्तर पूजा का अनुष्ठान करके गणेश जी की मूर्ति को विस्थापित किया जा सकता है।
  • गणेश महोत्सव का अंतिम अनुष्ठान गणपति विसर्जन होता है जिस दौरान भगवान श्री गणेश की स्थापित मूर्ति को जल में विसर्जित कर दिया जाता है। इसी विसर्जन के साथ गणेश महोत्सव का समापन हो जाता है और समापन के उपलक्ष में भंडारे इत्यादि का आयोजन किया जाता है।

गणेश चतुर्थी से जुड़े रोचक तथ्य –

ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन रात के समय चांद नहीं देखना चाहिए। गांव देहात में चतुर्थी को ढेलही चौथ भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस दिन रात के समय चांद देख लेते हैं उनके ऊपर कलंक लग जाता है।

देहात में गणेश चतुर्थी की रात चांद देखने से जुड़ी एक अजीबोगरीब मान्यता यह भी है कि अगर किसी ने चांद देख लिया है तो उसे अपने पड़ोसियों के छत पर पत्थर फेंक देना चाहिए लोगों का मानना है कि ऐसा करने से कलंक और दोष नहीं लगता।

गणेश चतुर्थी का महत्व –

भगवान श्री गणेश को देवताओं में सबसे पहले गिना जाता है उन्हें बल और बुद्धि का निधि माना जाता है। भगवान श्री गणेश का विवाह सिद्धि से हुआ था इसलिए वह सिद्धि के स्वामी भी माने जाते हैं उनकी कृपा से ही परिवार में सुख समृद्धि और वैभव आता है।

भगवान श्री गणेश के अनेक नामों में विघ्नहर्ता भी शामिल है अर्थात भगवान श्री गणेश अपने भक्तों के विघ्नों को हर लेते हैं। देवताओं में अग्रणी भगवान श्री गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है और यही कारण है कि भारत तथा विश्व भर के हिंदू देवताओं में अग्रगण्य भगवान श्री गणेश की जन्म तिथि को विशेष तरीके से गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं।

लोग मानते हैं कि गणेश चतुर्थी का व्रत रखने से तथा गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणपति की घर में स्थापना करने से घर में लक्ष्मी का वास हो जाता है और अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ ही भक्तों के सारे विघ्न संकट दूर हो जाते हैं।

FAQ

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

भगवान श्री गणेश के जन्म दिवस के उपलक्ष में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।

भारत में गणेश चतुर्थी मुख्य रूप से कहां मनाई जाती है?

मुख्य रूप से भारत के महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी कब है 2026

इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है।

गणेश विसर्जन की तिथि क्या है?

25 सितंबर 2026

गणेश जी का प्रिय व्यंजन क्या है?

मोदक को गणेश जी का सबसे प्रिय व्यंजन माना जाता है।

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