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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2022, आइये जाने इसके पीछे का इतिहास | International Women Day history in hindi

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समाज को विकास की नई राह दिखाने के लिए किसी भी समाज में महिलाओं और पुरुषों का योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण होता है। हालांकि काफी लंबे समय से हमारे समाज में महिलाओं को उतनी मान्यता नहीं दी जाती जितना कि पुरुष वर्ग को दिया जाता है लेकिन आजकल ऐसा कुछ नहीं है। हमारे समाज में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दे रही हैं और समाज के कल्याण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रही हैं।

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इन्हीं महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु और इन्हें जागृत करने के लिए प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। शुरू से ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ने महिलाओं को जागरूक करने के लिए और उन्हें सशक्त बनाने के लिए अपना बहुत विशेष योगदान दिया है।

कविता- अबला अब बलवान हुई | mahila diwas par kavita

विषय–सूची

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर निबंध (International Women Day Facts & history hindi)

कब और कैसे मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस –

इस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। इस अखिल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को उनकी सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों से परिचित कराया जाता है और उन्हें जागरूक और प्रेरित किया जाता है कि वह समाज मैं समान रूप से अपनी भूमिका निभा सके और महिलाओं के खिलाफ होने वाले शोषण से लड़ सके।

इस दिन खासकर विभिन्न स्थानों पर रोजगार करने वाली महिलाओं को एक दिवसीय अवकाश प्रदान किया जाता है और विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके जरिए महिला सशक्तिकरण की आवश्यकताओं को समझने के लिए और इनसे जुड़े ऐतिहासिक कदमों को उठाने के लिए विचार किया जाता है।

वैसे तो हम सबको पता है कि 8 मार्च का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन आज भी बहुत से लोगों को इससे जुड़े हुए इतिहास और इसके महत्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है। आज इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, International Women Day

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास, इसको मनाने की शुरुआत कैसे हुई?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत महिलाओं के प्रदर्शन आंदोलन से जुड़ी हुई है। दरअसल 28 फरवरी सन 2007 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में तकरीबन 15000 महिलाओं ने एक साथ मिलकर एक प्रदर्शन किया था। अपने इस आंदोलन में उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी में एक मार्च निकालकर महिला वर्ग के लिए समाज में और नौकरियों में पुरुषों के समान अधिकार और मतदान का अधिकार पाने की मांग की थी।

ठीक इसी घटना के 1 साल बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ने 28 फरवरी के इस दिन को उन महिलाओं के प्रदर्शन के सम्मान में राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में घोषित कर दिया।लेकिन बाद में यह राष्ट्रीय महिला दिवस फरवरी के अंतिम सप्ताह के रविवार के दिन मनाया जाने लगा।

कैसे हुई अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की पहली पहल 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की पहल करने वाली महिला क्लारा जेटकिन थी जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव पहली बार रखा था।

दरअसल उस समय दुनिया के बहुत से ऐसे देश है जहां पर महिलाओं को मताधिकार नहीं था। वैसे अगर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की बात की जाए तो यह भी महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाने से संबंधित था। क्लारा जेटीकन ने सन 1910 में बहुत सारी महिलाओं सम्मिलित करके एक सम्मेलन किया जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में 17 अलग-अलग देशों की कुल 100 महिलाएं शामिल हुई और यहीं से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के विषय में विचार किया गया। सर्वप्रथम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस स्वीटजरलैंड जर्मनी और डेनमार्क में सन 1911 में मनाया गया। धीरे धीरे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की ख्याति बढ़ती गई और सन 1917 में सोवियत संघ रूस ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में एक दिवसीय अवकाश रखा। धीरे धीरे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस संपूर्ण विश्व के विभिन्न देशों में फैल गया और मनाया जाने लगा।

क्या खास बात है 8 मार्च की, इसी दिन क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

वैसे तो शुरुआत में जब क्लारा जेटीकन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की घोषणा की थी तो उन्होंने इसके साथ किसी तारीख को नहीं जोड़ा था यानी कि कोई भी निश्चित तारीख नहीं बताई गई थी जिस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है,

आपको बता दें कि दरअसल सन 1917 के दौरान जब रूस में रूसी क्रांति हो रही थी उस समय महिलाओं ने ब्रेड एंड पीस के नाम से भूख हड़ताल किया था और वहां के क्रूर शासक निकोलस को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इसी घटना के बाद वहां की अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मताधिकार दे दिया। दरअसल जिस दिन इन महिलाओं ने सामूहिक रुप से ब्रेड एंड पीस के नाम से भूख हड़ताल की शुरुआत की थी उस दिन रूस की जूलियन कैलेंडर में 23 फरवरी की तारीख थी। जबकि उस समय सारी दुनिया के दूसरे देशों में ग्रेगीरियन कैलेंडर चलता था जिसमें यह तारीख 8 मार्च की थी यही कारण है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को 8 मार्च के दिन मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता –

हालांकि रूस डेनमार्क जर्मनी और स्विट्जरलैंड देशों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने की थी।

सन 1975 की बात है जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने की आधिकारिक घोषणा की थी। तभी से विश्व के संपूर्ण देशों में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के दिन मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य एवं महत्व –

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को विभिन्न उद्देश्यों के साथ प्रतिवर्ष 8 मार्च के दिन मनाया जाता है। जब महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी उस समय इसका तत्कालीन उद्देश्य महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाना था लेकिन समय के साथ इसका उद्देश्य और महत्व दोनों बढ़ता चला गया है। आज महिलाओं के उत्थान संबंधी और समाज में उनके योगदान को प्रेरित करने के लिए विभिन्न प्रकार के उद्देश्य नियोजित करके अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

1. महिलाओं को समाज में समानता –

हालांकि समय के साथ समाज में महिलाओं के योगदान में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है आज महिलाएं पुरुष वर्ग के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं लेकिन आज भी विश्व में कई ऐसे देश हैं और कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर समाज में महिलाओं का योगदान नगण्य है या फिर कह लीजिए कि महिलाओं को पुरुषों से कम आंका जाता है उन्हें पुरुषों के समान सभी अधिकार प्राप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य है कि समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान अवसर और स्थान दिया जा सके।

2. महिलाओं को स्वावलंबी बनाना –

आज भी भारत और अन्य देशों मैं विभिन्न समाजों की ज्यादातर महिलाएं अपनी जरूरतों के लिए पुरुषों पर निर्भर होती हैं जहां उन्हें स्वरोजगार की स्वतंत्रता नहीं होती। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का एक उद्देश्य भी है कि महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा सके ताकि वह अपने बल पर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। इसे मनाने का एक उद्देश्य भी है कि महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए विभिन्न प्रकार के जागरूकता अभियान चलाया जा सके ताकि वह बिना किसी पर निर्भर रहे अपनी रक्षा स्वयं कर सके।

3. महिलाओं को उच्च शिक्षा –

दुनिया के कई देश आज भी ऐसे हैं जहां महिलाओं को उच्च शिक्षा नहीं मिल पाती और उच्च शिक्षा के अभाव में हमेशा उनका शोषण होता रहता है समाज में उनकी समान रूप से भूमिका बनाए रखने के लिए उनका शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने का एक उद्देश्य यह भी है कि महिलाओं को शिक्षित बनाने के लिए कुछ प्रयास किए जा सके एवं शिक्षा के प्रति उन्हें जागरूक किया जा सके ताकि किसी भी समाज में किसी भी महिला का शोषण न किया जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 थीम (International Women Day Themes in hindi)

प्रत्येक वर्ष जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस नजदीक आता है तो इसे मनाने के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है और उसी को टारगेट करके विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक विशेष थीम्स (Theme) रखने का सिलसिला सन 1996 से लगातार चला आ रहा है। 1996 में वुमेड डे की थीम जश्न और भविष्य के लिए योजनाओं से संबंधित थे। लेकिन हर बदलते साल के साथ इसकी थीम बदलती है और हर बार कुछ नया लक्ष्य बनाकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

2019 मैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की थीम “थिंक इक्वल बिल्ड स्मार्ट, इन्नोवेट फॉर चेंज” से संबंधित थे जिसमें महिलाओं को समाज में पुरुष वर्ग के सामान लाकर खड़ा करना और उन्हें मजबूती प्रदान करना उद्देश्य था।

जबकि सन 2020 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम का नाम ईच फॉर इक्वल था।

बीते साल सन 2021 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम महिलाओं का कोविड-19 के दौरान नेतृत्व और भविष्य में इसके प्रति जागरूकता से संबंधित था।

इस वर्ष 2022 में वुमेन की थीम gender equality today for a sustainable tomorrow रखी गई जोकि एक निश्चित और स्थिर कल के मध्यनजर आज लैंगिक समानता पर जोर देना है।

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से जुड़े अनमोल वचन –

1. जब एक पुरुष को शिक्षा दी जाती है तो केवल वह शिक्षित हो सकता है या उसकी वर्तमान पीढ़ी लेकिन जब एक स्त्री की शिक्षा सुनिश्चित की जाती है तो उसकी वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी दोनों शिक्षित होती हैं।

2. समाज को वास्तविक रुप से गढ़ने वाले शिल्पकार महिलाएं होती हैं जो एक सुंदर समाज की स्थापना करते हैं।

3. किसी भी समाज की सभ्यता और संस्कृति की परख वहां की औरतों के आचरण से समझी जा सकती हैं।

4. किसी भी राष्ट्र को विकास के नए शिखर तक पहुंचाने के लिए उस राष्ट्र की महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

5. भीमराव अंबेडकर जी कहते थे कि किसी समाज की उन्नति का निर्धारण वहां की महिलाओं की स्थिति के आधार पर किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से संबंधित स्लोगन –

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रकार के स्लोगन एवं नारों के जरिए महिलाओं को उनकी भूमिका और उनकी वास्तविक आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जाता है। नीचे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से संबंधित कुछ स्लोगन  हैं।

ना अबला ना बेचारी है,
अब यह कलयुग की नारी है।

जब होगा महिला का योगदान,
देश बनेगा तभी महान।

घर समाज का रखती मान,
नारी है संस्कृति की पहचान।

यदि बंधन के पार है नारी,
तो उन्नति का आधार है नारी।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विभिन्न वर्षो से मनाया जाता रहा है। लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर महिलाओं के साथ पुरुष वर्ग को भी जागरूकता की उतनी की आवश्यकता है जितना कि महिलाओं को है। समाज के पुरुष वर्ग को चाहिए कि वह महिलाओं को समाज के सभी कार्यों में समान अवसर प्रदान करें और उन्हें शिक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी दें ताकि उनका बहुमुखी विकास हो सके और समाज के निर्माण और उत्थान में महिलाएं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। हमें कुछ इस प्रकार प्रयास करना चाहिए कि आने वाले वर्षों में ऐसे किसी भी प्रकार के अभियान या जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने की आवश्यकता ही न पडे।

महिला दिवस पर कविता

कविता- अब यह कलयुग की नारी है | Mahila diwas par kavita
अब यह कलयुग की नारी है

ना अबला, ना बेचारी है,
अब यह कलयुग की नारी है 

शक्ति का अवतार यही है 
उन्नति का आधार यही है
इन्हें कोई कमजोर न समझें
शक्ति स्रोत का सार यही है

आदिकाल से ही औरतों की,
महिमा जग में न्यारी है
ना अबला ना बेचारी है
अब यह कलयुग की नारी है 

दो अवसर इन्हें भरने का
कदमों से कदम मिलाएंगी
एक स्त्री को शिक्षित कर दो
पीढ़ी शिक्षित हो जाएगी

जब-जब लड़ने की ठानी है
महिलाएं कभी न हारी है
ना अबला ना बेचारी है
अभी यह कलयुग की नारी है
अबला अब बलवान हुई

नारी है पुत्री, नारी है पत्नी,
नारी है भागिनी, नारी है जननी।
नारी ही सबसे महान हुई
अबला अब बलवान हुई।।

एक प्रश्न मेरा साहित्य से है,
जो नारी को अबला कहता है। 
निज नयनों का अवलोकन है, 
उनमें भी बल निधि रहता है।।

प्रायः काव्यों में देखा है,
नारी पर है अध्याय बना।
जब नारी बल का स्रोत हुई,
तो अबला क्यों पर्याय बना।।

निज जन के कल्याण हेतु, 
तन-मन-धन अर्पित करती है।
वह जननी है, संतान हेतु, 
सर्वस्व समर्पित करती है।।

वह कोमल चित कोमल ही है,
बस भुजा बदल चट्टान हुई।
अबला अब बलवान हुई,
अबला अब बलवान हुई।।

FAQ

प्रश्न- महिला दिवस 2022 की थीम क्या है?

उत्तर- वुमेन डे की थीम 2022 Gender Equality today for a sustainable tomorrow निश्चित की गई है।

प्रश्न-पहली बार महिला दिवस कब मनाया गया था?

उत्तर- सबसे पहले यह 28 फरवरी सन् 1909 के दिन न्यूयार्क में मनाया गया था।

प्रश्न-महिला दिवस को मान्यता कब दी गई?

उत्तर- सन 1975 में सयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अधिकारिक रुप से मान्यता मिली।

प्रश्न-क्या पुरुष दिवस (International Mens Day) भी मनाया जाता है?

उत्तर-जी हाँ पुरुष दिवस हर साल 19 नवंबर के दिन होता है।

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