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आइये जाने क्या हैं भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं चुनाव की पूरी प्रक्रियाँ | Indian President election process in hindi

भारत के राष्ट्रपति को मिलने वाली शक्तियाँ, सुविधाएं, कैसे किया जाता है राष्ट्रपति का चुनाव (Indian President election process in hindi , salary, pension and other royal facility of a Indian President)

15 अगस्त 1947 को देश के आजाद हो जाने के उपरांत भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना हुई। भारतीय संविधान के अनुसार भारत का प्रथम और सर्वोच्च नागरिक भारत का राष्ट्रपति होता है।

यह भारतीय सदन के तीन भागों में से एक है इसके अलावा इसमें उच्च सदन और निम्न सदन भी शामिल है। देश के सर्वोच्च और प्रथम नागरिक होने के कारण भारतीय राष्ट्रपति के पास कुछ विशेष शक्तियां होती हैं और कुछ विशेष कार्य भी होते हैं। शक्तियों और कार्यों में विशेषता के साथ-साथ राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया भी काफी जटिल होती है।

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21 जुलाई 2022 को द्रौपदी मुर्मू को एनडीए उम्मीदवार के तौर पर राष्ट्रपति पद के लिए विजेता घोषित किया गया है। एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू भारी बहुमत से राष्ट्रपति के चुनाव में विजयी हुई हैं। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के ही रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद पर थे। रामनाथ कोविंद के कार्यकाल की समाप्ति के बाद अब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया है।

ऐसे में लोगों के मन में राष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े हुए कई सवाल उठ रहे होंगे। जैसे कि राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है, राष्ट्रपति का वेतन कितना है, राष्ट्रपति की शक्तियां कौन-कौन सी हैं और राष्ट्रपति के क्या-क्या कार्य है ?

लोग राष्ट्रपति पद की विशेषताओं और कार्य शक्तियों के बारे में जानना चाहते हैं। तो आइए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आप से राष्ट्रपति से संबंधित सभी जुड़ी हुई सभी जानकारियां साझा करते हैं।

विषय–सूची

भारत के राष्ट्रपति की शक्तियाँ एवं चुनावी प्रक्रियाँ (Indian President election process in hindi)

भारत का राष्ट्रपति भारत का सर्वोच्च नागरिक होता है जिसे विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। भारतीय संविधान के तीन प्रमुख अंग होते हैं जिनमें विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका शामिल है। भारतीय संघ की कार्यपालिका की शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं।

देश में प्रधानमंत्री उच्चतम न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और सभी राज्यों के राज्यपाल समेत अलग-अलग पदों पर नियुक्ति करने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है। इसके अलावा राष्ट्रपति के पास देश में आपातकाल अर्थात इमरजेंसी से जुड़ी हुई शक्तियां होती है इसके साथ ही साथ बहुत सी सैन्य शक्तियां भी होती हैं।

आइए सबसे पहले भारतीय राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया को समझते हैं।

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कैसे किया जाता है भारत के राष्ट्रपति का चुनाव

अप्रत्यक्ष प्रक्रिया से किया जाता है चुनाव –

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 तथा 55 में राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित उल्लेख किया गया है जिसके अनुसार भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। इस कथन का तात्पर्य है कि राष्ट्रपति के चुनाव में देश की आम जनता सीधे भाग नहीं लेती। अप्रत्यक्ष चुनाव एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें जनता द्वारा प्रत्याशित जनता के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। इन जनप्रतिनिधियों में राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में शामिल किया जाता है।

राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा सभी राज्यों के विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। हालांकि इस निर्वाचन मंडल में सदनों के नामित सदस्य और विधान परिषद के सदस्य हिस्सा नहीं लेते। ऐसा इसलिए क्योंकि अप्रत्यक्ष निर्वाचन में केवल वही प्रतिनिधि भाग लेते हैं जो सीधे जनता द्वारा निर्वाचित होते हैं जबकि इनमें सदनों के नामित सदस्य और विधान परिषद के सदस्य नहीं आते क्योंकि विधान परिषद के सदस्यों को राज्य स्तर पर जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाता है।

इतना ही नहीं भारतीय संविधान के 70 में संशोधन 1992 के अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में दिल्ली पुदुचेरी और अन्य संघ राज्यों को जोड़ा गया।

राष्ट्रपति के अप्रत्यक्ष निर्वाचन के पीछे कुछ प्रमुख अवधारणाएं हैं जिन्हें आधार मानकर राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से संविधान में निर्धारित किया गया। भारत की विशालकाय जनसंख्या के कारण भारत में प्रत्यक्ष निर्वाचन में काफी खर्च बैठता है इसके अलावा समय की भी अत्यधिक खपत होती है। ऐसे में इन्हीं सब कारणों को देखते हुए राष्ट्रपति के निर्वाचन की अप्रत्यक्ष व्यवस्था को चुना गया।

राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए नामांकन –

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की सूची में अपना नाम दाखिल करने के लिए उम्मीदवार को 50 प्रस्तावक निर्वाचक मंडल के सदस्यों और 50  समर्थकों की आवश्यकता होती है। इससे कम प्रस्तावक अथवा समर्थक होने पर कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए अपना नामांकन नहीं कर सकता।

राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया –

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 55 में राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित समस्त जानकारियों का उल्लेख मिलता है।

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया  में ‘एकल संक्रमणीय मत‘ द्वारा ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्‍व‘ की पद्धति का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति को चुनने का सबसे बड़ा कारण यह है कि निर्वाचित राष्ट्रपति अनुपात की दृष्टि से ज्यादातर लोगों की पसंद हो।

राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति के लिए एक विशेष फार्मूला तैयार किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि भारत की सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों का मत मूल्य और भारत के दोनों सदनों के सांसदों का मत मूल्य एक दूसरे के समान हो। राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया में इस फार्मूले को अपनाने का प्रमुख उद्देश्य यह है कि राज्यों की भूमिका उतनी ही हो जितनी की केंद्र की भूमिका होगी ऐसा होने से भारत की संघात्मक राज्य व्यवस्था का ढांचा मजबूत होगा।

  • संविधान के अनुच्छेद  55(2) में इस पद्धति का विवरण दिया गया है जिसके अनुसार सदन के सदस्यों और विधानसभा के सदस्यों के मध्य में समतुल्य ता लाने के लिए सबसे पहले विधायकों के मत मूल्य की गणना की जाएगी। विधायकों की मत मूल्य की गणना के लिए निम्न सूत्र का उपयोग किया जाता है।
  • 1 विधायक का मत मूल्‍य = (राज्‍य की कुल जनसंख्‍या)/(राज्‍य विधानसभा के निर्वाचित  सदस्‍यों की कुल संख्‍या ) × 1/1000
  • इसके साथ ही इस अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि अगर इस घटना में शेषफल 500 से कम आता है तो उसे वैसे ही छोड़ दिया जाना चाहिए लेकिन अगर ज्यादा आता है तो उसमें एक जोड़ कर मत मूल्य की गणना करनी चाहिए।
  • इसी पद्धति के अनुसार विधानसभा के प्रत्येक विधायकों का मत मूल्य निकाल कर एक साथ जोड़ दिया जाता है। यह बात भी ध्यान देने योग्य है यदि राष्ट्रपति चुनाव के समय विधानसभा भंग हो जाती है या विधानसभा में किसी विधायक का पद रिक्त रहता है तो ऐसी स्थिति राष्ट्रपति के चुनाव को बाधित नहीं करती।
  • सभी राज्यसभाओं की विधायकों का मत मूल्य निकालने के पश्चात सदन के सदस्यों के मत मूल्य की गणना की जाती है।
  • सांसदों के मत मूल्य की गणना करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का उपयोग किया जाता है।

1 सांसद का मत मूल्‍य = (सभी राज्‍यों के सभी निर्वाचित विधायकों के मतों का कुल मूल्‍य)/(संसद के निर्वाचित सदस्‍यों की कुल संख्‍या

  • जब सभी विधायकों और सांसदों के मध्य मूल्यों की गणना की जाती है फिर उसके बाद राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए कोटे का निर्धारण किया जाता है। कोटे के निर्धारण के लिए एकल संक्रमणीय प्रक्रिया अपनाई जाती है।
  • आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव का विजेता हुआ नहीं बन सकता जिसे सर्वाधिक वोट मिलते हैं बल्कि राष्ट्रपति पद का विजेता बनने के लिए आपको निर्धारित कोटे से अधिक मत की आवश्यकता होती है।
  • राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया के लिए कोटे का निर्धारण करते समय उम्मीदवार को मिले सभी मत मूल्यों को जोड़ दिया जाता है तत्पश्चात उसमें 2 से भाग दे दिया जाता है और अंत में 1 जोड़कर निर्धारित कोटा तय किया जाता है।
  • डाले गये कुल मतों की संख्या / कुल स्थानों की संख्या +1 ) + 1 = कोटा
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए इस निर्धारित कोटे से ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति पद का विजेता होता है।

इन्हें भी जानें

राष्ट्रपति पद के विजेता कैसे तय किया जाता है –

ऊपर हमने चर्चा की कि राष्ट्रपति पद के विजेता को कोटे के निर्धारित मतों से ज्यादा मत की जरूरत होती है।

राष्ट्रपति उम्मीदवार पद के लिए अगर किसी को निर्धारित कोटे से कम मत मूल्य मिलते हैं तो उसे राष्ट्रपति चुनाव से अलग कर दिया जाता है और उसके द्वारा प्राप्त किए गए मतपत्रों को पसंद के आधार पर शेष उम्मीदवारों को बांट दिया जाता है। इस प्रक्रिया का अनुसरण लगातार तब तक किया जाता है जब तक किसी एक उम्मीदवार को निर्धारित कोटे से अधिक मत नहीं मिल जाता और परिणाम स्वरूप उसे ही विजई घोषित कर दिया जाता है।

राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए योग्यताएं –

भारतीय संविधान में समस्त संवैधानिक पदों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों के लिए उनकी अर्हताए निर्धारित की गई है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए योग्यताओं का उल्लेख किया गया है इन योग्यताओं में निम्नलिखित बातें शामिल हैं।

  • राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भारत का नागरिक हो।
  • उस की न्यूनतम आयु 35 वर्ष हो।
  • लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।
  • किसी अन्य आधिकारिक सरकारी लाभ के पद पर ना हो।
  • राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार मानसिक रूप से स्वस्थ हो अर्थात दिवालिया या पागल ना हो।
  • राष्ट्रपति की शक्तियां और उसके कार्य –
  • भारत के राष्ट्रपति को अलग-अलग विषयों पर अलग-अलग शक्तियां और कार्यों का विभाजन किया गया है।

राष्ट्रपति की प्रशासनिक शक्तियां क्या होती है? (Power of a Indian President in hindi)

भारतीय संघ के कार्यपालिका की समस्त शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं।

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की विशेष शक्तियों और उसके कार्यों का उल्लेख किया गया है। भारतीय संविधान के 53 अनुच्छेद में कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद और मुख्य न्यायाधीश के सलाह पर विभिन्न उच्च अधिकारियों की नियुक्ति करता है और साथ ही उन्हें पद से हटाने का भी अधिकार रखता है।

भारत का राष्ट्रपति मंत्री परिषद के सदस्यों की सलाह पर भारत के प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है। इतना ही नहीं मंत्रिपरिषद और प्रधानमंत्री की नियुक्ति के अलावा या भारत के महान्यायवादी महालेखा परीक्षक विभिन्न राज्यों के राज्यपाल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त भारतीय वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी करता है।

भारत का राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है और इसी मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर भारत के उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति भी करता है। इसके साथ ही साथ विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास होता है।

हालांकि यह बात ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रपति अपने विवेक से किसी भी पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सकता बल्कि वह मंत्रिमंडल अथवा मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर ही यह कार्य कर सकता है।

राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियां क्या है?

  • भारत का राष्ट्रपति भारत की तीनों तीनों सेनाओं थल सेना जल सेना और वायुसेना का प्रमुख होता है अर्थात सर्वोच्च कमांडर होता है।
  • भारतीय राष्ट्रपति को किसी भी देश के साथ युद्ध की घोषणा और युद्ध की शांति का अधिकार है।
  • परंतु भारतीय राष्ट्रपति की यह सभी शक्तियां अनौपचारिक हैं इन्हें वास्तविक शक्तियों के रूप में नहीं दिया गया है क्योंकि ऐसा करने पर राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का दुरुपयोग भी कर सकता है।
  • राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों का विवरण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 मे दिया गया है।

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां –

  • भारत का राष्ट्रपति भारतीय सदन का एक अंग है। भारतीय सदन में राष्ट्रपति के अलावा लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं।
  • भारत का राष्ट्रपति इन दोनों सदनों को सत्र के लिए बुला सकता है और सत्रावसान कर सकता है। भारतीय अनुच्छेद 108 में या उल्लेख किया गया है कि वह लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
  • इसके अलावा धन विधेयक को राष्ट्रपति के सिफारिश पर ही सदनों में प्रस्तुत किया जाता है। राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति और हस्ताक्षर के साथ ही कोई विधेयक कानून बनता है।

राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियां –

  • सदन के किसी भी अंग लोकसभा अथवा राज्यसभा में धन विधेयक की प्रस्तुति के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। राष्ट्रपति के सिफारिश पर ही इसे लोकसभा तथा राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाता है। इतना ही नहीं भारत का राष्ट्रपति प्रत्येक 5 वर्ष में केंद्र और राज्यों में राजस्व का विभाजन करने के लिए वित्त आयोग का गठन भी करता है।

राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियां –

  • भारत का राष्ट्रपति भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है। इसके अलावा भारतीय संविधान के 72 में अनुच्छेद के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी अपराधी के दंड की घोषणा के पश्चात उसके दंड को कम करने अथवा उसे माफ करने की शक्ति रखता है जिनमें मृत्यु दंड शामिल हैं।

राष्ट्रपति की वीटो पावर –

  • लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्तुत किए गए विधेयक जो वहां से पारित होते हैं बिना राष्ट्रपति के अनुमति के कानून नहीं बन सकते। किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति और हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत यह उल्लेख किया गया है कि किसी भी पारित विधेयक को राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करने के बाद उसके पास तीन विकल्प होते हैं या तो वह इस विधेयक को स्वीकृत कर कानून बना सकता है अथवा इस पर अपनी स्वीकृति को रोक सकता है या फिर इसे पुनर्विचार के लिए फिर से सदनों में भेज सकता है।
  • हालांकि भारतीय राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनः पुनर्विचार के लिए सदन में नहीं भेज सकता क्योंकि कोई भी धन विधेयक लोकसभा या राज्यसभा में राष्ट्रपति के पूर्व अनुमति के बाद ही प्रस्तुत किया जाता है।

आपातकालीन शक्तियां –

  • यदि भारतीय राष्ट्रपति को राष्ट्र के किसी भी भाग में युद्ध हुआ है आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह की कोई भी संभावना नजर आती है तो वह संपूर्ण देश में अथवा देश के किसी भी भाग में आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
  • आपातकालीन स्थिति में सारी शक्तियां राष्ट्रपति में निहित हो जाती हैं।

राष्ट्रपति को मिलने वाले सुविधाएं, वेतन, पेंशन

राष्ट्रपति का वेतन तथा भत्ता –

वैसे तो राष्ट्रपति भारत का सुप्रीम नागरिक होता है इसलिए उसे विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। लेकिन इसके साथ ही साथ राष्ट्रपति को विभिन्न प्रकार की विशेष सुख सुविधाएं भी दी जाती हैं।

राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने के बाद भारत का राष्ट्रपति यहां के राष्ट्रपति भवन में निवास करता है और भारत का राष्ट्रपति भवन दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रपति भवन भी है।

राष्ट्रपति का मासिक वेतन –

भारत का पहला नागरिक होने के कारण राष्ट्रपति को न केवल सर्वोच्च अधिकार प्राप्त होते हैं बल्कि सबसे अधिक वेतन भी दिया जाता है और उसके साथ बेहतरीन सुख सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं।

इस समय भारत के राष्ट्रपति का मासिक वेतन 5 लाख रूपए है। इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि राष्ट्रपति को इस आए पर किसी भी प्रकार का कर यानी कि टैक्स का भुगतान नहीं करना पड़ता। राष्ट्रपति के संपूर्ण आय पुरी तरह से टैक्स मुक्त होती है। इसके अलावा राष्ट्रपति को कई भत्ते भी दिए जाते हैं।

राष्ट्रपति का आवास –

भारतीय राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास को राष्ट्रपति भवन के नाम से जाना जाता है। यह भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित है। राष्ट्रपति भवन की खास बात यह है कि इस आवास 2 लाख वर्ग फुट में बनाया गया है जिसमें 340 कमरे हैं।

यहां पर 200 लोगों को दैनिक रोजगार पर रखा गया है। इसके अलावा आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां पर आए हुए मेहमानों के टिकने तथा उनके अभिवादन और खानपान की व्यवस्था करने में हर साल 22.5 मिलीयन का खर्च आता है।

राष्ट्रपति की सुरक्षा –

भारतीय राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्रा में उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं जिसमें उन्हें हथियारों से लैस लिमोजिन कार दी जाती है। इसके अलावा जब उनका काफिला निकलता है तो उनके साथ 25 और गाड़ियां होती हैं। भारतीय राष्ट्रपति के शारीरिक सुरक्षा के लिए उनके साथ 86 बॉडीगार्ड तैनात किए रहते हैं।

रिटायरमेंट के बाद भी मिलती हैं सुविधाएं –

राष्ट्रपति जब अपने पद से रिटायर हो जाते हैं तो उसके बाद भी उन्हें बहुत ही सुख सुविधाएं दी जाती हैं जैसे कि उन्हें डेढ़ लाख रुपए प्रति महीने की पेंशन दी जाती है इसके अलावा ही ₹60000 उन्हें और दिए जाते हैं ताकि वह अपने यहां रखे हुए स्टॉफ पर खर्च कर सकें। इसके साथ ही उन्हें जीवन भर रहने के लिए एक आवास दिया जाता है और दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी भी दी जाती है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति पद से रिटायरमेंट के बाद उन्हें हवाई यात्राओं के लिए और अन्य यातायात वाहनों में यात्राओं के लिए टिकट की जरूरत नहीं पड़ती।

तो आज इस आर्टिकल के जरिए हमने भारत के राष्ट्रपति के चुनाव चुनाव हेतु योग्यताएं और उनकी शक्तियों के बारे में चर्चा की उम्मीद करते हैं आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया होगा।

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