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भारत के रहस्यमयी व अनोखे गांव | Most Unique Villages of India hindi

भारत के कुछ अनोखे व अजीबोगरीब व दिलचस्प गांव (Most Unique Villages of India hindi) जिनके बारे में आपको जानकारी नहीं होगी। भारत गांवों का देश है इसकी विविधता तो जग जाहिर है। क्या आपकों पता है भारत का सबसे अमीर गांव व सबसे साफ सुथरा गांव कौन सा है? या आप ऐसे गांव के बारे में जानते है जिसका अपना ही कानून है। भारत में एक ऐसा गांव भी जहां केवल जुड़वा बच्चे ही पैदा होते है और एक ऐसा गांव है जहां के बच्चे सांपो के साथ खेलते है। आइए आज हम ऐसे ही रोचक व रहस्यमयी गांवों के बारे में जानते है।

भारत का सबसे अमीर गांव – मधापर, गुजरात

दोस्तों भारत का सबसे अमीर गांव का नाम मधापर जो कि गुजरात के कच्छ जिले में स्थित है।

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यह गाँव बैंक मे जमा की गई धनराशि के आधार पर भारत का सबसे अमीर गांव है और इतना ही नहीं बल्कि इसे विश्व भर में गिने जाने वाले सबसे अमीर गांवों में भी स्थान प्राप्त है।

इस गाँव में लगभग 7,500 से उपर घर है। खास बात यह है कि 7,500 घरो की आबादी वाले इस गांव में कुल 17 बैंक हैं। इन 17 बैंको में कुल मिलाकर 92,000 लोगों के खाते में 5 हजार करोड़ की धनराशि जमा है और इसी आधार पर इसे भारत का सबसे अमीर गांव माना जाता है।

दर असल इस गाँव के इतने विकास के पिछे की वजह यहाँ के लोग है जो युएस , कनाडा , युके और दुनिया के अन्य हिस्सों में रहते है। इस गाँव के ज्यादातर लोग NRI है और अपने गाँव से जुड़े हुए है तकि उसे बेहतर बना सकें।

एक रिपोर्ट के अनुसार यहाँ के लोगों ने 1968 में लंदन मे मधापर विलेज एसोशिएसन की स्थापना की थी।

भारत का सबसे स्वच्छ गाँव – मावलिननोंग, मेघालय

दोस्तों अब बात करते है एक ऐसे गाँव की जिसे भारत का सबसे स्वच्छ गाँव माना जाता है।

इस गांव का नाम मावलिननोंग है जो मेघालय में भारत बंगलादेश की सीमा पर स्थित है।

केवल भारत ही नहीं बल्कि 2003 से लगातार यह गाव पूरे एशिया महाद्वीप का सबसे स्वच्छ गाँव माना जाता है।

इस गाँव की आबादी केवल 500 है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इन ग्रामवासियों ने अपने गाँव के स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी लेकर भारत और पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है।

इस गाँव के हर घर में शौचालय की व्यवस्था है, गाँव के हर हिस्से में पक्की सड़के है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गांव मे प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पुरी तरह से प्रतिबंध है साथ ही साथ धुम्रपान जैसी चिजो पर सख्त पाबन्दी है। इन सब चीजों पर रोक लगाने के लिए गाव में बहुत से नियम बनाए गए है और किसी भी परिस्थिति में अगर कोइ इन नियम को तोड़ता है तो उस पर भारी भरकम जुर्माना भी लगाया जाता है।

जुड़वा बच्चों का गांव – कोहिन्डी

दोस्तों अब तक हमने भारत के सबसे अमीर और सबसे स्वच्छ गाँव के बारे में बताना लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के किस गाँव को जुड़वा बच्चों का गांव कहा जाता है। इस गाँव का नाम कोहिन्डी है जो कोच्चि से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

इस गाँव की खास बात यह है कि यहां पैदा होने वाले प्रति हजार बच्चों में से 42 जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं।

स्टडी के मुताबिक दुनिया में प्रति एक हजार बच्चों पर 6 जुड़वा पैदा होते हैं लेकिन भारत के इस अकेले गाँव मे प्रति एक हजार पर 42 जुड्वे पैदा हो रहे हैं जो औसतन बहुत ज्यादा है।

इस बात के पिछे की वजह पता लगाने में बहुत से लोग जुटे हुए हैं और इस गाँव में जुड़वा बच्चों की पैदाइश को लेकर आश्चर्य मानते है।

संस्कृत बोलने वाला गाँव – मात्तुर

भारत में बहुत सी भाषाए बोली जाती है और प्रायः हिन्दी जिसे भारत की राज्य भाषा के तौर पर स्वीकार किया गया है। लेकिन क्या आप भारत के एक ऐसे गाँव के बारे में जानते हैं जहाँ गाँव का हर आदमी केवल संस्कृत में बात करता है।

दोस्तों दर असल यह गाँव कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिले में स्थित है जिसका नाम मात्तुर है।

इस गाँव की खास बात यह है कि यहां के सभी लोग धारा प्रवाह संस्कृत बोलते हैं और एक दूसरे से इसी भाषा में बात भी करते है फ़िर चाहे वह कोइ वृद्ध हो बच्चा या जवान हो।

संस्कृत बोलने वाले इस गांव में तकरीबन 300 परिवार रहते हैं जो एक दूसरे के साथ संस्कृत भाषा के जरिए जुड़े हुए है।

इस गाँव की खास बात यह भी है कि यहां के लोग केवल संस्कृत ही नहीं बोलते बल्कि उसी हिसाब से रहन सहन भी करते हैं। उनके पहनावे उनकी परम्परा में उनके हर एक व्यवहार में संस्कृत और संस्कृति बसी हुई है।

ऐसी बात नहीं है कि यहां के लोगों को हिन्दी अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा नहीं आती लेकिन उनका कहना है कि जब वो बोलना चाहते हैं तो उनके प्रवाह में केवल संस्कृत ही निकलती है। गाँव के लोगों का कहना है कि 1980 से ही पूरे गांव ने संस्कृत को जगह दे दी है।

एक ऐसा गाँव जिसके पास अपनी संसद – मालणा , हिमाचल प्रदेश

दोस्तों भारत विश्व का सबसे बड़ा गणराज्य माना जाता है जहां संविधान को राष्ट्र की आत्मा तुल्य समझा जाता है जो संसद मैं बनाए जाते हैं और पूरे देश पर लागू होते हैं।

लेकिन क्या आप भारत के अंदर ही एक ऐसे गांव के बारे में जानते हैं जहां भारत के संविधान को नहीं माना जाता।

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source Wikipedia CC BY-SA 4.0, via Wikimedia

दोस्तों इस गांव का नाम मलाणा है जो कि हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है। यह गांव हिमाचल प्रदेश में बहने वाली मलाणा नदी के किनारे स्थित है इसलिए इसका नाम भी मलाणा पड़ा है।

इस गांव की खास बात यह है कि यहां के लोग संविधान के नियम कानूनों को नहीं मानते बल्कि अपनी अलग गणतंत्र व्यवस्था के अनुसार चलते हैं।

यहां के लोग आधुनिकता से बहुत कम प्रभावित हैं और अपनी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ जीना पसंद करते हैं और साथ ही साथ अपने पुराने नियमों के अनुसार चलते भी हैं।

इस पूरे गांव को नियंत्रित करने के लिए ग्राम परिषद का निर्माण किया गया है जिसमें 11 सदस्य हो सकते हैं।

इस गांव में यह 11 सदस्य जो भी फैसला करते हैं परिषद के द्वारा पारित हुआ फैसला सर्वमान्य होता है और सब के ऊपर लागू किया जाता है।

इस गांव में सबसे बड़ा विचित्र नियम है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को यहां कुछ भी छूना पूरी तरह से मनाही है यदि कोई पर्यटन व यात्री यहां किसी भी व्यक्ति व गांव के किसी भी वस्तु को छूने पर जुर्माना देना होता होता है इसके लिये बकायादा नोटिस लगाया गया है। इस गांव के लोग अपने आप को सिकंदर का वंशज मानते है।

इसकी राजव्यवस्था प्राचीन ग्रीस से मिलती है इसलिए इसे हिमाचल प्रदेश का ग्रीस भी कहा जाता है।

मलाणा गांव में हर ग्रामवासियों के लिए विभिन्न प्रकार के नियम कानून बनाए गए हैं जिनके अनुसार सभी ग्राम वासियों का चलना अनिवार्य है अगर कोई भी नियम कानूनों का पालन नहीं करता है तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ता है।

ग्रामीण व्यवस्था को संचालित करने के लिए संगठित ग्राम परिषद को मलाणा का अपना संसद माना जाता है और इसी के जरिए ही गांव में चलने वाले सभी नियम कानून बनाए जाते हैं। (1)

सांपों का गांव- शेतफ़ल, महाराष्ट्र

दोस्तों क्या आपने कभी भारत के किसी ऐसे गांव के बारे में सुना है जहां घर में अलग से जगह बनाकर सांपों को पाला जाता हो।

दोस्तों दरअसल यह गांव महाराष्ट्र राज्य के सोलापुर में स्थित है जिसका नाम शेतफ़ल है।

इस गांव की खास बात यह है कि यहां पर सांप घरों में रहते हैं और सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि वह घर में रहने वाले लोगों को काटते भी नहीं।

यह ऐसा गांव है जहां पर सांपों का दिखना मामूली बात होती है इस गांव में सांपों की विशेष ढंग से पूजा की जाती है और इतना ही नहीं बल्कि सांपों के कई मंदिर भी बनाए गए हैं लोगों का मानना है कि इस गांव में कभी भी किसी सांप को नहीं मारा जाता यही कारण है कि सांप उनके घरों में भी उनके साथ रहते हैं लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाते।

इस गांव के बच्चे सांपों के साथ आपस में खेलते हैं और इस गांव में ज्यादातर घर कच्चे मकान है जिनमें खास जगह बनाकर सांपों को रखा जाता है।

दरअसल इस गांव का वातावरण सांपों के रहने के लिए बहुत अनुकूल है इसलिए यहां पर सांप इतनी अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। इस गांव में एक से बढ़कर एक जहरीले सांप पाए जाते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि वह गांव के किसी भी सदस्य को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाते।

भारत का मिनी लन्दन – मैक्लुस्कीगंज, झारखंड

दोस्तों आपने अमदाबाद का नाम तो सुना ही होगा जिसे भारत का मैनचेस्टर कहते हैं भारत में बहुत सारी ऐसी और भी जगह हैं जिन्हें विदेशी स्थानों के नाम से बुलाया जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के ऐसी कौन सी जगह है या ऐसा कौन सा गांव है जिसे भारत का मिनी लंदन या मीनी इंग्लैंड कह कर बुलाया जाता है।

दोस्तों दरअसल भारत के जिस गांव को मिनी इंग्लैंड या मिनी लंदन कह कर बुलाया जाता है उसका नाम है मैक्लुस्कीगंज।

यह मैक्लुस्कीगंज झारखंड के राज्य में स्थित है और अपनी नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात है।

आइए अब आपको बताते हैं कि इस गांव को मिनी लंदन क्यों कहा जाता है तो दोस्तों दरअसल बात यह है कि सन 1930 में एक एंग्लो इंडियन बिजनेसमैन ने इस गांव की नींव रखी थी जिनका नाम एरनेस्ट तिमोथी मैक्लुस्की था।

कहा जाता है कि सन 1930 में झारखंड के राजू महाराज से मैक्लुस्की ने 10000 एकड़ जमीन लीज पर ली थी।

मैक्लुस्कीगंज में लगभग 365 परिवार रहते हैं जो एंग्लो इंडियन हैं।

दरअसल उस समय के दौरान अंग्रेजी सरकार ने एंग्लो इंडियन नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया जिसके बाद एंग्लो इंडियन समुदाय के सामने बहुत बड़ी चुनौती आ गई। इस परिस्थिति में मैक्लुस्की ने अपने एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए इस गांव को बसाया जिसके बाद न सिर्फ आसपास के बल्कि दूर-दूर से एंग्लो इंडियन यहां रहने लगे।

क्योंकि इस गांव को मैक्लुस्की  ने बसा या था इसलिए इसको मैक्लुस्कीगंज नाम दिया जाने लगा।

क्योंकि इस गांव में एंग्लो इंडियन बसे हुए हैं जिसके कारण उन्होंने बहुत ही आकर्षक इमारतें बनाए हुए हैं जो पश्चिमी सभ्यता से मिलान करते हैं इतना ही बल्कि यह पूरा गांव पश्चिमी सभ्यता से भरपूर है जिसके कारण इसे मिनी लंदन या इंग्लैंड का कर बुलाया जाता है।

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