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सिंगर भूपिंदर सिंह का जीवन परिचय, निधन | Singer Bhupinder Singh Biography in Hindi

भूपिंदर सिंह कौन थे?, भूपिंदर सिंह का जीवन परिचय, जीवनी, निधन, आयु, अवार्ड, फिल्म, परिवार, पत्नी, विवाह (Singer Bhupinder Singh biography in hindi, Bhupinder Singh life Story, career, age, birth, lifetime achievements awards in Hindi)

भारतीय संगीत के जानें माने गायक और संगीतकार भूपिंदर सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है। 18 जुलाई की शाम लगभग 7:45 PM बजे उनका देहांत हो गया। अपने निधन के पहले से ही तबियत बिगड़ने के बाद वह मुंबई के क्रिटिकेयर हास्पिटल में भर्ती थे वहीं इनका निधन हो गया।

भूपिंदर सिंह मुख्य रुप से गजल गायन के लिए जाने जाते थे साथ ही साथ वह एक सुप्रसिद्ध गजलकार भी थे। इसके अलावा भूपिंदर सिंह जी बालीवुड के पार्श्व संगीत के गायन के लिए भी जाने जाते थे। इन्होंने जगजीत सिंह जी की तरह ही कई गजलकारों की गजलों को अपना स्वर दिया। इनके साथ ही साथ इनकी पत्नी मिताली सिंह भी भारतीय और बंगलादेशी गायिका के रुप में जानी जाती हैं।

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तो आइए आज इस आर्टिकल के जरिए हम इनकी जिन्दगी से जुड़े हुए किस्से आपको सुनाते हैं।

भूपिंदर सिंह का जीवन परिचय (Singer Bhupinder Singh Biography in Hindi)

असली नाम (Real Name)भूपिंदर सिंह
प्रसिद्धी का कारण गजल गायक
जन्म (Date of Birth)6 फरवरी 1940
जन्म स्थान (Place of Birth)अमृतसर , पंजाब 
आयु82 वर्ष (2022)
मृत्यु का कारणकार्डियक अरेस्ट
मृत्यु की तारीख18 जुलाई 2022
पेशापार्श्व गायिक, गजल गायक, संगीतकार (Playback Singer)
परिवार (Family Details)
पिता (Father Name)प्रोफेसर नाथ सिंहजी
पत्नी का नाम (Wife Name)मिताली मुखर्जी
बेटा (Son)निहाल सिंह
वैवाहिक स्थितिवैवाहिक

गायक भूपिंदर सिंह का प्रारम्भिक जीवन

भारतीय संगीतकार भूपिंदर सिंह का जन्म 6 फरवरी 1940 को अमृतसर पंजाब में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रोफेसर नाथ सिंह था और इन्हे संगीत की शिक्षा भी अपने पिता से ही मिली थी। इनके पिता जी उस समय के जाने माने संगीतकार थे। लेकिन वह बहुत सख्त आचरण के व्यक्ति थे। भले ही भूपिंदर सिंह को अपने गायन की मूल और शुरुआती शिक्षा अपने पिता से मिली थी लेकिन उनके कठोर आचरण के कारण धीरे धीरे इन्हें संगीत से चिढ़ सी होने लगी थी।

लेकिन अपने शुरुआती करियर से ही यह आल इंडिया रेडियो से जुड़ गए थे। साथ ही साथ इनका जुड़ाव दिल्ली में स्थित दूरदर्शन केंद्र से भी हो गया था। संगीत गायन के साथ ही साथ भूपिंदर सिंह जी ने संगीत गायन के लिए गिटार और वायलिन भी सिख लिया था।

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भूपिंदर सिंह की गायिकी व फिल्मी सफर (Bhupinder Singh career as a singer)

अपने गायन के शुरुआती दिनों में ही भूपेंद्र सिंह को गजलें गाने का काफी शौक चढ गया था। इसीलिए धीरे-धीरे उन्होंने गजलें गाना भी शुरू कर दिया था।

साल 1964 में संगीत के जाने-माने निर्देशक मदन मोहन जी ने भूपेंद्र सिंह की आवाज सुनी। मदन मोहन सतीश भाटिया द्वारा आयोजित डिनर प्रोग्राम में गए थे जहां पर उन्होंने पहली बार भूपेंद्र सिंह की आवाज सुनी थी। भूपेंद्र सिंह की आवाज सुनने के बाद संगीत निर्देशक मदन मोहन जी उनसे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने उन्हें मुंबई बुला लिया। दरअसल उस समय सतीश भाटिया जी दिल्ली के दूरदर्शन केंद्र पर आकाशवाणी निर्माता थे और उसी दौरान भूपेंद्र सिंह उनके लिए गिटार बजाते थे। इसी दौरान मदन मोहन ने भूपेंद्र सिंह की आवाज आकाशवाणी पर सुनी थी।

मुंबई बुलाने के बाद मदन मोहन ने भूपेंद्र सिंह को चेतन आनंद की फिल्म हकीकत में मोहम्मद रफी के साथ गाने का मौका दिया। चेतन आनंद की हकीकत में भूपेंद्र सिंह ने “होके मजबूर मुझे उसने बुलाया होगा” गाना गाया जो उस समय काफी हिट हुआ। हालांकि भले ही यह गाना काफी हिट रहा लेकिन भूपेंद्र सिंह को इससे ज्यादा पहचान नहीं मिली। इस गाने के बाद उन्होंने कई और छोटी मोटी फिल्मों में कम बजट पर गाने गाए।

इसके बाद धीरे धीरे कई फिल्मों में छोटे-छोटे गीतों को गाते गाते इनकी मुलाकात राहुल देव बर्मन से हुई और धीरे-धीरे ही यह उनके अच्छे दोस्त बन गए। राहुल देव बर्मन का अच्छा दोस्त बनने के बाद यह उनके आर्केस्ट्रा ग्रुप में शामिल हो गए। इस आर्केस्ट्रा ग्रुप में शामिल होने के बाद इन्होंने दम मारो दम और अन्य कई लोकप्रिय गानों के लिए गिटार बजाया।

राहुल देव बर्मन ने अच्छा दोस्त होने के कारण भूपेंद्र सिंह को गुलजार की फिल्म परिचय में गाने का मौका दिया। यह फिल्म साल 1972 में बनाई गई थी। परिचय फिल्म में भूपेंद्र सिंह ने दो गाने बेटी का विदाई रहना और मितवा बोले मीठे  बाई गाए गाए। इन्हीं दोनों गानों के कारण भूपेंद्र सिंह को संगीत की दुनिया में एक नई पहचान मिली और वह लोगों के बीच में जाने जाने लगे।

इन दोनों गानों के बाद गुलजार की फिल्मों में गाना गाने का सिलसिला जारी रहा। इन दोनों के बाद ही मैंने गुलजार की कई फिल्मों में “दिल ढूंढता है”, “नाम गुम जाएगा” और “एक अकेला इस शहर में” जैसे गाने गाए।

शुरुआत में तो यह कई फिल्मों के लिए और कई दूसरे एल्बम ओं के लिए गाते रहे लेकिन जैसे ही इन्हें काफी प्रसिद्धि मिल गई इन्होंने अपना एल्बम रिलीज करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने पहले एल्बम में तीन खुद से लिखे हुए गाने गाए जो 1968 में रिलीज हुए।

साल 1978 में उन्होंने अपना दूसरा एलपी गजलों के साथ प्रस्तुत किया। साल 1980 में इन्होंने अपना तीसरा एलपी रिलीज किया जिसका शीर्षक “वह जो शायर था” था।

उनके तीसरे गजल एलपी के लिए गुलजार ने गीत लिखे थे। साल 1980 में ही इन्होंने बांग्लादेश संगीत गायिका मिताली मुखर्जी से शादी कर ली। शादी के बाद से ही यह बॉलीवुड के पारसू गायन से बिल्कुल दूर हो गए और साथ में परफॉर्म करने लगे। शादी के बाद मिताली मुखर्जी और भूपेंद्र सिंह दोनों एक साथ गजल और लाइव प्रदर्शन करने लगे।

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भूपेंद्र सिंह का परिवार

भूपेंद्र सिंह के पिता का नाम प्रोफ़ेसर नत्था सिंह था जो कि एक प्रसिद्ध संगीतकार थे। संगीत के प्रारंभिक सीख इन्हें अपने पिता से ही मिली। हालांकि इनके माता का नाम अभी तक ज्ञात नहीं है। उनकी पत्नी का नाम मिताली मुखर्जी है जो बांग्लादेशी गायिका थी। इनका एक पुत्र भी है जिसका नाम निहाल सिंह है वह भी एक संगीतकार है।

भूपेंद्र सिंह के कुछ चर्चित नगमे –

अपने करियर के दौरान भूपेंद्र सिंह ने बॉलीवुड के बहुत से गीतों के लिए गाया साथ ही साथ उन्होंने बहुत सारे गजलकारों की गजलों को अपनी आवाज और अपना संगीत दिया।

इन्होंने निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल “कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कभी जमीं तो कभी आसमां नहीं मिलता” को अपनी आवाज दी थी। भूपेंद्र सिंह द्वारा निदा साहब की गाई गई यह ग़ज़ल काफी सराही गई।

इसके अलावा उन्होंने “किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है” जैसी फेमस गज़ल को गाया। इसके अलावा इन्होंने गुलजार द्वारा लिखे गए गीत “दिल ढूंढता है” “एक दीवाना इस शहर में” ” नाम गुम जाएगा” “करोगे याद तो”जैसी बेहतरीन गजलें और गीतों को अपनी आवाज दी। इन्होंने अपना खुद का एल्बम भी प्रोड्यूस किया जिसमें उन्होंने खुद से लिखे हुए गीत भी गाए।

भूपेंद्र सिंह की मृत्यु कब हुई?

बेहतरीन गजलों को अपनी आवाज देने के बाद जाने माने संगीतकार भूपेंद्र सिंह इस दुनिया को छोड़ कर चल बसे। 18 जुलाई की शाम 7:45 के करीब भूपेंद्र सिंह की क्रिटी केयर अस्पताल में मृत्यु हो गई।

इनकी पत्नी मिताली मुखर्जी ने इस बात की जानकारी मीडिया को दी और साथ ही यह भी बताया कि 19 जुलाई को इनका अंतिम संस्कार होगा। स्रोतों के मुताबिक यह पता चला है कि उन्हें कई दिनों से पाचन तंत्र और उत्सर्जन तंत्र से संबंधित कोई बीमारी थी।

अपने निधन के 10 दिन पहले ही उन्हें एक्स्क्रेटरी सिस्टम में इन्फेक्शन होने के कारण क्रिटी केयर अस्पताल मुंबई में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान इनके कोविड 19 संक्रमण होने की बात भी कही गई है। 18 जुलाई की देर शाम लगभग 7:45 के करीब भारत का यह मशहूर संगीतकार इस धरती को छोड़कर चला गया। भूपेंद्र सिंह का निधन भारतीय सिनेमा जगत और संगीत जगत के लिए बहुत बड़ा झटका है वह अपनी बेहतरीन गजलों को आवाज देने के कारण हमेशा याद किए जाएंगे।

FAQ

भूपेंद्र सिंह कौन थे?

भूपेंद्र सिंह एक भारतीय संगीतकार थे जो गजल और पार्श्व संगीत गायन के लिए प्रसिद्ध थे। इन्होंने  “किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है” जैसे गजलों को अपनी आवाज दी है।

भूपेंद्र सिंह की पत्नी कौन है?

भारतीय संगीतकार और गजल गायक भूपेंद्र सिंह की पत्नी का नाम मिताली मुखर्जी है जो पहले बांग्लादेशी संगीतकार थी लेकिन विवाह के बाद इन्होंने भूपेंद्र सिंह के साथ स्टेज परफॉर्म करना शुरू कर दिया था।

भूपेंद्र सिंह के बेटे का क्या नाम है?

भूपेन्द्र सिंह के बेटे का नाम निहाल सिंह है जो खुद भी एक संगीतकार हैं।

भूपेंद्र सिंह ने कौन से गाने गाए हैं?

भूपेंद्र सिंह ने निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता को अपनी आवाज दी है। इसके अलावा इन्होंने “किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है” जैसी बेहतरीन गजल को अपनी आवाज दी है साथ ही साथ दिल ढूंढता है और अन्य कई गाने भी गाए हैं।

भूपेंद्र सिंह की मौत कब हुई?

18 जुलाई 2022 की शाम को भूपेंद्र सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उत्सर्जन तंत्र में संक्रमण के कारण वह अस्पताल में भर्ती कराए गए थे और मुंबई के क्रिटी केयर हॉस्पिटल में ही इनकी मृत्यु हो गई।

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