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Narco Test क्या होता है? क्यों और कैसे किया जाता है? | नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट में अन्तर | What is Narco and Polygraph Test meaning in Hindi?

Narco Test क्या होता है? नार्को टेस्ट के फायदे और नुकसान, नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट का क्या मतलब होता है। (All Information about narco and polygraph test in hindi, Narco and Polygraph Test meaning in Hindi)

देश में दिन-ब-दिन आपराधिक मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस समय हत्या (Murder) जैसे निर्मम, क्रूर और संगीन अपराध भी अपराधियों के लिए आम बात है। आए दिनों किडनैपिंग और मर्डर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।

बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ अपराधियों ने भी जुर्म के नए-नए तरीके अपना लिए हैं। तो वही पुलिस और क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों ने आपराधिक गतिविधियां को रोकने और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आपने न्यूज़ चैनलों या समाचार पत्रों के माध्यम से कभी ना कभी Narco Test और पॉलीग्राफ टेस्ट के बारे में सुना होगा।

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नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट किसी रोगी की जांच करने के लिए किए जाने वाले टेस्ट नहीं है बल्कि यह कुछ ऐसे टेस्ट हैं जो किसी आपराधिक वारदात में शामिल आरोपी शख्स की जांच करते हैं। आपराधिक मामलों में शामिल कोई भी आरोपी आसानी से अपने अपराध को कुबूल नहीं करता बल्कि अपने द्वारा किए गए जुर्म को किसी ना किसी तरीके से छिपाने की कोशिश करता है।

अपराधी पुलिस कस्टडी में आते ही वह झूठ बोलना, बहकाना और बहाने बनाना शुरु कर देते हैं ऐसे में पुलिस ऑफिसर और इन्वेस्टिगेशन एजेंसीयों को उनके साथ सख्ती से बर्ताव करना पड़ता है लेकिन ऐसा करने से केवल कुछ कमजोर अपराधी ही अपना जुर्म स्वीकार करते हैं जबकि ज्यादातर अपराधी पुलिस कस्टडी में टॉर्चर और आक्रामक बर्ताव के बावजूद अपने जुर्म को कुबूल करने से साफ इनकार कर देते हैं।

इन सब चीजों को देखते हुए पुलिस और इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा आरोपी के पॉलीग्राफ़ टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और Narco टेस्ट किए जाते हैं जिनके द्वारा आरोपियों का झूठ पकड़ा जा सकता है और उनसे सही जानकारियां निकाली जा सकती हैं।

तो आइए आज आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि Narco Test क्या है? Narco Test क्यों और कैसे किया जाता है? Narco और पॉलीग्राफ टेस्ट में क्या अंतर है?

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ब्रेन मैपिंग-Polygraph & Narco Test क्या होता है?

Polygraph & Narco Test क्या होता है? क्यों और कैसे किया जाता है? (What is Narco Test? & Polygraph & Narco Test Meaning in Hindi)

Narco Test एक ऐसा टेस्ट है जिसके जरिए आरोपियों से पूछताछ करके सच्चाई बुलवाई जाती है और किया गया अपराध कुबूल करवाया जाता है। Narco Test करने के बाद जुर्म करने वाले दोषी भी तोते की तरह सच बोलने लगते हैं। हाल ही में हुए लव जिहाद मामले के श्रद्धा मर्डर केस में आरोपी आफताब का Narco Test टेस्ट करने की मंजूरी दे दी गई है। तभी से Narco Test एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है और लोग इसके बारे में भली-भांति जानना चाहते हैं।

Narco एक यूनानी (Greek) शब्द है जिस का अंग्रेजी में मतलब Anesthesia और हिंदी में अर्थ बेहोशी या बेहोश होना होता है। हालांकि ज्यादातर मामलों में आरोपियों से अपराध की सच्चाई उगलवाने के लिए पुलिस सख़्त और आक्रामक तरीकों का इस्तेमाल करती है।

लेकिन Narco Test एक तरीके की गैर-आक्रामक मनोचिकित्सा तकनीक (Psychotherapeutic Technique) है जिसमें साइकॉट्रॉपिक दवाओं (Psychotropic Medicines) जैसे कि सोडियम पेंटोथल का इस्तेमाल किया जाता है और आरोपी को सोचने समझने की क्षमता से वंचित कर बेहोश कर दिया जाता है।

Narco Test का इस्तेमाल पुलिस और क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी अपराध की छानबीन करने के लिए करती हैं। इस टेस्ट के दौरान अपराध के आरोपी को सोडियम पेंटोथल नाम की दवा दी जाती है जिसके कारण आरोपी की सोचने समझने की क्षमता खत्म हो जाती है और आदमी बेहोश हो जाता है हालांकि इस स्थिति में उसका दिमाग काम करता रहता है।

ऐसी स्थिति में आरोपी शख्स सोच समझकर षड्यंत्र बनाकर झूठ नहीं बोल सकता बल्कि वह क्राईम इन्वेस्टिगेशन के सवालों का वही जवाब देता है जो पहले से उसके मस्तिष्क में मौजूद हैं जिन्हें उसने अंजाम दिया है। सोडियम पेंटोथल के प्रभाव में आरोपी सारे सवालों के सही जवाब देता है जो उसके दिमाग में आते हैं।

यही कारण है कि Narco Test के दौरान किसी अपराध के आरोपी की झूठ बोलने की संभावनाएं बहुत कम हो जाती हैं। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं कह सकते कि Narco Test के बाद कोई आरोपी झूठ नहीं बोल सकता। कुछ ऐसे आरोपी भी होते हैं जिनके भीतर अपने मस्तिष्क को नियंत्रण करने की क्षमता प्रबल होती है और वे इन परिक्षणों के दौरान भी झूठ बोल सकते हैं लेकिन ऐसा होने की संभावना बहुत कम होती है।

Narco Test के दौरान आरोपी को जो इंजेक्शन लगाया जाता है उसे Truth Serum के नाम से भी जाना जाता है जिसमें सोडियम पेंटोथल जैसी साइकॉट्रॉपिक दवाएं मौजूद होती हैं। इसे Anesthetist की मदद से आरोपी की नसों में इंजेक्ट करवाया जाता है उसके बाद सोडियम पेंटोथल के प्रभाव में अपराध से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं।

हालांकि Narco Test के दौरान विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं क्योंकि गलत डोज देने से इसमें आरोपी के कोमा में जाने की या फिर मौत होने की संभावनाएं भी रहती हैं। इसलिए नारको टेस्ट के दौरान दवा की मात्रा आरोपी की शारीरिक स्थिति, उम्र और लिंग के आधार पर दी जाती है। नारको टेस्ट करने से पहले आरोपी का मेडिकल चेकअप और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य होता है उसके बाद ही नारको टेस्ट करने की अनुमति मिल पाती है।

इतना ही नहीं नारको टेस्ट करने के लिए पुलिस और इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों को कोर्ट से अनुमति भी लेनी पड़ती है। बिना कोर्ट की सहमति के किसी भी आरोपी का नारको टेस्ट या पाली ग्राफ टेस्ट नहीं किया जा सकता।

नारको टेस्ट (Narco Test) और पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) में अंतर –

आपराधिक मामलों की छानबीन के दौरान झूठ पकड़ने के लिए और आरोपी से सच बुलवाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट तथा नारको टेस्ट किए जाते हैं। हालांकि कुछ लोग इन्हें लेकर कंफ्यूज रहते हैं और इन्हें एक ही समझ लेते हैं जबकि पॉलीग्राफ टेस्ट और नारको टेस्ट में काफी अंतर होता है। तो आइए अब आपको एक-एक करके बताते हैं कि आखिर Narco Test और पॉलीग्राफ टेस्ट में क्या अंतर है? (Difference Between Narco Test And Polygraph Test In Hindi)

  • पॉलीग्राफ का अर्थ होता है झूठ पकड़ने वाला यंत्र। यानी कि पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए केवल आरोपी के झूठ को पकड़ा जा सकता है लेकिन उससे सच नहीं बुलवा या जा सकता। जबकि Narco Test आरोपी को सच बुलवाने के लिए किया जाता है।
  • पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान आरोपी को किसी भी साइकोट्रापिक या रासायनिक दवा का डोज नहीं दिया जाता जबकि Narco Test के दौरान आरोपी को सोडियम पेंटोथल नाम की साइकॉट्रॉपिक दवा दी जाती है जिससे आरोपी बेहोश हो जाता है और सोचने समझने की क्षमता को बचता है।
  • पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान आरोपी व्यक्ति के हाव-भाव, ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और हार्ट रेट, आदि जैसी चीजों पर नजर रखी जाती है और उसका झूठ पकड़ा जाता है। जबकि नारको टेस्ट में आरोपी के सोचने समझने की क्षमता को बाधित कर दिया जाता है। इस स्थिति में आरोपी सोच समझ नहीं पाता और अपराध से संबंधित सभी सवालों के वही जवाब देता है जो उसके दिमाग में चल रहे होते हैं।

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क्या Narco Test और पॉलीग्राफ टेस्ट में आरोपी के सच बोलने की 100% गारंटी होती है?

कई बार लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या वाकई में नारको टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए आरोपी के 100% सच बोलने की गारंटी होती है? क्या नारको टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान कोई आरोपी झूठ नहीं बोल सकता?

तो इसका जवाब भी हमारे पास है। अगर विशेषज्ञों की बात माने तो इन टेस्टों को करने के बाद ऐसी कोई 100% गारंटी नहीं होती कि आरोपी सच ही बोल रहा है। क्योंकि अपराध की दुनिया में कुछ ऐसे अपराधी भी होते हैं जो अपनी भावनाओं और मस्तिष्क की दशाओं को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इस तरीके के आरोपी इन टेस्टों के दौरान भी झूठ बोल सकते हैं। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है की Narco Test का कोई महत्व नहीं।

ऐसा बहुत ही कम मामलों में होता है कि कोई आरोपी अपनी भावनाओं को नारको टेस्ट के दौरान कंट्रोल कर सके अन्यथा ज्यादातर आरोपी नारको टेस्ट के दौरान अपने सोचने समझने की क्षमता को बैठते हैं और सभी सवालों के सही सही जवाब देने लगते हैं तो उनके दिमाग में पहले से मौजूद होते हैं।

अब आइए नारको टेस्ट (Narco Test) के इतिहास पर भी एक नजर डाल लेते हैं कि आखिर नारको टेस्ट की शुरुआत कब हुई? पहला Narco Test कब किया गया? और भारत में इसका इस्तेमाल कब और किन मामलों में हुआ?

कब किया गया था पहला Narco Test –

यह बात बड़ी दिलचस्प है कि आखिर दुनिया में सबसे पहला Narco Test कब और कहां किया गया था? इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों के अनुसार दुनिया में सबसे पहला Narco Test सन् 1922 में संयुक्त राज्य अमेरिका के एक आपराधिक मामले की जांच में किया गया था।

साल 1922 में यूएस के टेक्सास शहर में 2 कैदियों पर पहली बार नारको टेस्ट का इस्तेमाल किया गया। इसका प्रयोग टेक्सास (Texas) के एक आब्सटेट्रेशियन (Obstetrician) डॉक्टर ने 2 कैदियों पर किया था जिसका नाम रॉबर्ट हाउस (Robert House) था।

दुनिया के इस पहले नारको टेस्ट में जिस साइकोट्रॉपिक दवा का इस्तेमाल किया गया थाउसका नाम Scopolamine था।

कहा जाता है कि इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी भारी मात्रा में पकड़े गए सैनिकों का नारको टेस्ट किया गया था। हालांकि इस दौरान कई ट्रामा स्ट्रेस डिसऑर्डर के लिए भी इसका इस्तेमाल किया गया था।

भारत में कब और किन मामलों में इस्तेमाल किया गया Narco Test–

  • कुछ न्यूज़ रिपोर्ट की मानें तो भारत में पहली बार नारको टेस्ट साल 2002 में गुजरात मेंहुए गोधरा कांड के मामले में करवाया गया था।
  • साल 2003 में इसका इस्तेमाल झूठे स्टैंप पेपर फ्रॉड मामले में अब्दुल करीम तेलगी नाम के आरोपी पर भी किया गया था।
  • साल 2007 में भी निठारी कांड को अंजाम देने वाले दो आरोपियों पर नारको टेस्ट किया गया था जिनका नाम मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली था।
  • साल 2008 में मुंबई में हुए 26/11 आतंकवादी हमले में भी पकड़े गए आरोपी अफजल कसाब का नारको टेस्ट कराया गया था।
  • इसके अलावा भी बड़ी बड़ी मर्डर मिस्ट्रीज को फुल जाने के लिए और आरोपियों से सच बुलवाने के लिए कई मामलों में नारको टेस्ट करवाया जा चुका है।
  • हाल ही लव जिहाद के मामले में हुए श्रद्धा मर्डर केस में हत्या के आरोपी आफताब पर नारको टेस्ट करने की अनुमति दी गई। दर असल आरोपी आफताब ने अपनी प्रेमिका श्रद्धा की हत्या कर दी थी और उसे 35 टुकड़ों में बांट दिया था। जिसके बाद कोर्ट ने श्रद्धा मर्डर केस में आपका आप पर नारको टेस्ट करने की मंजूरी दे दी।

तो दोस्तों आज इस आर्टिकल के जरिए हमने आपको बताया कि Narco Test Kya Hota Hai? Narco Test Ka Kya Matalab Hai? इसके अलावा इस आर्टिकल के जरिया हमने आपको यह भी बताया की Narco Test और पॉलीग्राफ टेस्ट में क्या अंतर होता है? उम्मीद करते हैं कि हमारा यह आर्टिकल आपको बेहद पसंद आया होगा।

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