Advertisements

चंद्र मिशन का इतिहास और चंद्रमा से जुड़े रोचक तथ्य | Moon Missions History and Facts in Hindi

चंद्र मिशन की शुरुआत, चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति का नाम, पहला चंद्र मिशन का नाम, चंद्रमा से जुड़े रोचक तथ्य (Moon Missions History and Facts in Hindi)

हर इंसान को चांदनी रात खूबसूरत लगती है क्योंकि इसकी शीतलता हमारे तन और मन को ठंडक पहुंचाती है। चांदनी रात का चमकता हुआ चांद भी उतना ही खूबसूरत लगता है जितना कि उससे पनपने वाली चांदनी।

Advertisements

आपने बचपन में चांद से जुड़ी हुई बहुत सी कहानियां सुनी होंगी। रात को जब बच्चे दूध पीने से कतराते हैं तो उनकी मां उन्हें तरह-तरह की लोरियां सुनाती हैं। इन लोरियों में कहीं ना कहीं चांद का जिक्र जरूर होता है। बच्चे आसमान में चमकते हुए चांद को चंदा मामा कह कर बुलाते हैं। लेकिन बच्चों की इन सारी कल्पनाओं से परे चांद का अपना एक विशेष वजूद है।

शुरुआत से ही इंसानों को अंतरिक्ष के चांद में विशेष जिज्ञासा रही है। लोगों में चांद को लेकर एक अलग ही उत्साह दिखाई देता है। यही वजह थी कि धरती के इंसानों ने चांद तक पहुंचने की कई बार कोशिश की। हालांकि शुरू में वैज्ञानिकों को केवल निराशा हाथ लगी लेकिन रामधारी सिंह दिनकर जी ने ठीक ही कहा है मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है। फिर चांद इससे अछूता कैसे रह जाता। आखिरकार इंसानों ने चांद पर पहुंचने का अपना ख्वाब पूरा कर ही लिया।

21 जुलाई 1969 को जब पहली बार नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखा तो मानव का दृढ़ संकल्प और भी मजबूत हो गया। तब से लेकर आज तक चांद पर पहुंचने के लिए अलग अलग देशों से कई सारे प्रयास किए गए और ज्यादातर लोगों को इसमें सफलता भी मिली।

आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चांद पर पहुंचने के लिए शुरु किए गए कुछ विषेश चंद्र मिशन अथवा मून मिशन (Moon Missions History and Facts in Hindi) के बारे में बताने वाले हैं।

इसके अलावा हम आपके साथ चंद्रमा से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts about Moon) भी साझा करेंगे जिससे आपको बहुत सारी मजेदार और नई चीजें जानने को मिलेंगी।

इन्हें भी पढ़ें – अंतरिक्ष के बारे में अद्भुत एवं रोचक तथ्य

Moon Missions History and Facts in Hindi

चंद्र मिशन की शुरुआत कब हुई?(Beginning of Moon Missions)

चांद के रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक हमेशा से उत्सुक रहे हैं लेकिन चांद पर पहुंच कर इन रहस्य की जांच पड़ताल करने की पहली पहल 1950 के दशक में शुरू हुई जब रूस के वैज्ञानिक और स्पेस एजेंसियों ने चंद्र मिशन पर काम करना शुरू किया।

अपने इसी अभियान के तहत सोवियत संघ रूस ऐसा पहला देश बना जिसने अपना अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह पर उतारा। हालांकि रूस द्वारा भेजा गया यह अंतरिक्ष यान मानवरहित था लेकिन रूस का यह प्रयास चांद से जुड़े रहस्यों के लिए कड़ी चुनौती थी।

  • साल 1957 में पहली बार स्पूतनिक-1 नाम के पहले कृत्रिम ग्रह को सोवियत संघ रूस द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया। यह पहला मानव निर्मित कृत्रिम उपग्रह था जिसे अंतरिक्ष में स्थापित किया गया।
  • इस सफलता के बाद सोवियत संघ रूस का दृढ़ संकल्प और भी मजबूत हो गया परिणाम स्वरूप सोवियत संघ रूस ने चांद की सतह पर मानव रहित अंतरिक्ष यान भेजने का निर्णय लिया। हालांकि साल 1958 से 1959 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ रूस द्वारा चांद तक पहुंचने की कई सारे प्रयास किए गए लेकिन हर बार उनके हाथ केवल निराशा लगी।
  • रूस द्वारा भेजा गया लूना-1 अंतरिक्ष यान चांद की सतह के बेहद करीब से गुजरा लेकिन अंतरिक्ष यान में आई कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण यह चंद्रमा की सतह पर नहीं उतर सका और रूस को फिर निराश होना पड़ा।
  • सोवियत संघ रूस ने हार नहीं मानी और आखिरकार लूना प्रोग्राम के तहत भेजा गया लूना-2 अंतरिक्ष यान 14 सितंबर 1959 को चंद्रमा की सतह पर उतरा। यह अंतरिक्ष यान 12 सितंबर को रूस द्वारा भेजा गया था। यह विश्व का पहला ऐसा अंतरिक्ष यान था जिसने चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग की थी।
  • इस मिशन में सफल होने के बाद सोवियत संघ रूस ने अंतरिक्ष में पहुंचने के सतत प्रयास जारी रखे और 12 अप्रैल 1961 को वोस्टोक-1 लांच किया जिसने एक नया इतिहास रचा। यह एक मानव युक्त अंतरिक्ष यान था।
  • 12 अप्रैल 1961 को सोवियत संघ रूस द्वारा लांच किए गए वोस्टोक 1 अंतरिक्ष यान से पहली बार अंतरिक्ष विजेता यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में कदम रखा। अंतरिक्ष की दुनिया में यह मानव जगत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि इससे पहले मानव ने अंतरिक्ष तक पहुंचने की केवल कल्पना की थी।

इस कामयाब मिशन ने पूरी दुनिया के लिए अंतरिक्ष के दरवाजे सदा के लिए खोल दिए। यूरी गागरिन दुनियां के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अंतरिक्ष में कदम रखा। हालांकि चांद तक इंसान को पहुंचाने में अब तक सोवियत संघ नाकामयाब ही रहा। लूना प्रोग्राम के तहत सोवियत संघ रूस ने कई सारे सफल और असफल प्रयास किए। साल 1966 में एक बार फिर से लूना-9 ने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की लेकिन अब भी सोवियत संघ रूस इंसान को चांद तक पहुंचाने में असफल रहा।

कुछ इस तरह से इंसान को चंद्रमा तक पहुंचाने के अभियान की शुरुआत हुई थी लेकिन इसमें पहली बार सफलता संयुक्त राज्य अमेरिका को मिली।

इन्हे भी पढ़ें : मंगल ग्रह से जुड़े रोचक तथ्य >> Interesting Facts About Mars Planet

अमेरिका का मून मिशन (NASA Moon Missions of America)

चांद तक पहुंचने की होड़ में सोवियत संघ रूस से आगे निकलने के लिए अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने भी दृढ़ संकल्प बना लिया था। 

  • चांद पर पहला मानव अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र, NASA द्वारा 1969 में अपोलो 11 के तहत भेजा गया था।
  • इसी मिशन के अंतर्गत नील आर्म्सट्रांग चांद पर पहुंचने वाले पहले इंसान बने। जिन्होंने अपोलो 11 से चांद पर जाकर पहली बार कदम रखा।
  • हालांकि इस मून मिशन में नील आर्मस्ट्रांग के साथ दो और यात्री गए थे जिसमें बज़ एड्रियन (Buzz Adrian) चांद पर कदम रखने वाले दूसरे व्यक्ति बने थे। जबकि इनके तीसरे साथी एडविन एल्ड्रिन ने आर्बिटर पायलट की भूमिका निभाई थी।
  • अपोलो 11 अंतरिक्ष यान चांद पर 20 जुलाई 1969 को 20:17 पर उतरा था। चांद पर उतरने पर इन तीनों अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव कमाल का रहा जिन्होंने चांद की सर जमीन पर पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका का ध्वज फहराया।
  • Apollo 11 धरती पर वापस 24 जुलाई 1969 को आया था। चांद पर अपोलो 11 का रोवर द ईगल भी उतरा था। इस अंतरिक्ष यान की वापसी 24 जुलाई 1969 को हुई थी और  इसकी लैंडिंग प्रशांत महासागर में कराई गई थी जहां से तीनों अंतरिक्ष यात्री सकुशल वापस धरती पर पहुंच गए थे। नील आर्मस्ट्रांग और उनके साथी बज एल्ड्रिन ने चांद पर उतरने के बाद लगभग सवा 2 घंटे बिताए। इतना ही नहीं चांद से धरती पर वापस आते समय अंतरिक्ष यात्री 20 किलोग्राम चट्टान और मिट्टी लेकर भी आए। अपने मिशन को पूरा करके अपोलो इलेवन 24 जुलाई 1969 को प्रशांत महासागर में सुरक्षित वापस आया।
  • इस मिशन में कामयाब होने के बाद चांद पर जाने का सिलसिला कायम रहा और साल 1969 में अपोलो-12, 1971 में अपोलो-14 और 15 तथा 1972 में अपोलो-16 के जरिए नासा ने कई अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा और जांच से जुड़ी कई सारी जानकारियां जुटाई।
  • 1972 में नासा द्वारा भेजा गया अपोलो 17 के जरिए दो अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा गया जिनका नाम यूजीन सेरनन और हैरिसन श्मिट था। इस मिशन के बाद कोई भी मानव मुक्त अंतरिक्ष यान चांद की सतह पर नहीं उतरा।

आइये जाने अंतरिक्ष में तैनात जेम्स वेब टेलिस्कोप के बारे में कुछ खास बातें

भारत का मून मिशन (ISRO Moon Missions of India)

धीरे धीरे चांद तक पहुंचने की होड़ में हमारा देश भारत भी शामिल हो गया। भारत की स्पेस एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ISRO दुनिया की सबसे बेहतरीन स्पेस एजेंसीओं में से एक है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ISRO ने अपने पहले ही प्रयास में चंद्र मिशन में सफलता के साथ साथ कई नए रिकॉर्ड भी स्थापित किए। चांद तक पहुंचने के लिए भारत ने अभी तक दो प्रयास किए जिनमें से हम पहले प्रयास में ही काफी हद तक सफल रहें और दूसरा प्रयास भले ही अंततः विफल हो गया लेकिन इसके जरिए हमने चांद से जुड़ी बहुत सारी जानकारियां इकट्ठा कर ली हैं।

इसलिए चांद तक पहुंचने के भारत के दोनों प्रयास बेहद खास हैं।

चंद्रयान-1

चंद्रमा को लेकर भारत में पहला मून मिशन 2008 में शुरू किया गया। भारत चंद्रयान प्रथम के जरिए अपने पहले ही प्रयास में चंद्रमा तक पहुंचने में समर्थ रहा और इसने चंद्रमा से जुड़ी हुई विशेष जानकारियां भी जुटाई।

22 अक्टूबर 2008 को भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने चंद्रयान प्रथम को लांच किया था जिसने चंद्रमा पर जल की उपस्थिति को लेकर आश्चर्यजनक संकेत दिए थे।

चंद्रयान-2

भारत में साल 2019 में अपने दूसरे मून मिशन को अंजाम दिया जिसके तहत चंद्रयान द्वितीय 22 जुलाई 2019 को लांच किया गया। इस चंद्रयान को भेजने का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराना था जबकि चंद्रयान प्रथम को चंद्रमा की कक्षा में केवल जानकारियां जुटाने के लिए स्थापित किया गया था। इस लिहाज से यह मून मिशन काफी खास था।

6 सितंबर 2019 को चंद्रयान द्वितीय चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया लेकिन जब विक्रम लैंडर की लैंडिंग का का समय आया तो उस दौरान विक्रम लैंडर का संपर्क चंद्रयान-2  से टूट गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र द्वारा पुनः संपर्क स्थापित करने के कई प्रयास किए गए लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

हालांकि भारत का यह मून मिशन भारत के लिए कुछ ज्यादा ही खास रहा क्योंकि इसने भारत को नई उपलब्धियां दी। चंद्रयान द्वितीय की लांचिंग के साथ ही भारत चंद्रमा की कक्षा सीमा में सबसे अधिक दूरी तक पहुंचने वाला देश बन चुका है। यही कारण है कि चंद्रयान द्वितीय इसरो के लिए बेहद खास था।

हालांकि अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र चंद्रयान तृतीय की तैयारी में लगा हुआ है और जल्द ही भारत अपना अगला मून मिशन लॉन्च करेगा।

इन्हें भी जानें- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो का इतिहास एवं रोचक तथ्य

चंद्रमा से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts About Moon in hindi)

  • चंद्रमा पृथ्वी का एकलौता प्राकृतिक उपग्रह है हालांकि कई अन्य ग्रहों के पास एक से अधिक प्राकृतिक उपग्रह मौजूद हैं।
  • शोध के अनुसार चंद्रमा की उत्पत्ति लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले मानी जाती है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा का वजन तकरीबन 81 अरब टन होगा।
  • चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 384000 किलोमीटर दूर है।
  • चंद्रमा सूर्य के प्रकाश में चमकता है क्योंकि चंद्रमा के भीतर स्वयं का कोई प्रकाश नहीं।
  • चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का 1/6 है यानी कि अगर पृथ्वी पर किसी इंसान का भार 60 किलो होगा तो चंद्रमा पर वह बस उसका 1/6 यानी 10kg ही होगा।
  • समुद्र में होने वाली ज्वार भाटा की घटना चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के परस्पर आकर्षण के कारण ही होती है।
  • साल 2008 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इसरो द्वारा अंजाम दिए गए चंद्रयान प्रथम मिशन के जरिए चंद्रमा पर बर्फ के रूप में पानी की खोज की गई। जिसके बाद इस बात की पुष्टि अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र नासा ने भी की।
  • चंद्रमा पर वायुमंडल उपलब्ध नहीं है यही कारण है कि वहां जीवन नहीं पाया जाता।
  • अब तक चंद्रमा की सतह पर कुल 12 अंतरिक्ष यात्रियों ने कदम रखा है।
  • चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यान लूना 2 जिसे सोवियत संघ रूस द्वारा लांच किया गया था।
  • चंद्रमा की सतह पर कदम रखने वाला पहला आदमी नील आर्म्सट्रांग था जो अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र नासा द्वारा अपोलो इलेवन यान में भेजा गया था।
  • चंद्रमा पर दूसरा कदम बज एड्रियन ने रखा था जो अपोलो इलेवन यान में नील आर्मस्ट्रांग के साथ चंद्रमा पर गए थे।
  • रूढ़िवादी लोग मानते हैं कि चंद्रमा का एक हिस्सा काला है जबकि चंद्रमा का यह हिस्सा पीछे होने के कारण पृथ्वी वासियों को नहीं दिखाई देता। हमें केवल चंद्रमा का अगला हिस्सा ही दिखाई देता है।
  • चंद्रमा की कक्षा में सबसे अधिक दूरी तय करने वाला देश भारत है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इसरो द्वारा लांच किए गए चंद्रयान द्वितीय द्वारा चंद्रमा के कक्षा में सबसे अधिक दूरी तय की गई।
  • यूजीन सेरनन चंद्रमा की सतह पर अपने कदमों की छाप छोड़ने वाला आखिरी अंतरिक्ष यात्री था जो अपोलो 17 या द्वारा नासा से भेजा गया था। यूजीन के बाद अब तक कोई भी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर नहीं उतरा।

आज इस आर्टिकल के जरिए हमने आपको चंद्रमा से जुड़े हुए सभी मिशन के बारे में बताया इसके साथ ही हमने आपको चंद्रमा से जुड़े हुए कई सारे रोचक तथ्यों के बारे में भी बताया। उम्मीद करते हैं कि यह आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया होगा।

Leave a Comment