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भीमराव अंबेडकर जयंती पर भाषण व निबंध | Ambedkar Jayanti 2023 Speech & Essay in Hindi

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भीमराव अंबेडकर भारत के एक महान राजनीतिज्ञ, समाजशास्त्री और समाज सुधारक थे। वे भारतीय संविधान के मुख्य लेखक थे और भारत के पहले कानून मंत्री भी थे। उन्होंने भारत के अनेक गंभीर मुद्दों पर गहनता से विचार और शोध किए उनकी विचारधारा के अनुसार समाज में जातिवाद, असमानता और अधिकारों के विभिन्न मुद्दों को सुधारने के लिए आवाज उठाने की जरूरत है।

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जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अग्रणी समाज सुधारकों में से एक थे।

उन्होंने भारत में सामाजिक न्याय, समानता, और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और वह दलितों की समस्याओं के लिए संघर्ष करते रहें। वे हमेशा से ही शिक्षा को बहुत अधिक महत्व देते थे। उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। इसके साथ-साथ उन्होंने कानून भी पढ़ा और लॉयर बनने के बाद जनता के अधिकारों के लिए कानूनी संघर्ष लड़ने लगे।

आज भी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के प्रेरणादायक विचार देश भर के युवाओं को प्रेरणा देते हैं और उन्हें शिक्षा एवं सामाजिक विकास के पथ पर अग्रसर करते हैं।

14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें निबंध लेखन प्रतियोगिता तथा भाषण एवं मंचन आदि शामिल हैं।

आज इस लेख के जरिए हम आपके लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जयंती पर भाषण एवं निबंध लेकर आए हैं।

भीमराव अंबेडकर जयंती पर भाषण | Ambedkar Jayanti par Bhashan-Speech-in-hindi

भीमराव अंबेडकर जयंती पर भाषण व निबंध (Ambedkar Jayanti 2023 Speech & Essay in Hindi) –

अगर आप किसी स्कूल कॉलेज या सेमिनार में अंबेडकर जयंती के अवसर पर भाषण देने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए नीचे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जिन्हें पढ़कर आप भीमराव अंबेडकर पर शानदार भाषण तैयार कर सकते हैं।

  • अंबेडकर के जीवन और कार्यों के बारे में अध्ययन करें।
  • उन्होंने देश के लिए योगदान दिए हैं, उन योगदान ओं के बारे में जाने।
  • उनके समाज सुधार के विचारों और संघर्षों के बारे में पढ़ें।
  • “भीमराव अंबेडकर को लेकर आपके क्या विचार है”इसे अपने भाषण में जरूर शामिल करें

उदाहरण के लिए, आप इस तरह का भाषण तैयार कर सकते हैं –

भीमराव अंबेडकर जयंती 2023 पर भाषण (Speech On Bhimrao Ambedkar Jayanti In Hindi) –

प्रिय मित्रों,

आज हम सभी मिलकर भारत के महान संविधानविद, समाजवादी और नेता डॉ. बी.आर. अंबेडकर जी की जयंती मना रहे हैं। उन्होंने भारतीय समाज को समता, न्याय और स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया।

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डॉ. अंबेडकर ने भारतीय समाज में जाति-व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी और समाज को एक समान संविधान देने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने भारतीय संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया और संविधान सभा के रूप में इसे अंतिम रूप दिया। उन्होंने भारत के संविधान को भारतीय समाज के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक बनाया।

डॉ. अंबेडकर एक महान सोच वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने न सिर्फ भारत के बल्कि विश्व के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने समाज को जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए कार्य किया और उनके समाजवादी विचारों ने समाज में न्याय के लिए एक नई दृष्टि प्रदान की।

अंबेडकर जी का जीवन एक महान कहानी है। उन्होंने एक जाति के लोगों के लिए न्याय की मांग की और संघर्ष किया। उनके लिए भीमराव अंबेडकर ने एक नई जाति के लिए संघर्ष किया जो समाज के दबाव के तहत अपने अधिकार और समानता की मांग कर रही थी। उन्होंने संविधान के निर्माण में भी एक अहम भूमिका निभाई थी जिससे देश की जनता को समानता, स्वतंत्रता और न्याय की भावना मिली।

डॉ भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में भारतीय विधि निर्माण के अलावा विभिन्न प्रकार के समाज कल्याण कार्य भी किए जिनमें महिला सशक्तिकरण पिछड़े समुदाय का विकास तथा जाति प्रथा उन्मूलन के प्रयास शामिल हैं।

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केवल इतना ही नहीं जब भारत में पहली बार सरकार बनी तब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के पहले कानून मंत्री बने थे। आज की युवा पीढ़ी को उनके आदर्श जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और समाज में चल रही भ्रष्टाचार और व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन के लिए प्रयास करना चाहिए।

साल 1990 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को उनके योगदान के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया। आज डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में आप सभी ने मुझे बोलने का मौका दिया उसके लिए धन्यवाद!

इन्हें भी पढ़ें-

भीमराव अंबेडकर 2023 जयंती पर निबंध (Bhimrao Ambedkar Jayanti Essay In Hindi) –

प्रस्तावना

14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्में भीमराव अंबेडकर महार जाति से संबंधित एक दलित परिवार से थे। उनके परिवार में गंभीर आर्थिक समस्याएं थीं, इसलिए वे बचपन से ही जीवन के कठिनाईयों से लड़ना सीख गए। उनके माता-पिता की 14 संताने थी, अंबेडकर सबसे छोटे थे।

महार परिवार का होने के कारण बचपन से ही उनके साथ छुआछूत जैसा अन्याय होता रहा, इस तरह के व्यवहार से परेशान होकर उन्होंने यह ठान लिया कि समाज से छुआछूत और असमानता को हटा कर ही दम लेंगे।

अपने जीवन में उन्होंने सबसे ऊपर शिक्षा को महत्व दिया, शिक्षा के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने बॉम्बे युनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र और राजनीति शिक्षा से डिग्री हासिल की और महेश 22 साल की उम्र में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के लिए वे अमेरिका चले गए।

दलितों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने पत्रिकाओं का सहारा लिया, वे बहिष्कृत भारत ,मूकनायक पर जनता नाम की पत्रिकाओं का संपादन करते थे जिसमें दलितों के विषय में खूब लिखा जाता था।

उनके समाज सुधार के कार्यों में संघर्ष करने के साथ-साथ उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी एक अहम भूमिका निभाई। भारतीय संविधान उनके नेतृत्व में बना था, जो भारत को संवैधानिक संरचना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भीमराव अंबेडकर का योगदान –

डॉ. भीमराव अंबेडकर, भारत के एक महान समाजवादी नेता थे। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, भारत से छुआछूत मिटाने और दलितों और अन्य पिछड़ी जातियों को उनका हक दिलाने का श्रेय भीमराव अंबेडकर को ही जाता है, वे हमेशा से ही भारत में जाति प्रथा और वर्ण व्यवस्था के विरोधी रहे, वे चाहते थे कि भारत में जाति और वर्ण व्यवस्था खत्म हो और सभी को समानता का अधिकार और समान न्याय मिले।

गरीबों और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए समाज के लोगों की मदद करने के लिए भीमराव अंबेडकर ने सन् 1936 इंडिपेंडेंट लेबर नाम की एक पार्टी भी बनाई, इस पार्टी का उद्देश्य मुख्य रूप से गरीबों की मदद करना रहा।

अंबेडकर ने भारत के संविधान का मसौदा तैयार किया था, जो 26 जनवरी 1950 को भारत की संवैधानिक व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया हुआ।

भारत के संविधान के लिए उन्होंने “भारतीय संविधान निर्माण समिति” का गठन किया था, जो उस समय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। अंबेडकर इस समिति के अध्यक्ष बने, कई देशों के संविधान के बारे में पढ़कर अंत में भारतीय संविधान का निर्माण किया गया तथा स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बने।

भारत के लोग भीमराव अंबेडकर के विचारों और संघर्ष से प्रभावित हुए थे। उन्होंने अपने जीवन के कठिनाईयों के बावजूद समाज के उन वर्गों के लिए लड़ा जो सामाजिक उत्पीड़न के शिकार थे। भारत के नए भविष्य के लिए उनके विचारों और संघर्ष को जारी रखना हम सभी का दायित्व है।

भीमराव अंबेडकर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य (Facts about Bhim Rao Ambedkar in hindi)

शिक्षा के लिए बेहद लंबा संघर्ष करने और अंत में विदेश से डिग्री हासिल करने वाले अंबेडकर का जीवन बेहद रोचक रहा हैं, उन्हें दलितों का मसीहा कहा जाता है , आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े हुए कुछ रोचक तथ्य

  • एक दलित परिवार में जन्म लेने वाले भीमराव अंबेडकर अपनी माता भीमाबाई और पिता रामजी मलोजी सकपाल की चौदहवीं संतान थी।
  • अंबेडकर के बचपन का नाम अंबावाडेकर था, जबकि भीमराव अंबेडकर उनके स्कूल के एक शिक्षक द्वारा दिया गया नाम है।
  • अंबेडकर ने सन 1935 में स्थापित हो रहे भारतीय रिजर्व बैंक को तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
  • भीमराव अंबेडकर पहले ऐसे भारतीय थे जिन्होंने विदेश से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की थी, वे आज भी भारत के उच्च शिक्षित व्यक्तियों में गिने जाते हैं।
  • अंबेडकर को संविधान निर्माण के दौरान स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति बनने की संभावना थी, लेकिन उन्हें इस पद के लिए चुना नहीं गया।

उपसंहार

उन्होंने भारतीय समाज को एकता, समानता और सामंजस्य की ओर ले जाने के लिए समस्त जीवन का समर्थन किया। उन्होंने जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया और नागरिकों को समान अधिकारों का अधिकार दिलाने के लिए लड़ा।

भीमराव अंबेडकर भारत के समाज सुधारकों में से एक थे। उनकी जीवनी हमें बताती है कि सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न के बावजूद एक व्यक्ति किसी भी वस्तुओं से सबकुछ हासिल कर सकता है।

उनके नेतृत्व में भारत में आज भी उनके समाज सुधार के विचार चलते हैं।भारत को भीमराव अंबेडकर के जैसे समाज सुधारकों की आवश्यकता है, जो समाज को आगे ले जाने के लिए और समानता का अवसर दिलाने के लिए संघर्ष करें।

भारत के लोग भीमराव अंबेडकर को एक महान नेता के रूप में याद करते हैं जो उनके समाज के लिए कानून बनाने की कोशिश की और समाज को एक स्थान पर जोड़ने की कोशिश की। उनका संघर्ष एक महान उदाहरण है जो हमें आज भी एक समान और न्यायपूर्ण समाज के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।

भीमराव अंबेडकर जयंती कब है?

14 अप्रैल 2023

भीमराव अंबेडकर कौन थे?

अंबेडकर भारत के पहले कानून मंत्री थे। वह भारतीय संविधान सभा के अंतर्गत आने वाली कमेटी प्रारूप समिति के अध्यक्ष भी थे।

संविधान दिवस कब है?

26 नवंबर 2023

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